किसी भी हाल में संविधान बदलना चाहता है डीसी बोर्ड, संघ के माध्यम से अधिकारियों पर बना रहा दबाव, शिकायत करने वालों की आवाज दबाने की भी कोशिश.
इंदौर। डेली कॉलेज का वर्तमान बोर्ड किसी भी हाल में संविधान बदलकर चुनाव नहीं कराने की कोशिश में जुटा है। इसके लिए संघ के कुछ पदाधिकारियों के माध्यम से भोपाल और इंदौर के अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है। इतना ही नहीं इंस्टाग्राम पर वाइस ऑफ डीसी के माध्यम से जो सदस्य और पैरेंट्स आवाज उठा रहे हैं, उसे भी दबाने की कोशिश हो रही है।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान डीसी बोर्ड में धीरज लुल्ला और मोनू भाटिया जैसे सदस्य डेली कॉलेज का संविधान बदलने की कोशिश में लगे हैं ताकि चुनाव ही नहीं कराना पड़े। इसके लिए हर तरह की कोशिश की जा रही है। संघ के एक पदाधिकारी के माध्यम से भोपाल और इंदौर के अफसरों पर दबाव बनाया जा रहा है। बिना एजीएम मनमाने तरीके से एक्सटेंशन लेकर बैठा बोर्ड 12 नवंबर को बैठक बुलाकर संविधान बदलना चाहता है। इसके खिलाफ लोग सोशल मीडिया पर आवाज उठा रहे हैं, उन्हें भी दबाने की कोशिश की जा रही है।
इंस्टाग्राम से ऑडियो हटाने की कोशिश
इंस्टाग्राम पर वाइस ऑफ डिसी के माध्यम से लोगों ने पहले धीरज लुल्ला से सवाल किए थे। इसके बाद मोनू भाटिया को लेकर भी टीका-टिप्पणी की गई। इतना ही नहीं मोनू भाटिया का एक पुराना वीडियो डाला गया था। इसमें वे श्री गुरुसिंह सभा के चुनाव के दौरान समाज को बता रहे हैं कि चुनाव कितना जरूरी है। लोगों ने जब सवाल उठाए कि उस समय चुनाव जरूरी था, लेकिन डेली कॉलेज में चुनाव जरूरी नहीं है। इसके बाद वाइस ऑफ डीसी से इस वीडियो से ऑडियो हटाने की कोशिश की गई।
आप खुद ही पढ़ लीजिए, क्या चल रहा है
तो कल इन्होंने पिछली दो पोस्ट से ऑडियो हटवा दिया।
सच को दबाने की कोशिश की-लेकिन सच ज़्यादा देर डिलीट नहीं रहता।
ऑडियो वापस आ गया है, पहले से भी ज़्यादा तेज़।
अब तो इंस्टा हैंडल हटाने की भी कोशिश चल रही है!!
वे ऑडियो को म्यूट कर सकते हैं,
लेकिन आपकी आवाज़ को नहीं-
अलुमनाई की आवाज़, पैरेंट्स की आवाज़, DC की आवाज़, सच की आवाज़।
यही सब कुछ फिर से साबित करता है जो हम अब तक कहते आए हैं।
हम लगातार उम्मीद करते रहे कि शायद वे हमें गलत साबित करेंगे-
कि वे दिखाएँगे कि हमारे स्कूल में सब ठीक है।
लेकिन उन्होंने क्या किया?
