‘कैलाश विजयवर्गीय जिंदाबाद’ के नारों के साथ इंदौर में ‘लोकसभा स्पीकर ओम बिरला का जोरदार स्वागत’, आखिर क्या चाहते हैं मंत्रीजी?.
इंदौर। मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जबरदस्त चर्चा में हैं। भागीरथपुरा के गंदे पानी मामले में बुरी तरह फंसे विजयवर्गीय का फ्रस्टेशन मीडिया से लेकर विधानसभा में भी सामने आता रहता है। अब उनके कार्यकर्ता भी इसी फ्रस्टेशन के शिकार नजर आ रहे हैं।
शुक्रवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ट्रेन से इंदौर आए। वे यहां वैष्णव विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह में शामिल होने आए हैं। रेलवे स्टेशन पर उनके स्वागत के लिए पूर्व विधायक और मंत्री पुत्र आकाश विजयवर्गीय अपने समर्थकों के साथ पहुंचे। जब ओम बिरला उतरे तो भारत माता की जय, ओम बिरला जिंदाबाद के नारे लगे, जाहिर है अतिथि के स्वागत में ऐसे ही नारे लगाने की परंपरा रही है। लेकिन, इसके बाद कैलाश विजयवर्गीय जिंदाबाद के नारे गूंजने लगे जो बिरला जी के रेलवे स्टेशन से बाहर निकलने तक जारी रहे। खास बात यह कि यह नारा लगवाने वाला मंत्रीजी का खास समर्थक है, जो महापौर परिषद का सदस्य भी है।
छुटभैयै नेताओं से भी आगे निकले मंत्री समर्थक
आमतौर पर जब चुनाव का माहौल होता है तो नेता टिकट के लिए अपने-अपने समर्थकों को लेकर अपने नाम के नारे लगवाते हैं। चाहे भाजपा हो या कांग्रेस दोनों ही दलों के वरिष्ठ नेता ऐसे नारों से परहेज करते हैं। कई बार मंच से कहा जाता है कि नेता अपने समर्थन में नारे न लगवाएं। कई बार ऐसे नेताओं को फटकार भी मिली है। यह छुटभैया नेताओं की राजनीति मानी जाती है और खासकर भाजपा के वरिष्ठ नेता इसे पसंद ही नहीं करते।
केंद्रीय नेताओं को ताकत दिखाने की कोशिश
पिछले कुछ समय से मध्यप्रदेश में मंत्री विजयवर्गीय की बेहद की खराब स्थिति चल रही है। सीएम डॉ.मोहन यादव से उनकी अदावत जग जाहिर है। ऐसे में विजयवर्गीय यह दिखाने की कोशिश में जुटे रहते हैं कि उनकी केंद्रीय नेताओं से जबरदस्त संबंध हैं। गृह मंत्री अमित शाह से संबंधों का हवाला देकर तो वे पूर्व सीएम को डराने की कोशिश करते रहते थे। वर्तमान सीएम के प्रति अपने संबंधों का इजहार कैबिनेट बैठक से लेकर विधानसभा तक विजयवर्गीय कई बार कर चुके हैं। हाल ही में मास्टर प्लान पर चर्चा के दौरान विजयवर्गीय ने विधानसभा में यहां तक कह दिया कि उनकी तरफ से कोई देरी नहीं हो रही, सीएम के पास डेढ़ साल से फाइल अटकी है। यह कहकर विजयवर्गीय ने विपक्ष को सीएम पर निशाना साधने के लिए छोड़ दिया।
आखिर क्या चाहते हैं मंत्री विजयवर्गीय
भाजपा के लोगों को ही विजयवर्गीय का व्यवहार समझ नहीं आ रहा। जब उनकी विधानसभा के लोग गंदे पानी पीने से मरने लगे तो उन्होंने मीडिया के सवाल पर कहा था-घंटा सवाल। यह घंटा पूरे देश में बजा। खुद को बेहद लोकप्रिय नेता मानने वाले विजयवर्गीय की हालत इस घटनाक्रम के बाद ऐसी हो गई कि अपनी ही विधानसभा में जाने की उनकी हिम्मत नहीं होती। चाहे मेट्रो प्रोजेक्ट हो या अन्य कोई सरकारी योजना, सब में टांग अड़ाने की कोशिश से भी वे बाज नहीं आते। ऐसे में भाजपा नेता ही यह सवाल करते हैं कि आखिर विजयवर्गीय को क्या चाहिए?
विजयवर्गीय की गलती के लिए सीएम ने मांगी माफी
भाजपा में कहा जाता है कि विजयवर्गीय को अब अपनी जुबान पर कंट्रोल नहीं रहा। पता नहीं किस बात को लेकर वे फ्रस्टेशन में हैं। पिछले दिनों उन्होंने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को औकात में रहने की बात कह दी। इसके बाद इतना बवाल मचा कि विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को भी विजयवर्गीय को समझाइश देनी पड़ी। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि विधानसभा में सीएम डॉ.मोहन यादव को विजयवर्गीय की करतूत के लिए माफी मांगनी पड़ी।