एमवाय अस्पताल चूहा कांड में हाईकोर्ट ने सरकार को जारी किया नोटिस, मृतक बच्ची के परिजनों ने दायर की थी याचिका.
इंदौर। एमवाय अस्पताल में चूहे के कुतरने से नवजात बच्ची की मौत के मामले में मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। नवजात बच्ची के परिजनों द्वारा दायर याचिका पर मंगलवार को न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा ने राज्य शासन, स्वास्थ्य विभाग, ट्राइबल वेलफेयर विभाग, एम.जी.एम. मेडिकल कॉलेज एवं एमवाय अस्पताल के अधीक्षक को नोटिस जारी कर जबाव मांगा है।
उल्लेखनीय है कि देवराम निवासी जिला धार ने अपनी चार दिन की बच्ची की मौत के लिए अस्पताल प्रशासन और राज्य शासन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। याचिका में कहा गया है कि नवजात पहले से जन्मजात विकार से पीड़ित थी और एमवाय अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती थी। इसी दौरान चूहों ने उसके हाथ की उंगलियां कुतर दीं, जिससे उसके शरीर में संक्रमण हुआ। इसके बाद उसकी मृत्यु हो गई। याचिका में घटना की न्यायिक जांच किसी सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में कराने की मांग की गई थी। इसके साथ ही कहा गया था कि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के साथ 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
पेस्ट कंट्रोल के मामले में डीन और अधीक्षक दोषी
इस मामले की जांच के लिए गठित कमेटी ने डीन और अधीक्षक को इसके लिए दोषी माना था। जांच कमेटी की रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ कि एमवाय अस्पताल में साफ सफाई, पेस्ट एवं रोडेंट कंट्रोल की जिम्मेदारी डीन और अधीक्षक की है। कंपनी के काम के पर्यवेक्षण और भुगतान की जिम्मेदारी भी इन्हीं दोनों की है। डीन और अधीक्षक ने आउटसोर्स कंपनी एजाइल पेस्ट कंट्रोल को किए गए भुगतान के दस्तावेज और नोटशीट जांच समिति को उपलब्ध ही नहीं कराए। बार-बार रिमाइंडर के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने आउटसोर्स कंपनी को किए गए भुगतान की जानकारी जांच कमेटी से साझा नहीं की। आउटसोर्स कंपनी द्वारा कागजों पर पेस्ट कंट्रोल करने के बाद भी बिना सत्यापन कंपनी को करोड़ों का भुगतान हुआ। डीन और अधीक्षक ने तथ्यों को सही समय पर सही तरीके से नहीं रखा।
सिस्टर के पत्र पर नहीं हुई कोई कार्रवाई
एनएसयूआई की इंचार्ज सिस्टर कलावती भलावे ने जांच कमेटी को बताया था कि 7 जनवरी को चूहों की समस्या के लिए पत्र लिखा गया था, इसके बावजूद किसी ने ध्यान नहीं दिया। डीन और अधीक्षक द्वारा कंपनी को भुगतान किया जाता रहा।