वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट पर टिकी हैं निगाहें, देखना होगा कि किस सेक्टर को कितना होता है फायदा.
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज यानी रविवार को लोकसभा में बजट पेश करेंगी। इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं। आम जनता को राहत की उम्मीद है। अब देखना यह है कि यह बजट लोगों को कितनी राहत दे पाता है।
बताया जाता है कि इस बजट में सरकार का मुख्य फोकस आर्थिक विकास दर को गति देने के लिए 'मैन्यूफैक्चरिंग' और 'घरेलू मांग' को बढ़ाने पर रहने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि आयात पर निर्भरता कम करने और निर्यात के नए अवसर तलाशने के लिए यह रणनीति सबसे प्रभावी साबित होगी। इनकम टैक्स और जीएसटी में राहत देने के कारण चालू वित्त वर्ष 2025-26 में टैक्स से मिलने वाले राजस्व की बढ़ोतरी दर पिछले वित्त वर्ष की तुलना में कम है, इसलिए सरकार की तरफ से इस साल इनकम टैक्स में किसी भी प्रकार की राहत देने की संभावना काफी कम है।
जिन राज्यों में चुनाव उन्हें मिल सकती है राहत
इस साल पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु जैसे राज्यों में इस साल चुनाव भी है और पिछले साल बिहार की तरह इन राज्यों के लिए भी बजट में कोई न कोई सौगात हो सकती है। आगामी वित्त वर्ष में सरकार अपने पुराने वादे के हिसाब से फिस्कल डिफसिट को चालू वित्त वर्ष में जीडीपी के 4.4 प्रतिशत के लक्ष्य से और कम करना चाहेगी।
कुछ इस तरह का होगा बजट
-सरकार का जोर स्थानीय उत्पादन बढ़ाने पर है। हालांकि वैश्विक मंदी के चलते निर्यात बढ़ाना एक चुनौती है, लेकिन मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को मिलने वाली नई राहतों से लंबी अवधि में फायदा पहुंचने की उम्मीद है।
- आगामी वित्त वर्ष में शहरों के आधुनिकीकरण और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के लिए बड़े आवंटन की संभावना है।
- स्थानीय निकायों को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र राज्यों को नए राजस्व मॉडल अपनाने का सुझाव दे सकता है, जिससे बुनियादी ढांचा सुधारने में मदद मिलेगी।
- किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से उनकी उत्पादकता बढ़ाने और उन्हें पारंपरिक खेती के बजाय 'व्यावसायिक फसलों' की ओर प्रोत्साहित करने के लिए विशेष योजनाओं की घोषणा हो सकती है।
-सरकार खाद्य, खाद व मनरेगा के मद में दी जाने वाली लगभग 4.5 लाख करोड़ की सब्सिडी भी जारी रखेगी। इसलिए राजस्व जुटाने के लिए सरकार संपदा के मौद्रीकरण व विनिवेश के मोर्चे पर भी बजट में घोषणाएं कर सकती है।
-राज्यों में सुधार के लिए रोडमैप लाए जा सकते हैं और उनके सुधार को इंसेटिव से जोड़ा जा सकता है। किफायती आवास के निर्माण एवं उनकी खरीदारी को आसान बनाने के लिए भी बजट में घोषणाएं संभावित है।