राहुल गांधी ने लोकसभा स्पीकर को लिखी चिट्ठी.
राहुल गांधी ने लोकसभा स्पीकर को लिखी चिट्ठी
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को चिट्ठी लिखकर सदन में उनके भाषण के कुछ अंशों को हटाए जाने पर चिंता व्यक्त की.
राहुल गांधी ने कहा कि भाषण को चुनिंदा ढंग से हटाया जाना तर्क से परे है और उनके बयान के हिस्सों को हटाया ना जाए. अपने पहले भाषण में राहुल गांधी ने बीजेपी की राजनीति करने के तरीके पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि बीजेपी लोगों के बीच 'धर्म के नाम पर नफ़रत और हिंसा फैलाती है.'अपने भाषण में उन्होंने जो कहा उसके कुछ हिस्से को सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटा दिया गया है.

इस पर गांधी ने स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी लिखी और कहा कि स्पीकर के पास शक्ति होती है कि वो भाषण को सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटा सकते हैं. लेकिन उन्हीं शब्दों या बयानों को हटाया जा सकता है जिसका ज़िक्र लोकसभा की प्रक्रिया और कार्य संचालन नियम 380 में है.उन्होंने लिखा-मैं यह देखकर हैरान हूं कि किस तरह मेरे भाषण के काफी हिस्से को कार्यवाही से निकाल दिया गया. जो अंश हटाया गया है वो नियम 380 के दायरे में नहीं आते हैं. मैं सदन में जो बताना चाहता था,वह ज़मीनी हक़ीक़त और तथ्यात्मक रूप से सही है.
राहुल गांधी ने लोकसभा स्पीकर को लिखी चिट्ठी
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को चिट्ठी लिखकर सदन में उनके भाषण के कुछ अंशों को हटाए जाने पर चिंता व्यक्त की.
राहुल गांधी ने कहा कि भाषण को चुनिंदा ढंग से हटाया जाना तर्क से परे है और उनके बयान के हिस्सों को हटाया ना जाए. अपने पहले भाषण में राहुल गांधी ने बीजेपी की राजनीति करने के तरीके पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि बीजेपी लोगों के बीच 'धर्म के नाम पर नफ़रत और हिंसा फैलाती है.'अपने भाषण में उन्होंने जो कहा उसके कुछ हिस्से को सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटा दिया गया है.
इस पर गांधी ने स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी लिखी और कहा कि स्पीकर के पास शक्ति होती है कि वो भाषण को सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटा सकते हैं. लेकिन उन्हीं शब्दों या बयानों को हटाया जा सकता है जिसका ज़िक्र लोकसभा की प्रक्रिया और कार्य संचालन नियम 380 में है.उन्होंने लिखा-मैं यह देखकर हैरान हूं कि किस तरह मेरे भाषण के काफी हिस्से को कार्यवाही से निकाल दिया गया. जो अंश हटाया गया है वो नियम 380 के दायरे में नहीं आते हैं. मैं सदन में जो बताना चाहता था,वह ज़मीनी हक़ीक़त और तथ्यात्मक रूप से सही है.