कर्नल सोफिया कुरैशी को आतंकवादियों की बहन बताने वाले मंत्री 26 जनवरी को फहराएंगे तिरंगा, विजय शाह के आगे आखिर क्यों नतमस्तक है संगठन और सरकार.
भोपाल। पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर में महत्वपूर्ण भूमिका निभानेवाली कर्नल सोफिया कुरैशी को आतंकवादियों की बहन बताने वाले मंत्री विजय शाह 26 जनवरी पर तिरंगा फहराएंगे। सेना का अपमान करने के बाद भी वे परेड की सलामी लेंगे, जबकि इस संबंध में हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सख्त है। इसके बाद भी आखिर सरकार की क्या मजबूरी है कि शाह पर एक्शन लेना तो दूर, उनसे झंडावंदन करा रही है।
उल्लेखनीय है कि खंडवा में 26 जनवरी को होने वाले जिला स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में पहले जिले के प्रभारी मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी मुख्य अतिथि थे। अब जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह मुख्य अतिथि बना दिए गए हैं। इससे पहले मंत्री शाह के पास रतलाम जिले का कार्यक्रम था। इस हिसाब से भारतीय सेना का अपमान करने वाले विजय शाह झंडावंदन भी करेंगे और परेड की सलामी भी लेंगे। सरकार के इस फैसले पर जहां कांग्रेस हमलावर है, वहीं जनता भी सवाल उठा रही है।
हाईकोर्ट ने तो दिए थे एफआईआर के निर्देश
विजय शाह के विवादित बयान पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया था मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। विजय शाह राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने जांच पर रोक से मना किया, लेकिन इसका जिम्मा 3 आईपीएस अधिकारियों की एसआईटी को सौंप दिया। कोर्ट के आदेश पर आईपीएस प्रमोद वर्मा, कल्याण चक्रवर्ती और वाहिनी सिंह की 3 सदस्यीय एसआईटी का गठन हुआ था। कोर्ट ने एसआईटी को 13 अगस्त तक जांच पूरी करने को कहा था।
एसआईटी को केस की अनुमति नहीं दे रही सरकार
इस मामले में 19 जनवरी को हुई सुनवाई में एसआईटी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने 19 अगस्त को सरकार से मुकदमे की अनुमति मांगी थी। बीएनएस की धारा 196 (सांप्रदायिक या दूसरे आधारों पर समाज मे वैमनस्य फैलाना) के मामलों में यह अनुमति आवश्यक है, लेकिन अभी तक उसे सरकार से कोई सूचना नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर मध्यप्रदेश सरकार पर नाराजगी जाहिर करते हुए दो सप्ताह में शाह के खिलाफ केस चलाने की अनुमति देने को कहा है।
सरकार और संगठन की मजबूरी क्या है
विवाद बढ़ने और हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से लगातार फटकार मिलने के बाद विजय शाह ने माफी जरूर मांग ली थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद भी विजय शाह के प्रति सरकार और संगठन इतना ठंडा क्यों है, यह बात किसी के समझ नहीं आ रही। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि ने सरकार ने उन पर कोई एक्शन लिया और न ही संगठन उन पर कोई कार्रवाई कर रहा है। और तो और इतने विवादित मंत्री को गणतत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि भी बनाया जा रहा है।
कांग्रेस कर रही है जोरदार विरोध
कांग्रेस इस मामले पर सरकार पर जमकर निशाना साध रही है। विजय शाह के खिलाफ प्रदर्शन भी हो रहे हैं और बयानबाजी का सिलसिला भी जारी है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने इस फैसले को संविधान बनाने वालों का अपमान बताया है। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने अभियोजन की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं, उसे गणतंत्र दिवस जैसे पावन अवसर पर ध्वज फहराने का 'पारितोषिक' देना बेहद आपत्तिजनक है। इधर, कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस व्यक्ति पर देश की शीर्ष अदालत ने दो सप्ताह के भीतर अभियोजन की स्वीकृति पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है, क्या वह राष्ट्रीय पर्व पर मुख्य अतिथि बनने का अधिकार रखता है?
बयान का वीडियो हुआ था वायरल
11 मई को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित हलमा कार्यक्रम को मंत्री विजय शाह संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा था- उन्होंने कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा। शाह ने आगे कहा- अब मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते। इसलिए उनकी समाज की बहन को भेजा कि तुमने हमारी बहनों को विधवा किया है, तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी। देश का मान-सम्मान और हमारी बहनों के सुहाग का बदला तुम्हारी जाति, समाज की बहनों को पाकिस्तान भेजकर ले सकते हैं।