देवी अहिल्या संस्था : कलेक्टर की चेतावनी के बाद भी न तो सूची बनी और न ही अपात्र सदस्यों की रजिस्ट्री निरस्त कराने की शुरू हुई कार्रवाई.
इंदौर। देवी अहिल्या श्रमिक कामगार सहकारी संस्था के संचालकों को न तो सहकारिता विभाग की परवाह है और न ही कलेक्टर की। कलेक्टर ने पिछली बैठक में संस्था के संचालकों को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि अपात्र सदस्यों की रजिस्ट्री के खिलाफ सिविल सूट फाइल करें। इसके बाद भी आज तक एक भी केस दर्ज नहीं हुआ। इसके साथ ही कलेक्टर ने अयोध्यापुरी और महालक्ष्मी नगर की वरीयता सूची देने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक सूची भी नहीं सौंपी गई।
उल्लेखनीय है कि 17 जुलाई को कलेक्टर ने देवी अहिल्या संस्था के संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जो भी अपात्र रजिस्ट्री है, उसके खिलाफ सिविल सूट दाखिल की जाए। बैठक में उपाध्यक्ष मनोज काला ने कहा था कि हम इसमें कुछ नहीं कर सकते। हमारे वकील ने मना किया है। तब अपर कलेक्टर गौरव बैनल ने कहा था कि ऐसे वकील को ही हटा देना चाहिए। इसके बाद संचालक मंडल में मौजूद वकील डीजी मिश्रा से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ऐसी रजिस्ट्रियां निरस्त हो सकती हैं। इसके बाद अपर कलेक्टर ने ऐसा सारी रजिस्ट्रियां निरस्त करने के निर्देश दिए।
24 जुलाई तक देनी थी सूची
पिछली बैठक में संचालक मंडल ने बताया था कि अयोध्यापुरी की सूची तैयार है, लेकिन महालक्ष्मी नगर की अभी तैयार नहीं हुई। तब कलेक्टर ने कहा था कि 24 जुलाई तक दोनों कॉलोनियों की वरीयता सूची फाइनल कर दी जाए, लेकिन अभी तक सूची नहीं सौंपी गई है।
अपना फर्जी प्लॉट बचाना चाहते हैं अजमेरा और काला
संस्था के अध्यक्ष विमल अजमेरा के अयोध्यापुरी में छह प्लॉट हैं, जो उन्होंने फर्जी तरीके से पत्नी, बेटा और बहू के नाम पर ले रखे हैं। इसके खिलाफ पुलिस में भी शिकायत हुई है। यही हाल मनोज काला का भी है। दोनों अपना फर्जी प्लॉट बचाने के लिए न तो सूची फाइनल करना चाहते हैं और न ही अपात्र रजिस्ट्रियों को निरस्त कराने की कोशिश कर रहे। संस्था के लोग ही कह रहे हैं कि अजेमरा किसी भी तरह संचालक मंडल का कार्यकाल पूरा करना चाह रहे हैं ताकि बाद में रिसीवर मामले को निपटाता रहे। इसीलिए वे टाइम पास कर रहे हैं।
पिछले साल ही भेज दी थी सूची
उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के आदेश पर कलेक्टर द्वारा गठित समिति ने विमल अजमेरा को पात्र सदस्यों की सूची पिछले साल ही भेज दी थी। अजमेरा और उनके संचालक मंडल को इसे वेरिफाई कर विभाग में भेजना था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसके बाद सहकारिता विभाग ने उन्हें नोटिस भेजा, लेकिन अजमेरा अपने खास लोगों के प्लॉट की रजिस्ट्री कराने की सिफारिश करते रहे। इसके बाद कलेक्टर आशीष सिंह ने 22 जून को एक बैठक बुलाकर अजमेरा को जमकर फटकार लगाते हुए 15 दिन में सूची वेरिफाई कर नहीं भेजने पर एफआईआर की चेतावनी दी थी।