मोदी कैबिनेट की बैठक में बड़ा फैसला, दो चरणों में होगी डिजिटल जनगणना, जाति भी पूछी जाएगी, 30 लाख लोग देंगे अंजाम.
नई दिल्ली। शुक्रवार को हुई मोदी कैबिनेट की बैठक में जनगणना को लेकर बड़ा फैसला लिया गया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2027 में होने वाली जनगणना के लिए 11, 718 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि जनगणना दो चरणों में होगी। इसके तहत अप्रैल और सितंबर 2026 के बीच घरों की सूची तैयार की जाएगी और फरवरी 2027 में जनगणना की जाएगी।
अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2027 में होने वाली जनगणना पहली डिजिटल जनगणना होगी। इसमें जाति आधारित गणना को शामिल किया जाएगा। इसका मतलब है कि लोगों की गणना के वक्त उनसे उनकी जाति भी पूछी जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश में जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के तहत इसे किया जाता है। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। कोविड महामारी के कारण जनगणना 2021 आयोजित नहीं की जा सकी। इससे पहले 16 जून 2025 को जनगणना 2027 की राजपत्र अधिसूचना जारी की गई। जनगणना 2027 की अनुमानित लागत 11,718 करोड़ रुपये होगी जनगणना के दौरान राष्ट्रव्यापी जागरूकता, समावेशी भागीदारी, अंतिम छोर तक जुड़ाव और जमीनी कार्यों के समर्थन के लिए लक्षित और व्यापक प्रचार अभियान चलाया जाएगा। इस कार्य में लगभग 30 लाख जमीनी कार्यकर्ता शामिल होंगे और 1.02 करोड़ मानव-दिवस का रोजगार सृजित होगा।
एनर्जी के क्षेत्र में भी हुआ बड़ा फैसला
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यूनियन कैबिनेट ने एनर्जी के क्षेत्र में भी बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि कोल सेतु यानी कोल के उत्पादन में भारत आत्मनिर्भर बनने जा रहा है, जिससे इंपोर्ट पर निर्भरता खत्म हो रही है। इंपोर्टेड कोल से निर्भरता कम होने के कारण हम 60 हजार करोड़ रुपये बचा रहे हैं। 2024-25 में 1 बिलियन टन कोल प्रोडक्शन हुआ है। रेल और कोल एक तरीके से पर्टनर हैं। डोमेस्टिक जितने पावर प्लांट हैं उसमें रिकॉर्ड हाई कोल स्टॉक क्रिएट हो चुके हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2026 के लिए पिसाई वाले खोपरा के लिए 12,027 रुपये प्रति क्विंटल और गोल खोपरा के लिए 12,500 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को मंजूरी दे दी है। एनएएफईडी और एनसीसीएफ इसके लिए नोडल एजेंसियां होंगी।