AGM पर स्टे ले लिया, नए डोनर्स को ब्लॉक कर दिया,
और संविधान बदलने की कोशिश कर रहे हैं ताकि कोई उनसे सवाल भी न पूछ सके।
अब, हाँ-हम डरे हुए हैं।
इसलिए नहीं कि वे हमें चुप कराने की कोशिश कर रहे हैं,
बल्कि इसलिए कि हम जिस चीज़ से, जिन लोगों से सामना कर रहे हैं,
वह हमारी सोच से कहीं ज़्यादा डरावना है।
ये लोग साफ़ तौर पर हमारे स्कूल के भलाई चाहने वाले नहीं हैं।
ईश्वर DC की रक्षा करे।
कलेक्टर से शिकायत के बाद और हुए सक्रिय
वर्तमान डीसी बोर्ड की काली करतूतों का काला चिट्ठा जब वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा तक पहुंचा तब से बोर्ड के विवादित सदस्य और सक्रिय हो गए हैं। पिछले दिनों एक प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर शिवम वर्मा से मुलाकात कर इस मामले की पूरी जानकारी दी है। प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से कहा कि डीसी बोर्ड ने 25 अक्टूबर को एक नोटिस जारी कर 12 नवंबर को एक बैठक बुलाई है। इसमें बोर्ड के सिर्फ 9 सदस्य ही उपस्थित रहेंगे। नियम के विपरित यह मीटिंग बुलाकर डीसी बोर्ड संविधान में संशोधन करना चाहता है जिससे कि वह हमेशा सत्ता में रहे। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इससे जुड़ा केस अभी सक्षम अधिकारी के समक्ष लंबित है और यह बोर्ड अपने पावर का दुरुपयोग कर रहा है।
संघ के पदाधिकारी से बनवा रहे दबाव
सूत्र बताते हैं कि लुल्ला ने डेली कॉलेज का संविधान बदलने के लिए फर्म एंड सोसायटी के एक अधिकारी को 20 लाख रुपए की पेशकश की थी। उक्त अधिकारी ने यह बात तत्कालीन कलेक्टर आशीष सिंह तक पहुंचा दी। आशीष सिंह ने इस मामले में सख्त हिदायत देते हुए नियमानुसार ही काम करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद उस अधिकारी ने 29 अगस्त 25 को एक आदेश देकर डेली कॉलेज में वार्षिक आमसभा बुलाने को कहा था। इसके बाद लुल्ला भोपाल पहुंच गए और वहां से एक वरिष्ठ अधिकारी के माध्यम से इस पर स्टे ले आए। अब जबकि मामला वर्तमान कलेक्टर तक पहुंच गया है, लुल्ला संघ के एक पदाधिकारी के माध्यम से फर्म एंड सोसायटी के अधिकारी पर दबाव बनवा रहे हैं।
भोपाल के अधिकारियों की चुप्पी भी चौंका रही है
प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर को सौंपे अपने ज्ञापन में कहा था कि डीसी बोर्ड ने एक जुलाई 25 को अपनी मीटिंग में बिना एजीएम बुलाए गलत तरीके से संविधान बदलने का प्रयास किया। इस के विरुद्ध सब रजिस्टर के पास याचिका दायर की थी, जिसका निर्णय अभी लंबित हैं। इतना ही नहीं 29 अगस्त 25 को एक आदेश पारित किया गया कि डेली कॉलेज में वार्षिक आमसभा बुलाई जाए, जिसमें सभी सदस्यों को आमंत्रित किया जाए। इस आदेश के विरुद्ध डेली कॉलेज ने रजिस्ट्रार भोपाल में अपील दायर की एवं 19 सितंबर 25 को डेली कॉलेज को स्टे मिला है। इस स्टे के बाद अब तक कोई आदेश नहीं आया न ही इसको लेकर सुनवाई की गई। समझ नहीं आ रहा कि आखिर कि दबाव में भोपाल अधिकारी फैसला नहीं ले पा रहे हैं।
स्टे पर डीसी बोर्ड की बैठक बुलाना गलत
डेली कॉलेज के सदस्यों का कहना है कि पहले तो डीसी बोर्ड ने 29 सितंबर 25 को एक बैठक कर स्वयं का कार्यकाल चार महीने के लिए बढ़ा लिया। इसके बाद स्टे के आधार पर 12 नवंबर को बैठक बुलाकर संविधान बदलने की कोशिश हो रही है, जो कि नियमानुसार गलत है। स्टे के दौरान इस तरह का कोई फैसला नहीं लिया जा सकता।
खुशी कुलवाल केस से लेकर बैंक तक बदनामी
लोगों को इस बात पर आश्चर्य है कि संघ के जिस पदाधिकारी लुल्ला की मदद कर रहे हैं, क्या उन्हें नहीं पता है कि खुशी कूलवाल सुसाइड केस में लुल्ला का नाम आ चुका है। इतना ही नहीं वह बैंक करप्ट भी है। सूत्रों के अनुसार इसी लुल्ला के चक्कर में एक पूर्व कलेक्टर आज तक बदनाम और परेशान हैं। आमतौर पर लोगों की धारणा है कि इस तरह के मामले में संघ कभी नहीं पड़ता, लेकिन अधिकारियों को लगातार उस पदाधिकारी के फोन जा रहे हैं।