गंदे पानी मामले में विजेता नेताओं का जनता करे नागरिक अभिनंदन.
देश के सबसे साफ शहर इंदौर में गंदे पानी से 15 मौतों के बाद अफसरों पर कार्रवाई हो चुकी है। इंदौर के सारे जनप्रतिनिधि इसी की मांग कर रहे थे। सीएम डॉ.मोहन यादव ने जनप्रतिनिधियों की पुकार सुनी और एक्शन लिया। अब नगरीय प्रशासन मंत्री, महापौर, नगर निगम के जलकार्य प्रभारी, इंदौर के सारे विधायक और पार्षद खुद को विजेता महसूस कर रहे हैं।
ये वही नेता हैं जो आपके दरवाजे पर आ-आ कर वोट मांग रहे थे। ये वही चेहरे हैं, जिन्हें आपने अपना तारणहार मानकर जिताया। लेकिन, इस पूरे घटनाक्रम में बेचारे इन नेताओं की कोई गलती नहीं। ये तो पार्षद, विधायक और महापौर हैं, ये भला क्या कर सकते। सारा काम तो अफसर करते हैं।
इसीलिए जब भागीरथपुरा में पाइपलाइन बदलने की फाइल अफसर दबा बैठे, तो ये आपके चुने हुए नेता कुछ कर नहीं पाए। जब गंदा पानी सप्लाई होता रहा तो ये बेचारे बोल नहीं पाए। जब मौतें होने लगीं, तो भी ये मुंह पर ताला मारकर बैठे रहे।
और तो और इस पूरे घटनाक्रम के बाद जब सीएम इंदौर आए और मीटिंग ली तब भी ये आपके चुने हुए चुनावी वीर मुंह में दही जमाकर बैठे रहे। खास बात यह कि इस मामले में अब भी कुछ नेता मुंह बंदकर ही बैठे हैं।
इसका सिर्फ एक ही कारण है-अफसर नहीं सुनते। इसीलिए कुछ नेता मुखर होकर और कुछ नेता पर्दे के पीछे से अफसरों को हटवाने में जुटे रहे। अब सीएम भी क्या करें, उनसे आपके द्वारा चुने हुए जनप्रतिनिधियों की मजबूरी नहीं देखी गई और उन्होंने इस मामले के दोषी अफसरों को तुरंत सजा दे दी।
अब आप भी नेताओं के साथ अफसरों के विरोध में खड़े हो जाओ, क्योंकि सारा दोष तो इन्हीं का है। आप अपने नेताओं के सुर में सुर मिलाते हुए एक अफसर विरोधी रैली भी निकाल सकते हो।
सच कहता हूं। इस पूरे मामले में अफसरों पर जीत दर्ज करने वाले महापौर, मंत्री, विधायकों और पार्षदों का नागरिक अभिनंदन करना चाहिए।
ये इसके हकदार हैं। इसलिए तैयारी शुरू कर दो। मकर संक्रांति पर ही सम्मान कर दो तो ज्यादा अच्छा रहेगा, क्योंकि 26 जनवरी अभी दूर है।
अगर आपने ऐसा नहीं किया तो यह साबित हो जाएगा कि आप अपने नेता के प्रति वफादार नहीं हैं।