डेली कॉलेज के पैरेंट्स का सवाल-जब डीसी बोर्ड को पता था बिंद्रा का डीपीएस से रिश्ता, तब क्यों दे दी प्रिंसिपल की कुर्सी.
इंदौर। मध्यप्रदेश का प्रतिष्ठित डेली कॉलेज इन दिनों चर्चा में है। चर्चा इसलिए नहीं हो रही है कि डेली कॉलेज ने कोई बड़ा काम कर दिया है या फिर इसके स्टूडेट्स पूरे देश में किसी भी फील्ड में अव्वल आ रहे हैं। चर्चा इसलिए हो रही है कि यहां पढ़ाई का कबाड़ा हो गया है। स्टूडेंट्स कम होते जा रहे हैं और पैरेंट्स की शिकायतों को सुनने वाला कोई नहीं।
उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2022 में डेली कॉलेज के नए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का गठन हुआ था। इसी बोर्ड ने दिल्ली पब्लिक स्कूल, राजपुरा, पंजाब की संस्थापक ट्रस्टी डॉ. गुनमीत बिंद्रा को डेली कॉलेज का प्रिंसिपल बना दिया था। वे आज भी डीपीएस राजपुरा प्रो-वाइस चेयरपर्सन हैं। वे डीपीएस राजपुरा में होने वाले कार्यक्रम में अभी भी हिस्सा लेने जाती हैं और फ्रेंचाइजी होने के कारण उनका पूरा ध्यान वहीं लगा रहता है। यही वजह है कि इंदौर के डेली कॉलेज में जहां पढ़ाई का स्तर काफी गिर गया है, वहीं प्रशासनिक रूप से पकड़ भी ढीली पड़ गई है।
डीसी बोर्ड के सदस्यों ने पैरेंट्स को दिया धोखा
डीसी बोर्ड के एक सबसे ज्यादा विवादित सदस्य का कहना है कि उन्हें यह जानकारी थी कि डॉ.बिन्द्रा के पास डीपीएस, राजपुरा की फ्रेंचाइजी है। अब यहां सवाल यह उठता है कि यह जानकारी होने के बाद भी आपने उनकी नियुक्ति प्रिंसिपल के रूप में कैसे कर दी? इसका मतलब साफ है कि आप जानबूझकर डेली कॉलेज की प्रतिष्ठा को धूमिल करना चाहते थे। यह भी स्पष्ट है कि आपने डॉ.बिन्द्रा की नियुक्ति इसलिए की ताकि वे आपके मनमाने फैसलों में टांग न अड़ा सकें। अब पैरेंट्स का कहना है कि आपने डॉ.बिन्द्रा की नियुक्ति कर उन्हें धोखा देकर उनके बच्चों के साथ खिलवाड़ किया है।
डेली कॉलेज की गोपनीयता हो रही भंग
डेली कॉलेज का नाम वहां की पढ़ाई, वहां होने वाली गतिविधियों, वहां स्टूडेंट्स के बीच आने वाले गेस्ट आदि को लेकर भी है। इसी कारण डेली कॉलेज एक ब्रांड बन गया था, लेकिन अब तो यहां के सारे प्लान, प्रोग्राम और यहां तक के अतिथि भी चोरी हो रहे हैं। पिछले कई सालों से यहां के सारे कार्यक्रम डीपीएस, राजपुरा में हो रहे हैं। पैरेंट्स का कहना है कि चलो मान भी लेते हैं कि प्रोग्राम में समानता हो भी सकती है, लेकिन गेस्ट एक कैसे हो सकते हैं। इसका मतलब साफ है कि डॉ.बिन्द्रा डेली कॉलेज की गोपनीयता भंग कर रही हैं।
फर्म एंड सोसायटी का सिर्फ अपने लिए इस्तेमाल
ताज्जुब तो यह है कि जब डीसी बोर्ड को खुद के लाभ की जरूरत पड़ती है तो यह रजिस्ट्रार फर्म एंड सोसायटी के पास पहुंच जाती है, लेकिन उसके कोई नियम संस्था के हित में नहीं मानती। एजीएम तो नहीं ही होती है, लेकिन जो मनमाने फैसले होते हैं उसकी जानकारी भी नहीं भेजी जाती है। लेखा-जोखा की तो बात ही कोई नहीं पूछने वाला। 2022 में जो बोर्ड में परिवर्तन हुआ उसके लिए भी रजिस्ट्रा फर्म एंड सोसायटी का सहारा लिया गया था। रजिस्ट्रार फर्म एंड सोसायटी में हुई शिकायत के बाद बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह झाबुआ और उनके बेटे जयसिंह झाबुआ के आने पर रोक लगा दी गई। इसके बाद नए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का गठन हुआ था। यह शिकायत सतबीर सिंह छाबड़ा ने की थी।
प्रिंसिपल से नहीं बनी तो बिन्द्रा को ले आए
उल्लेखनीय है कि डीसी बोर्ड के कई सदस्यों की तत्कालीन प्रिंसिपल नीरज बधौतिया से नहीं बन रही थी। बोर्ड के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह झाबुआ प्राचार्य बधौतिया को हटाने के पक्ष में नहीं थे। वे कड़क स्वभाव के थे और अनुशासन बनाए रखने के लिए कड़े फैसले लेते थे, जिसके कारण डीसी बोर्ड अपने मनमाने फैसले नहीं ले पाता था। इसी कारण उन्हें हटाकर डॉ.बिन्द्रा को लाने का फैसला किया गया था।