40 साल बाद कानून का शिकंजा .
40 साल बाद कानून का शिकंजा
दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर के खिलाफ 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान उत्तरी दिल्ली के पुल बंगश इलाके में तीन लोगों की हत्या के मामले में आरोप तय करने के निर्देश दिए हैं.इस मामले में सुनवाई के दौरान स्पेशल सीबीआई जज राकेश सियाल ने कहा कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के पर्याप्त सबूत हैं.
1984 दंगों के मामलों पर अदालत में पैरवी कर रहे सीनियर वकील एचएस फुलका ने अदालत की कार्यवाही की जानकारी देते हुए कहा, आज अदालत ने तीन सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे को जलाने के आरोप में जगदीश टाइटलर के खिलाफ आरोप तय कर दिए.

एक नवंबर 1984 को जगदीश टाइटलर उस भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे जिसने एक गुरुद्वारे को जला दिया था और तीन सिखों की हत्या कर दी थी. पिछले चालीस साल से पीड़ित ये कह रहे थे कि जगदीश टाइटलर ही इस भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे लेकन दुर्भाग्य से उनके खिलाफ कोई मुकदमा शुरू नहीं हो सका था. गौरतलब है कि 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी.इसके दूसरे दिन ही राजधानी दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी दंगे भड़क गए थे.
Article By :
Abhilash Shukla
40 साल बाद कानून का शिकंजा
दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर के खिलाफ 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान उत्तरी दिल्ली के पुल बंगश इलाके में तीन लोगों की हत्या के मामले में आरोप तय करने के निर्देश दिए हैं.इस मामले में सुनवाई के दौरान स्पेशल सीबीआई जज राकेश सियाल ने कहा कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के पर्याप्त सबूत हैं.
1984 दंगों के मामलों पर अदालत में पैरवी कर रहे सीनियर वकील एचएस फुलका ने अदालत की कार्यवाही की जानकारी देते हुए कहा, आज अदालत ने तीन सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे को जलाने के आरोप में जगदीश टाइटलर के खिलाफ आरोप तय कर दिए.
एक नवंबर 1984 को जगदीश टाइटलर उस भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे जिसने एक गुरुद्वारे को जला दिया था और तीन सिखों की हत्या कर दी थी. पिछले चालीस साल से पीड़ित ये कह रहे थे कि जगदीश टाइटलर ही इस भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे लेकन दुर्भाग्य से उनके खिलाफ कोई मुकदमा शुरू नहीं हो सका था. गौरतलब है कि 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी.इसके दूसरे दिन ही राजधानी दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी दंगे भड़क गए थे.