इंदौर की यह नई तिकड़ी…न झुकेगी, न रुकेगी, न डरेगी….
आपको याद होगा जब भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा हुई थी। घोषणा के तुरंत बाद शहर में नए अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के स्वागत में होर्डिंग दिखाई देने लगे थे। इसमें चार चेहरे दिखाई दिए थे। ये चेहरे थे-पूर्व नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे, अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष सावन सोनकर, हिन्द रक्षक संगठन के एकलव्य सिंह गौड़ और देपालपुर के विधायक मनोज पटेल। खैर, मनोज पटेल का शहर से कोई खास वास्ता नहीं रहता, लेकिन रणदिवे, सोनकर और गौड़ की तिकड़ी कई बड़े नेताओं की छाती पर मूंग दल रही है। सावन सोनकर ने भी तय कर लिया है कि वे तुलसी सिलावट की तरह ग्रामीण क्षेत्र के साथ शहर में भी सक्रिय रहेंगे।
जब यह होर्डिंग सामने आए थे, तो अचानक लोगों को समझ नहीं आया। लोगों को लगा कि ऐसे ही होर्डिंग लगा दिया गया होगा। लेकिन, जब शहर के हर कार्यक्रम में यह तिकड़ी एक साथ नजर आने लगी तो राजनीतिक गलियारों में चर्चा गरमाने लगी। इस नए राजनीतिक समीकरण को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे। हाल ही में लोधीपुरा के आनंद मेले में यह तिकड़ी फिर साथ दिखाई दी। इससे पहले भी भाजपा के कई बड़े कार्यक्रमों में यह तिकड़ी साथ ही आई, साथ ही बैठी और साथ ही बाहर निकली।
इस तिकड़ी का बनना एक संयोग नहीं है। इंदौर के बिगड़ते राजनीतिक संतुलन के लिए एक ऐसी टीम की जरूरत भी थी। वर्तमान में हालत यह है कि शहर के किसी भी मुद्दे पर कोई बोलने वाला नहीं। एक गुट सत्ता में आने के बाद फिर से हावी हो गया और शहर से लेकर संगठन तक के फैसलों में अपनी टांग अड़ाने लगा। पहले पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन के कारण कुछ मुद्दे एक गुट विशेष के खिलाफ उठ भी जाते थे, लेकिन अब कोई बोलने वाला नहीं। सांसद और महापौर को अपने से ही फुर्सत नहीं, इसलिए यह तिकड़ी शहर हित में जरूरी थी।
शुरू-शुरू में इस तिकड़ी को लोगों ने हल्के से लिया, लेकिन अब बड़े नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं तक में यह चर्चा का विषय है। उनके चेहरे भी बिगड़े दिख रहे हैं, जो खुद को इंदौर भाजपा का सर्वेसर्वा समझते हैं। अब इस तिकड़ी ने यह साफ संदेश दे दिया है कि वे न तो झुकने वाले हैं, न रुकने वाले हैं और न डरने वाले हैं।