डेली कॉलेज की प्रिंसिपल गुनमीत बिंद्रा का डीपीएस राजपुरा पर ज्यादा ध्यान, इसलिए यहां के स्टूडेंट हो रहे परेशान.
इंदौर। डेली कॉलेज का कबाड़ा सिर्फ डीसी बोर्ड ही नहीं कर रहा, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता बिगाड़ने में यहां की प्रिसिंपल डॉ. (सुश्री) गुनमीत बिंद्रा का का भी कम योगदान नहीं है। डॉ.बिंद्रा दिल्ली पब्लिक स्कूल, राजपुरा की ट्र्स्टी भी हैं। जब से वे डेली कॉलेज आई हैं, तब से डीपीएस राजपुरा में डेली कॉलेज के कई प्रोग्राम लागू किए जा रहे हैं। यहां तक कि गेस्ट भी दोनों जगह एक ही आने लगे।
डीपीएस राजपुरा की वेबसाइट से मिली जानकारी के अनुसार डॉ.बिंद्रा वहां की संस्थापक ट्रस्टी हैं। वे दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और कलकत्ता विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा हैं तथा भारत में लड़कों के बोर्डिंग स्कूल का नेतृत्व करने वाली पहली महिला हैं। उन्होंने सीबीएसई गवर्निंग बॉडी की सदस्य और सीबीएसई संबद्धता समिति सहित कई प्रतिष्ठित पदों पर कार्य किया है। वेबसाइट की जानकारी के अनुसार वे वर्तमान में आईबीएससी-एशिया प्रशांत क्षेत्र की उपाध्यक्ष हैं।
डेली कॉलेज के कई कार्यक्रम डीपीएस में
पैरेंट्स और ओल्ड डेलियंस का कहना है कि जब से डॉ.बिंद्रा डेली कॉलेज की प्रिंसिपल बनी हैं, यहां के कई कार्यक्रम डीपीएस राजपुरा में लागू हो रहे हैं। पैरेंट्स ने इसका उदाहरण भी बताया है। जैसे डेली कॉलेज में लायन किंग शो हुआ, जो डीपीएस राजपुरा में भी हुआ। तारे जमीन के एक्टर दर्शील सफारी और जय सेन दोनों जगह चीफ गेस्ट थे। कई कार्यक्रम ऐसे हुए, जिसमें जो विदेशी मेहमान डेली कॉलेज में आए, वही डीपीएस राजपुरा में भी गए। इसी तरह के कई कार्यक्रम दोनों स्कूलों में हुए हैं।
डीपीएस राजपुरा से अभी भी है नाता
डॉ.बिंद्रा अभी भी डीपीएस राजपुरा की न केवल संस्थापक ट्र्स्टी हैं, बल्कि प्रो-वाइस चेयरपर्सन भी हैं। वे डीपीएस राजपुरा में होने वाले कार्यक्रम में अभी भी हिस्सा लेने जाती हैं, जिसकी खबरें पंजाब और चंडीगढ़ के कई अखबारों मे प्रकाशित भी हुई हैं। उसमें डॉ.बिंद्रा का नाम और फोटो भी छपा है। डीपीएस, राजपुरा की वेबसाइट पर भी यह जानकारियां उपलब्ध हैं।
दो-दो संस्थानों को कैसे दे दी जिम्मेदारी
पैरेंट्स यह सवाल उठा रहे हैं कि एक ही व्यक्ति को दो-दो संस्थानों की जिम्मेदारी कैसे दी जा सकती है? जब वे डीपीएस राजपुरा की संस्थापक ट्रस्टी हैं, तो जाहिर है कि उनका वहां से ज्यादा लगाव होगा। ओल्ड डेलियंस का भी कहना है कि इसी कारण उनका डेली कॉलेज पर विशेष ध्यान नहीं है।
संस्थान की साख का हो रहा बंटाधार
डीसी बोर्ड के मनमाने फैसले के कारण संस्थान का बंटाधार हो रहा है। कहा तो यह भी जा रहा है कि डॉ.बिंद्रा की कोई रुचि नहीं होने के कारण वे पैरेंट्स की शिकायतों पर भी ध्यान नहीं देतीं। इतना ही नहीं वे डीसी बोर्ड के फैसलों पर भी कोई आपत्ति नहीं उठातीं। अगर वे एक प्रिंसिपल के नजरिए से संस्थान का हित देखती तो निश्चित तौर पर डीसी बोर्ड मनमाने फैसले नहीं ले पाता।