आखिर कैबिनेट की बैठक में क्यों नहीं पहुंचे मंत्री विजय शाह, क्या भाजपा अंदर ही अंदर बना रही है दूरी.
इंदौर। इंदौर के राजवाड़ा में आज हुई कैबिनेट की बैठक में सबकी नजरें कर्नल सोफिया कुरैशी को आतंकवादियों की बहन बताने वाले मंत्री विजय शाह को तलाश रही थीं, लेकिन वे नहीं पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट से फटकार के बाद शायद भाजपा का मन बदल रहा हो। पहले हाईकोर्ट के आदेश पर एफआईआर हुई, अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एसआईटी भी गठित हो गई है।
उल्लेखनीय है कि मंत्री विजय शाह ने महू में आयोजित एक कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कर्नल सोफिया कुरैशी को आतंकवादियों की बहन बताया था। इसका वीडियो भी वायरल हुआ और जब हंगामा मचा तो प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने सिर्फ समझाइश देकर छोड़ दिया था। पूरे देश में भाजपा की किरकिरी होने के बाद भी न तो भाजपा के किसी नेता की तरफ से विजय शाह के बयान का खंडन आया और न ही कोई चेतावनी भरा संदेश मिला।
प्रदेश अध्यक्ष ने व्यक्तिगत कारण बताया
विजय शाह के कैबिनेट की बैठक में नहीं आने पर प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा कि हो सकता है कि किसी व्यक्तिगत कारण से वे नहीं आए हों। कई बार मंत्री व्यक्तिगत कारणों से कैबिनेट की बैठकों में शामिल नहीं होते हैं। प्रदेश अध्यक्ष के बयान से साफ जाहिर है कि पार्टी अभी भी विजय शाह के मामले में किसी एक्शन के मूड में नहीं है।
अगर शाह आते तो बिगड़ जाती बैठक
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर कैबिनेट की बैठक में विजय शाह आते तो सबकी निगाहों में वे ही रहते। मीडिया भी उन्हें नहीं छोड़ती और प्रदेश अध्यक्ष से लेकर सीएम तक से शाह को लेकर सवाल हो सकता था। ऐसे में देवी अहिल्या के शहर के राजवाड़ा में बैठक करने का उद्देश्य पूरा नहीं होता। शायद इसीलिए भाजपा ने उनसे कहा हो कि वे बैठक में नहीं आएं।
भाजपा यह सोच रही, कोर्ट ही निपटा दे
विजय शाह के मामले में सुप्रीम कोर्ट भी सख्त होकर बैठा है। कल हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने विजय शाह की माफी को भी घड़ियाली आंसू बता दिया था। कोर्ट ने शाह को फटकार भी लगाई थी कि एक जिम्मेदार व्यक्ति होकर ऐसा बयान कैसे दे दिया। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मध्यप्रदेश सरकार ने एसआईटी गठित कर दी है और हाईकोर्ट के निर्देश पर एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है। ऐसे में शायद भाजपा शायद कोर्ट से ही विजय शाह के सजा होने का इंतजार कर रही है। अगर ऐसा हुआ तो भाजपा पर एक आदिवासी नेता को मंत्रिमंडल और पार्टी से बाहर करने का आरोप भी नहीं लगेगा।