इंदौर के रिटायर्ड आबकारी अधिकारी के लॉकर ने भी उगला सोना, 25 करोड़ के आसामी निकले भदौरिया.
इंदौर। आबकारी विभाग के रिटार्यड अधिकारी धर्मेन्द्र भदौरिया के यहां लोकायुक्त के छापे के बाद संपत्ति का आंकलन अभी जारी है। लोकायुक्त ने करीब 18 करोड़ की चल-अचल संपत्ति जब्त की थी। इसके बाद लॉकर की बारी थी। भदौरिया के लॉकर ने भी खूब सोना उगला। इसके बाद अब भदौरिया की संपत्ति अब करीब 25 करोड़ पहुंच गई है।
लोकायुक्त एसपी राजेश सहाय ने बताया कि 15 अक्टूबर को छापे के बाद विवेचना जारी है। आज विवेचना के अनुक्रम में बैंक लॉकर खुलवाने की कार्यवाही की गई। बैंक ऑफ बड़ौदा का सूर्यांश भदौरिया और उनकी माताजी सीमा भदौरिया का लॉकर खुलवाकर गहने जब्त किए गए। कुल 886 ग्राम वजनी सोने के गहने मिले जिनकी कीमत 79,23,698 रुपए आंकी गई। लॉकर सूर्यांश भदौरिया की उपस्थिति में खुलवाया गया। शेष लॉकर फ्रीज है जो आरोपी की उपस्थिति में खोले जाएंगे।
जांच में प्रिंसेस स्काई पार्क के सातवें प्लोर पर जे सी वेंचर्स में भी 27.50 लाख रुपए इन्वेस्ट करने के दस्तावेज पाए गए हैं। ग्वालियर में आवास की सामग्री 22,78,400 रुपए पाई है। इसके साथ ही एचडीएफसी की पलासिया शाखा में आरोपी और परिवार के नाम खातों में 5,32,000 रुपए जमा होना पाए हैं। आज की जब्ती सहित 24,97,26,859 यानी लगभग 25 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति प्रकरण में अब तक मिल चुकी है।
बैंक खातों में ही सवा करोड़ से अधिक जमा
गुरुवार को बैंक खातों की जानकारी ली गई थी। उसके और परिवार के खातों में कुल 1 करोड़ 26 लाख 31 हजार रुपए जमा हैं।वहीं बीमा और अन्य पॉलिसी भी कुल 21 के लगभग पाई हैं जिनमें 13 लाख 90 हजार 648 रुपए किस्त भरी जाना पाई गई है। पत्नी के नाम बैंक ऑफ बड़ौदा में लॉकर पाया है। सूर्यांश भदौरिया द्वारा विशाल पंवार के शिवा चाइनीज वॉक में भी पार्टनरशिप मिली है।
महंगी गाड़ियों का जखीरा मिला
धर्मेंद्र सिंह भदौरिया महंगी गाड़ियों का भी शौक रखता है। उसके यहां से अधिकारियों को एक वॉल्वो, एक फॉच्यूर्नर, दो इनोवा सहित चार लग्जरी बाइक मिल चुकी हैं। बताया जा रहा है की अधिकारियों को उसके फ्लैट से दो महंगी सुपर बाइक मिली है जिनके मॉडिफाइड कराया गया है। वहीं भदौरिया ने अपनी अधिकांश गाड़ियों का नंबर 0045 लिखा हुआ है।
नौकरी करने के दौरान ही बन गया था ठेकेदार
बताया जाता है कि धर्मेंद्र सिंह भदौरिया ने आलीराजपुर का ठेका लेने वाले रिंकू भाटिया से भी पेटी कांट्रेक्ट के जरिए हिस्सेदारी की थी। भदौरिया ने देखते ही देखते जिले का पूरा शराब का धंधा ही पर्दे के पीछे से कब्जे में ले लिया था। इतना ही नहीं सरकारी नौकरी के साथ ही भदौरिया अवैध शराब के कारोबारियों के साथ सांठगांठ कर धंधा करता था।