मालेगांव ब्लास्ट मामले में साध्वी प्रज्ञा सहित सभी सातों आरोपी बरी, कोर्ट ने कहा-सिर्फ शक के आधार पर दोषी नहीं ठहरा सकते.
नई दिल्ली। महाराष्ट्र के मालेगांव के बम धमाके के मामले में एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा समेत सभी सातों आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि शक के आधार पर दोषी नहीं ठहरा सकते हैं। वर्ष 2008 में हुए बम धमाके में मुख्य आरोपी भोपाल की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर थीं। उनके साथ-साथ लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित को भी आरोपी बनाया गया था।
कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि जांच में कई तरह की गलतियां थीं। सरकारी पक्ष यह भी साबित नहीं कर पाया कि ब्लास्ट बाइक में हुआ था। जज ने यह भी कहा कि पंचनामा सही तरीके से नहीं हुआ था। मालेगांव ब्लास्ट में एक अहम बात यह भी पता चली है कि बाइक का चेसिस नंबर नहीं मिल पाया था। अदालत ने कहा है कि यह स्पष्ट नहीं हुआ कि बाइक साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की थी या नहीं। जांच एजेंसियों ने जो भी दावे किए हैं, वो अदालत में साबित नहीं हो पाए हैं। कोर्ट ने मालेगांव ब्लास्ट में मारे गए लोगों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए देने का आदेश दिया है, वहीं घायलों को 50-50 हजार रुपए देने के लिए कहा है।
उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव में 29 सितंबर 2008 को बम धमाका हुआ था। इसमें छह लोगों की मौत हो गई थी और सौ से ज्यादा लोग घायल हुए थे। यह धमाका उस वक्त हुआ जब लोग नमाज पढ़ने के लिए जा रहे थे। धमाके के एक दिन बाद 30 सितंबर 2008 को मालेगांव के आजाद नगर थाने में कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। मामले की शुरुआती जांच पुलिस ने की थी, लेकिन इसके बाद पूरी जांच एटीएस को हाथों में चली गई। जांच में पता चला कि एलएमएल फ्रीडम बाइक में बम लगाया था. इसी से धमाका हुआ, लेकिन बाइक पर नंबर गलत लगा हुआ था। जब बाइक की जांच शुरू की गई तो दावा किया गया कि यह साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के नाम पर है। धमाके के करीब एक महीने बाद साध्वी प्रज्ञा समेत 2 और लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में कुल 11 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।