वॉइस ऑफ डीसी में पीटीएम को लेकर उठे सवाल, पैरेंट्स ने कहा-धोखे से सहमति पत्र पर कराए हस्ताक्षर, बोर्ड ने शर्मिंदगी की नई हद छू ली .
इंदौर। डेली कॉलेज का संविधान बदलने की कवायद में जुटे डीसी बोर्ड के खिलाफ सोशल मीडिया पर वॉइस ऑफ डीसी के माध्यम से लगातार आवाज उठ रही है। पैरेंट्स और ओल्ड डेलियन डीसी बोर्ड की कार्यप्रणाली से लेकर संविधान बदलने को लेकर भी सवाल पूछ रहे हैं। कल एक पोस्ट में डेली कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ.गुनमीत बिन्द्रा को लेकर सवाल उठाए गए थे। अब एक ताजा पोस्ट में पीटीएम को लेकर आवाज उठाई गई है। पैरेंट्स का कहना है कि उन्हें पीटीएम में बुलाकर धोखे से बोर्ड के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करा लिए गए।
अब सीधे पढ़ते हैं वॉइस ऑफ डीसी की पोस्ट-
यह सिर्फ़ गलत नहीं — यह सीधा धोखा है।
माता–पिता अपने बच्चों पर चर्चा करने आए थे।
लेकिन बोर्ड एक जाल बिछाकर आया था।
PTM के दौरान, माता–पिता से चुपचाप एक ऐसी शीट पर साइन करवाए गए जो देखने में सामान्य उपस्थिति-पत्र लग रही थी…
बाद में कई लोगों को पता चला कि ऊपर छोटे अक्षरों में छुपा हुआ लिखा था:“मैं वर्तमान बोर्ड को अपना पूर्ण समर्थन देता/देती हूँ…”
न तो इसे समझाया गया,
न सही तरीके से दिखाया गया,
यहाँ तक कि हस्ताक्षर कराने वाले शिक्षकों को भी पता नहीं था कि वे क्या circulate कर रहे थे।
आखिर ऐसी धोखाधड़ी क्यों!?
क्योंकि बोर्ड जानता है कि-
-जो माता-पिता उनके “दोस्त” नहीं हैं
-और जो किसी भी तरह के दंड से नहीं डरते
…वे कभी भी ऐसा समर्थन-पत्र साइन नहीं करेंगे।
इतने वर्षों की अव्यवस्था, नुकसान और अहंकार के बाद तो बिल्कुल नहीं।
इसीलिए इसे छुपाया गया,
माता–पिता को फंसाया गया,
और उनके हस्ताक्षर चोरी कर लिए गए।
माता–पिता गुस्से में हैं।
शिक्षक शर्मिंदा हैं।
बोर्ड ने शर्मिंदगी की एक नई हद छू ली है।
और अब ज़रा टाइमिंग देखिए…
-रजिस्ट्रार ने दो बार उनके खिलाफ आदेश दिए
-कलेक्टर ने उन्हें बड़े फैसले लेने से रोका
-हाई कोर्ट ने भी इसी तरह की पाबंदियां लगाईं
और फिर भी बोर्ड PTM के बहाने,
माता–पिता को धोखे से “support” के नाम पर साइन करा रहा है।
यह हताशा नहीं-यह घबराहट है।
अगर बोर्ड को इतना ही विश्वास है…
तो पर्दों के पीछे मत छुपिए।
धोखा देना बंद कीजिए।
झूठे “समर्थन” गढ़ना बंद कीजिए।
बुलाइए:
-सभी माता–पिता
-सभी शिक्षक
-सभी पूर्व छात्र
और एक गुप्त मतदान कराइए।
सच खुद फैसला कर देगा।
लेकिन हम सब जानते हैं कि वे ऐसा क्यों नहीं करेंगे।
उनका व्यवहार सिर्फ़ एक बात चिल्लाकर कह रहा है:
हम बिल्कुल सही रास्ते पर हैं।