सीएम मोहन यादव का ‘खाकी’ को स्पष्ट संदेश…नहीं चलेगी ‘लापरवाही’.
सीएम डॉ.मोहन यादव लगातार पुलिस-प्रशासन को यह स्पष्ट संदेश देते आ रहे हैं कि लापरवाही बिल्कुल ही नहीं चलेगी। जब भी सीएम तक शिकायत पहुंचती है, वह खुद आगे बढ़कर सख्त एक्शन लेते हैं। यही वजह है कि पिछले कुछ महीनों में कई पुलिस अफसरों पर कार्रवाई हुई है।
इसी साल जून में महीने में पूरे पुलिस महकमे में तब हड़कंप मच गया था, जब खुलेआम आपस में हॉट टॉक करने पर चंबल रेंज के आईजी सुशांत सक्सेना, डीआईजी कुमार सौरभ और दतिया एसपी वीरेंद्र मिश्रा को हटा दिया गया था। इसके साथ ही महिला सीएसपी ख्याति मिश्रा के पति व अन्य परिजनों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों के कारण कटनी एसपी अभिजीत रंजन को भी कार्रवाई की गई थी। इतना ही नहीं 10 आईपीएस अधिकारियों के तबादले भी देर रात कर दिए गए थे।
फिर जरा याद कर लीजिए, इसी साल सितंबर में इंदौर के एयरपोर्ट रोड पर एक बड़ा हादसा हुआ था। एक बेकाबू ट्रक ने नो एंट्री में रांग साइड आकर कई लोगों को कुचल दिया था, जिससे तीन लोगों की मौत हो गई थी और 12 लोग घायल हुए थे। इस घटना के अगले दिन ही सीएम इंदौर आए और जिम्मेदारों पर तुरंत एक्शन लिया। सीएम ने यातायात पुलिस उपायुक्त अरविन्द तिवारी, सहायक पुलिस आयुक्त सुरेश सिंह, एएसआई प्रेम सिंह, सूबेदार चन्द्रेश मरावी, निरीक्षक दीपक यादव और ड्यूटी पर तैनात सभी चार कॉन्स्टेबलों को निलंबित कर दिया था।
ताजा घटना मंगलवार रात की है, जब सीएम खुद ही पुलिस मुख्यालय पहुंचे और कई अधिकारियों पर एक्शन लिया। उन्होंने प्रदेश में अपराध की स्थिति को लेकर शीर्ष पुलिस अधिकारियों की बैठक की और कड़ी नाराजगी जाहिर की। सीएम ने रायसेन में हुए अपराध को लेकर सख्ती दिखाते हुए रायसेन एसपी पंकज पांडेय को पुलिस मुख्यालय भोपाल में अटैच कर दिया। इसके साथ-साथ उन्होंने भोपाल के मिसरोद और टीला जमालपुरा प्रभारी को हटाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फिर कहा है कि प्रदेश में जनता और सुशासन की सरकार है, इसलिए अपराध रोकने के लिए पुलिस सड़कों पर उतरे। किसी भी अपराधी को छोड़ा न जाए।
सीएम के बार-बार निर्देश देने के बाद भी जो अफसर सुधरना नहीं चाहते-उनके तो अब सीएम ही मालिक हैं।
इसलिए कुछ भी गलत करने से पहले एक बार सोच लीजिए…