चुनाव आयोग की सख्त हिदायत: AI का प्रयोग जिम्मेदारी और पारदर्शिता से करें, स्रोत का खुलासा अनिवार्य.
चुनाव आयोग की सख्त हिदायत: AI का प्रयोग जिम्मेदारी और पारदर्शिता से करें, स्रोत का खुलासा अनिवार्य
चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने की सलाह दी है। आयोग ने निर्देश दिया है कि एआई के जरिये तैयार की गई किसी भी फोटो, वीडियो या सामग्री के स्रोत का खुलासा करना अनिवार्य होगा।मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने चुनाव प्रचार में एआई के दुरुपयोग पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को गलत सूचना और डीपफेक वीडियो के खिलाफ सतर्क रहना होगा। हाल ही में दिल्ली विधानसभा चुनाव में डीपफेक और भ्रामक संदेशों के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें एआई-जनरेटेड सामग्री के माध्यम से भ्रामक प्रचार किए गए। इस पर दिल्ली पुलिस ने पांच एफआईआर दर्ज की हैं।

आयोग ने निर्देश दिया है कि राजनीतिक दल विज्ञापन और प्रचार सामग्री में सिंथेटिक कंटेंट का उपयोग करते समय अस्वीकरण देना सुनिश्चित करें। लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर सोशल मीडिया और एआई के उपयोग पर सख्त निगरानी रखने के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। आयोग का मानना है कि डीपफेक वीडियो चुनावी प्रक्रिया को बाधित कर सकते हैं और चुनाव कानूनों का उल्लंघन करते हैं।चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि एआई का उपयोग एक जिम्मेदार और पारदर्शी तरीके से होना चाहिए, ताकि मतदाता सही जानकारी पर आधारित निर्णय ले सकें।
चुनाव आयोग की सख्त हिदायत: AI का प्रयोग जिम्मेदारी और पारदर्शिता से करें, स्रोत का खुलासा अनिवार्य
चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने की सलाह दी है। आयोग ने निर्देश दिया है कि एआई के जरिये तैयार की गई किसी भी फोटो, वीडियो या सामग्री के स्रोत का खुलासा करना अनिवार्य होगा।मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने चुनाव प्रचार में एआई के दुरुपयोग पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को गलत सूचना और डीपफेक वीडियो के खिलाफ सतर्क रहना होगा। हाल ही में दिल्ली विधानसभा चुनाव में डीपफेक और भ्रामक संदेशों के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें एआई-जनरेटेड सामग्री के माध्यम से भ्रामक प्रचार किए गए। इस पर दिल्ली पुलिस ने पांच एफआईआर दर्ज की हैं।
आयोग ने निर्देश दिया है कि राजनीतिक दल विज्ञापन और प्रचार सामग्री में सिंथेटिक कंटेंट का उपयोग करते समय अस्वीकरण देना सुनिश्चित करें। लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर सोशल मीडिया और एआई के उपयोग पर सख्त निगरानी रखने के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। आयोग का मानना है कि डीपफेक वीडियो चुनावी प्रक्रिया को बाधित कर सकते हैं और चुनाव कानूनों का उल्लंघन करते हैं।चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि एआई का उपयोग एक जिम्मेदार और पारदर्शी तरीके से होना चाहिए, ताकि मतदाता सही जानकारी पर आधारित निर्णय ले सकें।