नेपाल में युवाओं का आक्रोश: राजनीतिक संकट, हिंसक प्रदर्शन और नेताओं पर दबाव.
नेपाल में युवाओं का आक्रोश: राजनीतिक संकट, हिंसक प्रदर्शन और नेताओं पर दबाव
नेपाल में जेन-जी युवाओं के उग्र आंदोलन ने राजनीतिक और सामाजिक संकट खड़ा कर दिया है। आक्रोशित भीड़ ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रियों के घरों के साथ-साथ संसद, सुप्रीम कोर्ट और कई सरकारी इमारतों को आग के हवाले कर दिया। हालात बिगड़ने पर भारत ने चिंता जताई और दिल्ली से काठमांडो जाने वाली एयर इंडिया, इंडिगो और नेपाल एयरलाइंस की उड़ानें रद्द कर दी गईं।

भारत ने सीमा पर हाई अलर्ट घोषित किया
नेपाल में जारी अशांति के बीच भारत ने उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, सिक्किम और पश्चिम बंगाल से लगी 1,751 किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया। सशस्त्र सीमा बल ने सभी सीमा चौकियों पर सुरक्षा कड़ी कर दी है और फील्ड कमांडरों को सतर्क निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।
/newsnation/media/media_files/2025/09/08/nepal-gen-z-protest-against-oly-govt-for-social-media-ban-2025-09-08-13-49-17.png)
राजनीतिक उथल-पुथल और नेताओं की सुरक्षा
प्रदर्शनकारियों ने नेपाली कांग्रेस, सीपीएन-यूएमएल और अन्य दलों के कार्यालयों में आगजनी की। सुरक्षाबलों ने नेताओं और उनके परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। धनगढ़ी में प्रदर्शनकारियों ने जेल तोड़कर सैकड़ों कैदियों को छुड़ा लिया। वहीं, काठमांडो की नक्खू जेल से पूर्व उप प्रधानमंत्री रबि लामिछाने समेत 1,500 कैदी भाग निकले। लामिछाने की रिहाई के बाद उन्हें भी प्रधानमंत्री पद का संभावित दावेदार माना जा रहा है।
नए नेताओं का उदय: बालेन शाह और सुदन गुरुंग
काठमांडो के मेयर बालेंद्र शाह (बालेन) युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी जीरो टॉलरेंस नीति और सुधारों ने उन्हें पीएम पद के लिए संभावित चेहरा बना दिया है।
इसके साथ ही, 36 वर्षीय सुदन गुरुंग आंदोलन का नया चेहरा बनकर उभरे हैं। वह "हामी नेपाल" नामक एनजीओ चलाते हैं और सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को लगातार आंदोलन के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की स्थिति
राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने प्रदर्शनकारियों से संयम बरतने और वार्ता में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है, और अब सभी पक्षों के सहयोग से समाधान जरूरी है।
चीन की चुप्पी
चीन ने नेपाल में जारी संकट और ओली के इस्तीफे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। केवल सरकारी एजेंसी शिन्हुआ ने घटनाओं की संक्षिप्त जानकारी दी। यह दूसरी बार है जब किसी दक्षिण एशियाई नेता का चीन दौरे के तुरंत बाद इस्तीफा हुआ है—इससे पहले बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ भी ऐसा हुआ था।
व्यापक हिंसा और आगजनी
चितवन जिले में जिला प्रशासन कार्यालय, चुनाव कार्यालय, जिला न्यायालय, भू-राजस्व और सरकारी वकीलों के कार्यालय को आग के हवाले कर दिया गया। भरतपुर और अन्य क्षेत्रों में नगरपालिका और वार्ड कार्यालयों पर हमला किया गया। भटभटेनी सुपरमार्केट में लगी भीषण आग अगले दिन तक बुझाई नहीं जा सकी।
नेपाल इस समय गंभीर राजनीतिक संकट और व्यापक हिंसक विरोध प्रदर्शनों से गुजर रहा है, जिसमें युवा नेतृत्व का नया उदय और सत्ता परिवर्तन की मांग प्रमुख रूप से सामने आ रही है।