सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की दलील: कोरोना महामारी में टीकाकरण ने लाखों जानें बचाईं.
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की दलील: कोरोना महामारी में टीकाकरण ने लाखों जानें बचाईं
कोरोना महामारी और टीकाकरण के प्रभावों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट किया कि महामारी अभूतपूर्व आपदा थी, और टीकाकरण अभियान ने लाखों लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।यह याचिका दो लड़कियों के परिजनों ने दायर की है।आरोप है कि कोविशील्ड वैक्सीन की पहली डोज के बाद गंभीर प्रतिकूल प्रभाव (AEFI) के चलते दोनों की मृत्यु हो गई।

याचिकाकर्ताओं की मांग:
वैक्सीन के प्रतिकूल प्रभावों और उनके उपचार की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
वैक्सीन से जुड़े दुष्प्रभावों पर सरकार की स्पष्ट नीति हो।
केंद्र सरकार की दलील
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि कोरोना महामारी ने अभूतपूर्व संकट खड़ा किया, और टीकाकरण ने करोड़ों लोगों की जान बचाई। भारत में मजबूत नियामक तंत्र और व्यापक शोध के बाद वैक्सीन को मंजूरी दी गई। एएसजी ने कहा कि महामारी के दौरान सरकार को टीकाकरण और संभावित जोखिमों के बीच संतुलन बनाना पड़ा।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि कोविशील्ड वैक्सीन के खतरनाक प्रभावों को लेकर 2021 में यूरोपीय देशों ने इस पर रोक लगाई थी।सरकार ने टीके से जुड़े नुकसान और उपचार के उपायों का सही ढंग से खुलासा नहीं किया।दोनों याचिकाकर्ताओं ने अपनी बेटियों को टीकाकरण के बाद खो दिया, और उन्हें न्याय चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि केंद्र सरकार को चार हफ्ते के भीतर याचिकाकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके आवेदन पर जवाब दाखिल करना होगा।कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता अपना आवेदन तीन दिन के भीतर केंद्र के वकील को दें। मामले की अगली सुनवाई जवाब दाखिल होने के बाद होगी।
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की दलील: कोरोना महामारी में टीकाकरण ने लाखों जानें बचाईं
कोरोना महामारी और टीकाकरण के प्रभावों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट किया कि महामारी अभूतपूर्व आपदा थी, और टीकाकरण अभियान ने लाखों लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।यह याचिका दो लड़कियों के परिजनों ने दायर की है।आरोप है कि कोविशील्ड वैक्सीन की पहली डोज के बाद गंभीर प्रतिकूल प्रभाव (AEFI) के चलते दोनों की मृत्यु हो गई।
याचिकाकर्ताओं की मांग:
वैक्सीन के प्रतिकूल प्रभावों और उनके उपचार की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
वैक्सीन से जुड़े दुष्प्रभावों पर सरकार की स्पष्ट नीति हो।
केंद्र सरकार की दलील
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि कोरोना महामारी ने अभूतपूर्व संकट खड़ा किया, और टीकाकरण ने करोड़ों लोगों की जान बचाई। भारत में मजबूत नियामक तंत्र और व्यापक शोध के बाद वैक्सीन को मंजूरी दी गई। एएसजी ने कहा कि महामारी के दौरान सरकार को टीकाकरण और संभावित जोखिमों के बीच संतुलन बनाना पड़ा।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि कोविशील्ड वैक्सीन के खतरनाक प्रभावों को लेकर 2021 में यूरोपीय देशों ने इस पर रोक लगाई थी।सरकार ने टीके से जुड़े नुकसान और उपचार के उपायों का सही ढंग से खुलासा नहीं किया।दोनों याचिकाकर्ताओं ने अपनी बेटियों को टीकाकरण के बाद खो दिया, और उन्हें न्याय चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि केंद्र सरकार को चार हफ्ते के भीतर याचिकाकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके आवेदन पर जवाब दाखिल करना होगा।कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता अपना आवेदन तीन दिन के भीतर केंद्र के वकील को दें। मामले की अगली सुनवाई जवाब दाखिल होने के बाद होगी।