सिंहस्थ ‘सिर’ पर, ‘नींद’ में अफसर…कहीं ‘प्रदेश’ का नाम न डुबो दे इंदौर.
प्रयागराज महाकुंभ के बाद पूरे देश की निगाहें उज्जैन में 2028 में होनेवाले सिंहस्थ पर टिकी हुई हैं। महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन के प्रति लोगों का आकर्षण और बढ़ा है। जाहिर है इस बार सिंहस्थ में पहले से कई गुना श्रद्धालु आएंगे। सिंहस्थ में इंदौर की बहुत बड़ी भूमिका रहती है। इसीलिए उज्जैन से थोड़ी कम लेकिन यहां भी जोरदार तैयारी करनी पड़ती है, लेकिन 2025 के आखिरी दिनों में भी इंदौर के अफसरों की सुस्ती चिन्ताजनक है।
सीएम डॉ.मोहन यादव सिंहस्थ को लेकर काफी गंभीर हैं। इसलिए हर कैबिनेट बैठक में सिंहस्थ से जुड़ी योजनाओं पर चर्चा होती है। सीएम ने उज्जैन में अपने पसंदीदा अफसरों की टीम खड़ी कर दी है। इंदौर कलेक्टर आशीष सिंह न केवल उज्जैन के संभागायुक्त हैं, बल्कि सिंहस्थ मेला का प्रभार भी उन्हें सौंपा गया है। नगर निगम इंदौर में अपर आयुक्त रहे अभिलाष मिश्रा को उज्जैन नगर निगम का आयुक्त बनाया गया है। इंदौर के एक और तेज-तर्रार अफसर संदीप सोनी के हाथों उज्जैन विकास प्राधिकरण की कमान है। इस तरह देखा जाए तो उज्जैन की पूरी टीम लगभग तैयार है और काम भी कर रही है।
इसके विपरित इंदौर में भयंकर सुस्ती का आलम है। इंदौर कलेक्टर की कुर्सी पर शिवम वर्मा को सिंहस्थ के मद्देनजर ही बिठाया गया है, लेकिन सिर्फ उनके सक्रिय रहने से ही सब कुछ नहीं हो जाएगा। वर्तमान में इंदौर नगर निगम बिल्कुल सुस्त पड़ा हुआ है। शहर की जनता के सामान्य कामकाज ही नहीं हो पा रहे हैं, ऐसे में वर्तमान निगमायुक्त सिंहस्थ के लिए भी शहर को तैयार कर लेंगे इस पर संदेह है। इंदौर विकास प्राधिकरण के नए सीईओ भी सिर्फ फाइलें पढ़ने में ही व्यस्त हैं, जबकि सिंहस्थ से जुड़े अधिकांश निर्माण कार्य की जिम्मेदारी इन्हीं पर है। सिंहस्थ की तैयारियों के मुख्य केंद्र बिन्दु इंदौर संभागायुक्त का अब तक का कामकाज न तो अफसरों को समझ आया और न ही जनता को। ऐसे में वे अन्य विभागों के बीच कितना समन्वय बना पाएंगे, कहा नहीं जा सकता।
सीएम साहब, आपको भी पता है कि इस सिंहस्थ में इंदौर की कितनी बड़ी भूमिका है। इंदौर की टीम की मजबूती के बिना सिंहस्थ की सफलता संभव नहीं है।
इसलिए, एक बार विचार करिए। या तो इन्हें टाइट कीजिए या फिर एक मजबूत टीम का विकल्प सोचिए।
आखिर यह मध्यप्रदेश, उज्जैन, इंदौर और आपके मान-सम्मान का सवाल है।