बिहार चुनाव के बाद भाजपा का बड़ा एक्शन, पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह को सहित तीन नेता पार्टी से निलंबित.
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद भाजपा ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल नेताओं पर एक्शन शुरू कर दिया है। पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह समेत तीन नेताओं को पार्टी निलंबित कर दिया है। आरके सिंह के साथ कटिहार की मेयर ऊषा अग्रवाल और एमएलसी अशोक अग्रवाल के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
भाजपा ने आधिकारिक आदेश में कहा है कि आपकी गतिविधियां पार्टी के विरोध में हैं। ये अनुशासन के दायरे में आता है। पार्टी ने इसे गंभीरता से लिया है। इससे पार्टी को नुकसान हुआ है। आखिरकार निर्देशानुसार आपको पार्टी से निलंबित करते हुए कारण-पृच्छा किया जा रहा है कि आपको पार्टी से क्यों नहीं निष्कासित किया जाए? अतः पत्र प्राप्ति के एक सप्ताह के अंदर आप अपनी स्थिति स्पष्ट करें।'
उल्लेखनीय है कि बिहार विधानसभा चुनाव के बीच आरके सिंह ने बगावती तेवर दिखाए। वे कई मौकों पर भाजपा के नेताओं के विरोध में खड़े हुए और कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। आरके सिंह ने एनडीए के ताकतवर नेताओं के खिलाफ जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर के आरोपों का भी खुलकर समर्थन किया था। सितंबर में सभा के दौरान आरके सिंह ने एक बयान में कहा था कि मैं बिहार का गृह सचिव भी रह चुका हूं। मेरे पास सबका हिसाब है। अगर कोई चू-चपड़ करेगा, तो सबकी बखिया उधेड़ देंगे। बिहार के लोग भ्रष्ट लोगों को बर्दाश्त नहीं करेंगे। भ्रष्ट और चरित्रहीन नेता धरती पर बोझ हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह बिहार सरकार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ भी मुखर रहे। उन्होंने खासकर बिहार में शराबबंदी खत्म करने की वकालत की।
आरके सिंह के निलंबन के साथ ही, बिहार बीजेपी ने एमएलसी अशोक कुमार अग्रवाल और उनकी पत्नी, कटिहार की मेयर उषा अग्रवाल को भी पार्टी विरोधी गतिविधियों का हवाला देते हुए निलंबित कर दिया। अशोक अग्रवाल ने अपने बेटे सौरव अग्रवाल को कटिहार से वीआईपी उम्मीदवार के रूप में विवादास्पद रूप से मैदान में उतारा, जिसे पार्टी के निर्देशों के विपरीत माना जा रहा है। दोनों को एक सप्ताह के भीतर अपना जवाब देने को कहा गया है, जो चुनाव के बाद अनुशासन और आंतरिक सामंजस्य के प्रति बीजेपी के सख्त रुख को दर्शाता है।