सनातन प्रीमियर लीग में राजसी संतों की भीड़ देख उठ रहे हैं सवाल-क्या मुफ्त में आए होंगे, जनता कह रही है-कथा की फीस कम हो तो सनातन का हो जाए भला.
इंदौर। इंदौर के नेहरू स्टेडियम में सनातन प्रीमियर लीग (एसपीएल) कराने वाले देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने जमावट तो अच्छी कर ली। बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला से लेकर अनिरुद्धाचार्य जी महाराज जैसे महंगे संत और ग्रेट खली तक इस आयोजन की शोभा बढ़ाने आ गए। अब यहां सवाल यह उठ रहा है कि ग्रेट खली से लेकर यहां पधारे अधिकांश संत मुफ्त में कहीं शोभा बढ़ाने नहीं जाते।
आयोजक देवकीनंदन ठाकुर की कथा कराने वाले जजमानों का कहना है कि महाराज कभी भी 10-12 लाख से नीचे बात नहीं करते। ऊपर जाएं तो 25-30 लाख तक आंकड़ा पहुंच जाता है। पं. अनिरुद्धाचार्य महाराज की फीस भी ठाकुर साहब के आसपास ही है। ठाकुरजी के मित्र पं.प्रदीप मिश्रा की तो बात ही निराली है। यह महाराज तो कभी-कभी 50 लाख में भी उपलब्ध नहीं होते। इनकी न्यूनतम फीस ही 25 लाख से शुरू होती है। यही हाल अधिकांश संतों का है।
फीस न मिलने पर कथा से इनकार
इन महाराजों के बारे में कई बार ऐसी खबरें आई हैं, जब उन्होंने पूरी फीस नहीं मिलने पर कथा से इनकार कर दिया था। मध्यप्रदेश के ही एक प्रसिद्ध महाराज ने कहीं कथा के लिए 35 लाख की डिमांड की थी, लेकिन शायद 3 से 5 लाख रुपए कम पड़ रहे थे। महाराज ने कथा से इनकार कर दिया और कई दिनों तक यह खबर सोशल मीडिया में चर्चा में रही। ऐसे ही कई अन्य कथाकारों के हाल हैं।
जनता कह रही, मुफ्त में कथा ही करा देते
सनातन प्रीमियम लीग से सनातन का कितना भला होगा, यह तो पता नहीं लेकिन आयोजकों का भला जरूर होना है। अब जनता कह रही है कि क्रिकेट के नाम पर इतने संतों को बुला लिया तो इसी में कथा भी करा देते। क्रिकेट के बहाने सनातन का भी भला हो जाता।
गरीब जजमान की पहुंच में कब आओगे महाराज
जनता तो यह भी कह रही है कि देवकीनंदन ठाकुर महाराज अगर सचमुच सनातन का भला चाहते हैं, अपने साथी कथा वाचकों से फीस कम करने का कहें। गरीब जजमान तो इन कथा वाचकों तक पहुंचने का सोचता भी नहीं है। अगर ठाकुर महाराज संतों की फीस कम करवाकर गरीबों के यहां भी कथा करवाने लगें तो निश्चित तौर पर सनातन का भला होगा।
ठाकुर महाराज ने तो साध लिया है निशाना
इस आयोजन को लेकर चर्चा आम है कि देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने अपना काम कर लिया है। लोकसभा चुनाव से उनके मन में सनातन के नाम पर एक संगठन खड़ा करने की आस अब पूरी होती दिखने लगी है। हो सकता है आने वाले लोकसभा चुनाव तक महाराज अपना भक्तों से अलग समर्थकों की एक फौज खड़ी करने में सफल हो जाएं।