पश्चिम एशिया में जंग की आग: ट्रंप–नेतन्याहू के हमलों से दुनिया दो कूटनीतिक ध्रुवों में बंटी.
पश्चिम एशिया में जंग की आग: ट्रंप–नेतन्याहू के हमलों से दुनिया दो कूटनीतिक ध्रुवों में बंटी
पश्चिम एशिया में डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में किए गए अमेरिकी–इजराइली हमलों ने पूरे क्षेत्र में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। ईरान पर मिसाइल और नौसेना हमलों के बाद जहां कुछ देशों ने इन कार्रवाइयों का समर्थन किया, वहीं कई देशों और संगठनों ने कड़ी आलोचना करते हुए शांति और संवाद की अपील की। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर विरोध-प्रदर्शन और कूटनीतिक प्रतिक्रियाओं ने दुनिया को दो स्पष्ट ध्रुवों में बांट दिया है।
शनिवार सुबह ट्रंप ने ईरान के मिसाइल उद्योग और उसकी नौसेना को “नेस्तनाबूद” करने के उद्देश्य से बड़े सैन्य अभियान की घोषणा की। वाशिंगटन ने इसे ईरानी शासन से उत्पन्न खतरों को खत्म करने का मिशन बताया। वहीं नेतन्याहू ने इसे इजराइल के अस्तित्व की रक्षा के लिए जरूरी कदम करार देते हुए कहा कि इससे ईरानी जनता को अपना भविष्य स्वयं तय करने का अवसर मिलेगा।
संघर्ष के बाद भारत के कश्मीर से लेकर जर्मनी और ब्रिटेन तक कई जगहों पर समर्थन और विरोध में प्रदर्शन हुए। इस बीच कई इस्लामी देशों ने भी ईरान की आलोचना करते हुए अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों का समर्थन किया। यूएई, सऊदी अरब, कतर, बहरीन, कुवैत और यूक्रेन ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दर्ज कराईं।
यूएई ने ईरान के हमलों को “कायराना हरकत” बताते हुए जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखने की बात कही, जबकि सऊदी अरब ने गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। यूक्रेन ने इस तनाव के लिए ईरान में आंतरिक दमन और हालिया महीनों में प्रदर्शनकारियों पर हुई हिंसा को जिम्मेदार ठहराया।
यूरोप ने तनाव कम करने पर जोर दिया। यूरोपीय संघ, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने ईरान से अंधाधुंध सैन्य कार्रवाई रोकने और वार्ता फिर शुरू करने की अपील की। फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने संयुक्त बयान में पश्चिम एशियाई देशों पर ईरानी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। बेल्जियम ने कहा कि ईरानी जनता को अपनी सरकार के फैसलों की कीमत नहीं चुकानी चाहिए।
दूसरी ओर, कई प्रभावशाली देश ईरान के समर्थन में भी सामने आए। इनमें रूस, चीन, ओमान, तुर्किये और नॉर्वे शामिल हैं। रूस ने अमेरिका पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वाशिंगटन ने ईरान के साथ चल रही परमाणु वार्ता का इस्तेमाल अपने सैन्य हमलों को छिपाने के लिए किया। रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने तंज कसते हुए कहा कि “शांतिदूत ट्रंप” ने एक बार फिर अपना असली चेहरा दिखा दिया है। चीन ने भी सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकने और ईरान की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की मांग की।
दक्षिण अमेरिका से भी कड़ी प्रतिक्रिया आई। ब्राजील ने ईरान में हुए हमलों की तीखी निंदा करते हुए कहा कि ये ऐसे समय में किए गए जब बातचीत की प्रक्रिया चल रही थी। ब्राजील के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि विवादों के समाधान के लिए संवाद ही एकमात्र वैध और टिकाऊ रास्ता है।
इन परस्पर विरोधी रुखों के बीच पश्चिम एशिया की यह जंग अब केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रही, बल्कि वैश्विक कूटनीति की दिशा तय करने वाला बड़ा मोड़ बनती जा रही है।