कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने मोहन भागवत के सामने की आरएसएस की भगवान शिव से तुलना, कहा-शिव की तरह विष पीकर राष्ट्र की रक्षा करता है संघ.
भोपाल। कथावाचक पं.प्रदीप मिश्रा ने आरएसएस की तुलना भगवान शिव से की है। भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति में पं.मिश्रा ने कहा कि शिव भी विष पीते हैं और राष्ट्र की रक्षा करते हैं। संघ भी विष पीकर राष्ट्र की रक्षा करने में लगा हुआ है।
पं.प्रदीप मिश्रा ने कहा कि सभी समाज अपने-अपने स्तर पर कार्य कर रहे हैं, लेकिन यह प्रश्न भी आवश्यक है कि हमने राष्ट्र के लिए क्या किया और राष्ट्र को क्या दिया। उन्होंने कहा कि संघ और शिव के भाव में अद्भुत समानता है। जैसे शिव ने समस्त सृष्टि के लिए विष पिया, वैसे ही संघ प्रतिदिन आरोपों का विष पीकर भी संयम और राष्ट्रहित में कार्य करता है। प्रदीप मिश्रा ने कहा कि जन्म चाहे किसी भी जाति में हुआ हो, पहचान अंततः हिंदू, सनातनी और भारतीय की ही है। प्रत्येक भारतीय में राष्ट्रोत्थान और समाजोत्थान की अद्भुत क्षमता है। धर्मांतरण को उन्होंने केवल वर्तमान पीढ़ी ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रभावित करने वाला गंभीर षड्यंत्र बताया और इसके प्रति समाज को सजग रहने का आह्वान किया।
संघ प्रमुख ने कहा- सामाजिक सद्भाव नई अवधारणा नहीं
सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि सामाजिक सद्भाव कोई नई अवधारणा नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज का स्वभाव रहा है। समाज में सज्जन शक्ति का जागरण, आचरण में पंच परिवर्तन और निरंतर सद्भावना संवाद आज की अनिवार्य आवश्यकता है। भागवत ने कहा कि समाज शब्द का अर्थ ही समान गंतव्य की ओर बढ़ने वाला समूह है। भारतीय समाज की कल्पना सदैव ऐसी रही है। जिसमें जीवन भौतिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से सुखी हो। हमारे ऋषि-मुनियों ने यह समझा कि अस्तित्व एक है, केवल देखने की दृष्टि अलग-अलग है। उनकी तपस्या और साधना से ही राष्ट्र का निर्माण हुआ और वही हमारी सांस्कृतिक नींव है। संघ प्रमुख भागवत ने कहा कि कानून समाज को नियंत्रित कर सकता है, लेकिन समाज को चलाने और जोड़कर रखने का कार्य सद्भावना ही करती है। विविधता के बावजूद एकता ही हमारी पहचान है। बाहरी रूप से हम अलग दिख सकते हैं, लेकिन राष्ट्र, धर्म और संस्कृति के स्तर पर हम सभी एक हैं। इसी विविधता में एकता को स्वीकार करने वाला समाज हिंदू समाज है।