केनरा बैंक में 2 करोड़ 56 लाख की धोखाधड़ी मामले में ईओडब्ल्यू ने दर्ज किया केस, लक्ष्य इंजीनियरिंग की प्रोपराइटर नेहा तांबी, शाखा प्रबंधक एवं वकील पर एफआईआर.
इंदौर। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने केनरा बैंक शाखा नवलखा के साथ 02 करोड 56 लाख रुपए की धोखाधड़ी के मामले में केस दर्ज किया है। ईओडब्ल्यू ने मेसर्स लक्ष्य इक्विपमेंट एंड इंजीनियरिंग के प्रोपराइटर, बैंक के शाखा प्रबंधक एवं पैनल एडवोकेट को आरोपी बनाया है।
ईओडब्ल्यू के अनुसार नेहा तांबी एवं मनीष तांबी द्वारा बैंक में लोन हेतु ऐसी संपत्ति बंधक रखी गई जो पूर्व में ही विक्रय की जा चुकी थीं। इसके माध्यम से कैनरा बैंक शाखा नवलखा को 2 करोड़ 56 लाख रुपए की धोखाधड़ी कर क्षति पहुंचाई। तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन कुमार झा द्वारा स्थल निरीक्षण की गलत रिपोर्ट दी गई इसमें संपत्ति को विवादरहित एवं औद्योगिक यूनिट को संचालित होना बताया गया।
ईओडब्ल्यू ने बताया कि बैंक के सर्च एडवोकेट विकास कुमार वर्मा द्वारा प्रस्तुत लीगल स्क्रूटनी रिपोर्ट में तथ्यों को छुपाते हुए उक्त संपत्ति को वैध एवं बंधक योग्य दर्शाया गया। लोन की राशि मेसर्स ब्लू चिप इक्विपमेंट एण्ड इंजीनियरिंग प्रा.लि. के खाते में स्थानांतरित की गई, जिसमें मनीष ताम्बी डायरेक्टर हैं। इस प्रकार फंड का डायवर्जन किया गया। ईओडब्ल्यू ने इस मामले में नेहा तांबी मेसर्स लक्ष्य इक्युपमेंट एण्ड इंजिनियरिंग (प्रोपराइटर), मनीष ताम्बी पिता भूपेन्द्र ताम्बी (ग्यारंटर), पवन कुमार झा (तत्कालीन मुख्य प्रबंधक) और विकास कुमार वर्मा (पैनल एडवोकेट) को आरोपी बनाया है।
जांच में मिली भारी पैमाने पर गड़बड़ी
ईओडब्ल्यू ने जांच के दौरान पाया गया कि मेसर्स लक्ष्य इक्विपमेंट एण्ड इंजीनियरिंग की प्रोपराइटर नेहा ताम्बी पत्नी मनीष ताम्बी द्वारा विनिर्माण इकाई प्लॉट क्रमांक 311, इंडस्ट्रियल ग्रोथ सेंटर, पीथमपुर, जिला धार में शीट मेटल कार्यों के विनिर्माण हेतु गारंटर मनीष ताम्बी के साथ 03 अक्टूबर 2020 को केनरा बैंक, नवलखा शाखा में 170.00 लाख रुपये की ओ.सी.सी. लिमिट हेतु आवेदन प्रस्तुत किया। उक्त ऋण के लिए नेहा ताम्बी एवं मनीष ताम्बी द्वारा संयुक्त नाम से फ्लैट क्रमांक 402, क्लासिक क्राउन, प्लॉट क्रमांक 5/2, ओल्ड पलासिया, इंदौर की रजिस्ट्री 29 नवंबर 2002 को कोलेटरल बंधक के रूप में प्रस्तुत की गई।
बैंक प्रबंधक और वकील की थी मिलीभगत
ऋण स्वीकृति के क्रम में केनरा बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक पवन कुमार झा द्वारा संपत्ति एवं विनिर्माण इकाई का निरीक्षण कर 03 अक्टूबर 2020 को विजिट रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें संपत्ति विवादरहित एवं यूनिट संचालित होना दर्शाया गया। जांच में पाया गया कि केनरा बैंक के तत्कालीन पैनल अधिवक्ता विकास कुमार वर्मा द्वारा प्रस्तुत लीगल स्क्रूटनी रिपोर्ट में तथ्यों को छुपाते हुए उक्त संपत्ति को वैध एवं बंधक योग्य दर्शाया गया।
लोन के लिए सौंपी सीज फ्लैट की रजिस्ट्री
जिस फ्लैट को केनरा बैंक में कोलेटरल के रूप में बंधक बताया गया था, वह संपत्ति वर्ष 2007 में ही विक्रय की जा चुकी थी तथा उक्त संपत्ति पूर्व से बैंक ऑफ इंडिया, कंचन बाग शाखा में बंधक होकर एन.पी.ए. घोषित होने पर सीज की जा चुकी थी।
व्यावसायिक यूनिट भी फर्जी निकला
जांच में यह पाया गया कि व्यवसायिक यूनिट अस्तित्व में नहीं है तथा ओ.सी.सी. खाते से संदिग्ध लेन-देन कर ऋण राशि का डायवर्जन किया गया है। मेसर्स लक्ष्य इक्विपमेंट एण्ड इंजीनियरिंग के खाते से मेसर्स ब्लू चिप इक्विपमेंट एण्ड इंजीनियरिंग प्रा.लि. के खाते में राशि स्थानांतरित की गई, जिसमें मनीष ताम्बी डायरेक्टर हैं तथा दोनों फर्मों का व्यवसायिक पता समान पाया गया।