वॉइस ऑफ डीसी में फिर गूंजी डेली कॉलेज की आवाज, पुराने स्टूडेंट्स ने कहा-हम सिर्फ स्कूल की आत्मा के लिए लड़ रहे.
इंदौर। मध्यप्रदेश के प्रतिष्ठित डेली कॉलेज पिछले लंबे समय से चर्चा में है। चर्चा इसको चलाने वाले डीसी बोर्ड को लेकर है, जो चुनाव नहीं कराना चाहती है। बिना एजीएम बुलाए मनमाने फैसले लेती है और संविधान में संशोधन कर इस संस्था पर कब्जा करना चाहती है। इस्टाग्राम पर वॉइस ऑफ के माध्यम से ओल्ड स्टूडेंट, पैरेंट्स और सदस्य लगातार सवाल उठा रहे हैं। इसी ग्रुप पर डीसी बोर्ड के सदस्य धीरज लुल्ला और मोनू भाटिया को लोग निशाना बना चुके हैं। इससे पहले एक पोस्ट में डेली कॉलेज को अपने अस्तित्व के लिए गुहार लगाते बताया गया था। अब एक नया पोस्ट सामने आया है।
वॉइस ऑफ डीसी में आखिर क्या है संदेश-
नहीं, यह चुनावों के बारे में नहीं है।
यह अस्तित्व की लड़ाई है।
हमारा स्कूल -जो कभी स्वतंत्र, गर्वित और प्रगति करने वाला था- उसे भीतर से हाइजैक किया जा रहा है।
बोर्ड संविधान में बदलाव कर रहा है ताकि वह खुद को स्थायी शक्ति दे सके।
12/11/25 की बैठक कोई सामान्य बैठक नहीं है -यह ताबूत में आखिरी कील है।
हम, वॉइस ऑफ डीसी के माध्यम से बोलने वाले पूर्व छात्र, वादा करते हैं-हममें से कोई भी किसी भी चुनाव में खड़ा नहीं हो रहा।
हम सिर्फ अपने स्कूल की आत्मा के लिए लड़ रहे हैं।
संविधान बदलने की कोशिश का जबरदस्त विरोध
डेली कॉलेज का संचालन करने वाले वर्तमान डीसी बोर्ड में धीरज लुल्ला और मोनू भाटिया जैसे सदस्य संस्थान का संविधान बदलने की कोशिश में लगे हैं ताकि चुनाव ही नहीं कराना पड़े। इसके लिए शासन-प्रशासन तक जोर लगाया जा रहा है। रिश्वत तक की पेशकश की गई, जब इससे बात नहीं बनी तो संघ के पदाधिकारियों के माध्यम से दबाव बनाया गया। अब नियमों के विपरित 12 नवंबर को डीसी बोर्ड की बैठक बुलाकर संविधान बदलने की तैयारी है।
वरिष्ठ अधिकारियों से हो चुकी है शिकायत
डेली कॉलेज के पैरेंट्स से लेकर कई सदस्य इस मामले की शिकायत फर्म एंड सोसायटी से लेकर इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा तक से कर चुके हैं। पिछले दिनों एक प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर शिवम वर्मा से मुलाकात कर इस मामले की पूरी जानकारी दी थी। प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से कहा कि डीसी बोर्ड ने 25 अक्टूबर को एक नोटिस जारी कर 12 नवंबर को एक बैठक बुलाई है। इसमें बोर्ड के सिर्फ 9 सदस्य ही उपस्थित रहेंगे। नियम के विपरित यह मीटिंग बुलाकर डीसी बोर्ड संविधान में संशोधन करना चाहता है जिससे कि वह हमेशा सत्ता में रहे।
मनमाने तरीके से बढ़ा लिया था कार्यकाल
डीसी बोर्ड ने 29 सितंबर 25 को एक बैठक कर स्वयं का कार्यकाल चार महीने के लिए बढ़ा लिया। नियमानुसार चुनाव इसी साल दिसंबर में हो जाना चाहिए, लेकिन बोर्ड चुनाव कराना नहीं चाहता। डीसी बोर्ड के सदस्य धीरज लुल्ला के रहते हुए ही डेली कॉलेज के इतिहास में 2020 और 2025 में दो बार कार्यकाल बढ़ा। इस वर्ष जो छह माह के लिए कार्यकाल बढ़ा उसकी कोई जरूरत ही नहीं थी। इसका मतलब साफ है कि आप डीसी बोर्ड पर अपना कब्जा रखना चाहते हैं।