78 साल के मोघेजी के फिर जगे अरमान, कार्यकर्ता कह रहे-सिर्फ जन्मदिन मनाने से नहीं शुरू होने वाली साहब की दुकान.
इंदौर। भाजपा के पूर्व संगठन महामंत्री, पूर्व सांसद और पूर्व महापौर कृष्णमुरारी मोघे काफी दिनों बाद कल यानी मंगलवार 2 दिसंबर को चर्चा में रहे। अवसर था उनके जन्मदिन का और सोशल मीडिया पर जमकर माहौल बनाने की कोशिश की गई। अब भाजपा में इस बात की चर्चा है कि आखिर मोघेजी के अरमान अचानक क्यों जग पड़े। कार्यकर्ता तो यह भी कह रहे हैं कि सिर्फ जन्मदिन मनाने से वर्षों से बंद पड़ी राजनीति की दुकान नहीं शुरु हो पाएगी।
उल्लेखनीय है कि एक समय मोघेजी की भाजपा में तूती बोलती थी। संगठन महामंत्री होने के नाते टिकट से लेकर पद बांटने तक के फैसले उनकी सहमति से होते थे। उन्होंने कई नेताओं को मंत्री, विधायक और सांसद तक बनवाया। भाजपा ने उनका भरपूर सम्मान भी दिया और कई पदों पर बिठाया। यहां तक कि इंदौर के महापौर का टिकट बांटने आए मोघेजी को खुद ही महापौर का टिकट दे दिया।
इतने साल इंतजार क्यों किया
भाजपा के कार्यकर्ता यह सवाल कर रहे हैं कि अब भी आपके कोई अरमान बचे हैं तो आपने इतने सालों तक इंतजार क्यों किया? इक्का-दुक्का कार्यक्रमों में उपस्थिति के अलावा आप कहीं नजर नहीं आते। आपके दरवाजे पर कभी उमड़ने वाली भीड़ भी धीरे-धीरे छंटने लगी। अगर समय रहते उसे रोक लेते तो फिर से दुकान खुलने के चांस थे, लेकिन अब तो काफी देर हो चुकी है।
भाजपा ने ही कर लिया किनारा
मोघेजी, आपको भी पता है कि भाजपा में ही आपका महत्व कम हो गया है। अगर भाजपा आपको महत्व दे रही होती तो आप या तो राज्यसभा में चले गए होते या फिर किसी राज्य के राज्यपाल बन गए होते। आपको भी ऐसी ही उम्मीद थी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। इसका मतलब साफ है कि पार्टी के लिए आप लालकृष्ण आडवाणी बन चुके हैं। ऐसे में फिर से दुकान खोलने की कोशिश बेकार है।
बंद दुकान वाले ही ज्यादा पहुंचे
अपने जन्मदिन पर सिटी फॉरेस्ट पर आयोजित कार्यक्रम में आपने देखा होगा कि अधिकांश वही नेता पहुंचे जिनकी दुकानें बंद हो चुकी हैं। इस पर जरा सोचिएगा कि आखिर आपके साथ के लोग कहां गए चले गए। जिनको आपने टिकट दिलवाया, जिन्हें बड़े पद तक पहुंचाया आखिर वे कहां हैं। राजनीति में यही होता है। अब देख लीजिए न ठाकुर ने अपनी बंद दुकान फिर कैसे चालू कर ली। चूंकि ठाकुर लगातार सक्रिय रहे और विरोध के बाद भी माहौल बनाने की कोशिश करते रहे, लेकिन आप तो मैदान छोड़ कर ही भाग गए थे।
सुमित मिश्रा के आगमन से खुश मत होइएगा
आपके बर्थडे पर नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा पहुंचे थे, लेकिन उनके आगमन से खुश मत होइएगा। क्योंकि, उनका एक ही एजेंडा है खुद को सारे गुट के बताना और तीन नंबर विधानसभा से चुनाव लड़ना। गोलू तो भोला है, पर आप तो समझदार हैं। सबको खुश करने की कोशिश में सुमित तो कई बार अपना खेमा ही भूल जाते हैं। उनका नारा है-सबका साथ, खुद का विकास।
साहब, दुकान चलानी है तो दम दिखाना पड़ेगा
भाजपा के ही कई नेता कह रहे हैं कि साहब को अगर दुकान चलानी है तो दम दिखाना पड़ेगा। ऐसे बर्थ डे मनाने से कुछ नहीं होगा। इसलिए अगर सचमुच फिर से अरमान जग रहे हैं तो खुद को फिर से जिंदा कीजिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उम्र से खुद की तुलना मत कीजिएअपने कार्यकर्ताओं और आपकी कृपा से बड़े हो चुके लोगों को टटोलिए और ताकत दिखाइए। अब इंदौर की राजनीति या यूं कहें कि भाजपा की राजनीति काफी बदल चुकी है, इसलिए अपना सम्मान छीनना होगा, कोई देगा नहीं।