गाजा पुनर्निर्माण पर अरब नेताओं की योजना को ट्रंप प्रशासन ने किया खारिज, पेश की अपनी अलग रणनीति.
गाजा पुनर्निर्माण पर अरब नेताओं की योजना को ट्रंप प्रशासन ने किया खारिज, पेश की अपनी अलग रणनीति
अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने अरब देशों द्वारा सुझाई गई गाजा पुनर्निर्माण योजना को ठुकरा दिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने विजन पर अडिग हैं, जिसमें गाजा को फलस्तीनी नागरिकों से मुक्त कर एक पर्यटन स्थल में बदलने की योजना शामिल है।

व्हाइट हाउस का बयान
व्हाइट हाउस नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रवक्ता ब्रायन ह्यूस ने कहा कि गाजा मौजूदा समय में लोगों के रहने लायक नहीं है। उन्होंने कहा,
"गाजा मलबे और विस्फोटकों से भरा हुआ है। ट्रंप प्रशासन क्षेत्र में शांति और समृद्धि लाने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन अरब नेताओं की योजना से यह संभव नहीं हो सकता।"
अरब देशों की बैठक और मिस्र की योजना
हाल ही में अरब देशों ने गाजा पुनर्निर्माण पर बैठक की, जिसमें मिस्र ने एक योजना पेश की थी।
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हमास को गाजा का अस्थायी प्रशासन सौंपने और नई सरकार के गठन तक इसका नियंत्रण बनाए रखने का प्रस्ताव दिया गया था।
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मिस्र ने यह भी सुझाव दिया कि गाजा के 20 लाख फिलिस्तीनियों को वहीं रहने दिया जाए, जो ट्रंप प्रशासन की नीति के खिलाफ है।
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ट्रंप की योजना के मुताबिक फलस्तीनियों को अन्य अरब देशों में बसाने की बात कही गई थी।
हमास और अरब देशों में मतभेद
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हमास ने संकेत दिया कि वह गाजा के प्रशासन में कोई भूमिका नहीं निभाएगा, लेकिन उसने अपने हथियार डालने से इनकार कर दिया।
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अरब देशों के बीच भी इस बात पर सहमति नहीं बन पाई कि हमास को पूरी तरह समाप्त किया जाए या यह निर्णय फिलिस्तीनियों पर छोड़ दिया जाए।
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बैठक में सऊदी अरब और यूएई जैसे अहम अरब देश शामिल नहीं हुए, जिससे यह संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय शक्तियां अब भी एकमत नहीं हैं।
संयुक्त राष्ट्र की भूमिका और पुनर्निर्माण योजना
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अनुरोध किया गया कि गाजा में अंतरराष्ट्रीय शांति सैनिकों की तैनाती की जाए।
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अगले महीने एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें पुनर्निर्माण के लिए धन जुटाने की कोशिश होगी।
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समृद्ध खाड़ी देश इस परियोजना के लिए वित्तीय सहायता देने के इच्छुक हैं, लेकिन निवेश से पहले वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि भविष्य में कोई नया युद्ध न छिड़े।
गाजा पुनर्निर्माण के चरण
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पहला चरण (6 महीने):
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मलबा हटाने और विस्फोटक पदार्थों को निष्क्रिय करने पर जोर।
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दूसरा और तीसरा चरण (कई वर्षों तक):
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बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण।
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15 लाख विस्थापित फिलिस्तीनियों के लिए अस्थायी घरों की व्यवस्था।
क्या गाजा संकट का हल निकलेगा?
ट्रंप प्रशासन की योजना और अरब देशों के प्रस्ताव में बड़ा अंतर होने के कारण गाजा के भविष्य को लेकर असमंजस बना हुआ है।
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ट्रंप गाजा को फलस्तीनियों से खाली कर पर्यटन स्थल बनाना चाहते हैं, जबकि अरब देश वहां फिलिस्तीनियों के पुनर्वास पर जोर दे रहे हैं।
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हमास अपने हथियार नहीं डालना चाहता, जिससे सुरक्षा की समस्या बनी हुई है।
अब देखना होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या गाजा को लेकर कोई सर्वमान्य समाधान निकल पाता है या नहीं।
गाजा पुनर्निर्माण पर अरब नेताओं की योजना को ट्रंप प्रशासन ने किया खारिज, पेश की अपनी अलग रणनीति
अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने अरब देशों द्वारा सुझाई गई गाजा पुनर्निर्माण योजना को ठुकरा दिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने विजन पर अडिग हैं, जिसमें गाजा को फलस्तीनी नागरिकों से मुक्त कर एक पर्यटन स्थल में बदलने की योजना शामिल है।
व्हाइट हाउस का बयान
व्हाइट हाउस नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रवक्ता ब्रायन ह्यूस ने कहा कि गाजा मौजूदा समय में लोगों के रहने लायक नहीं है। उन्होंने कहा,
"गाजा मलबे और विस्फोटकों से भरा हुआ है। ट्रंप प्रशासन क्षेत्र में शांति और समृद्धि लाने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन अरब नेताओं की योजना से यह संभव नहीं हो सकता।"
अरब देशों की बैठक और मिस्र की योजना
हाल ही में अरब देशों ने गाजा पुनर्निर्माण पर बैठक की, जिसमें मिस्र ने एक योजना पेश की थी।
हमास को गाजा का अस्थायी प्रशासन सौंपने और नई सरकार के गठन तक इसका नियंत्रण बनाए रखने का प्रस्ताव दिया गया था।
मिस्र ने यह भी सुझाव दिया कि गाजा के 20 लाख फिलिस्तीनियों को वहीं रहने दिया जाए, जो ट्रंप प्रशासन की नीति के खिलाफ है।
ट्रंप की योजना के मुताबिक फलस्तीनियों को अन्य अरब देशों में बसाने की बात कही गई थी।
हमास और अरब देशों में मतभेद
हमास ने संकेत दिया कि वह गाजा के प्रशासन में कोई भूमिका नहीं निभाएगा, लेकिन उसने अपने हथियार डालने से इनकार कर दिया।
अरब देशों के बीच भी इस बात पर सहमति नहीं बन पाई कि हमास को पूरी तरह समाप्त किया जाए या यह निर्णय फिलिस्तीनियों पर छोड़ दिया जाए।
बैठक में सऊदी अरब और यूएई जैसे अहम अरब देश शामिल नहीं हुए, जिससे यह संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय शक्तियां अब भी एकमत नहीं हैं।
संयुक्त राष्ट्र की भूमिका और पुनर्निर्माण योजना
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अनुरोध किया गया कि गाजा में अंतरराष्ट्रीय शांति सैनिकों की तैनाती की जाए।
अगले महीने एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें पुनर्निर्माण के लिए धन जुटाने की कोशिश होगी।
समृद्ध खाड़ी देश इस परियोजना के लिए वित्तीय सहायता देने के इच्छुक हैं, लेकिन निवेश से पहले वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि भविष्य में कोई नया युद्ध न छिड़े।
गाजा पुनर्निर्माण के चरण
पहला चरण (6 महीने):
मलबा हटाने और विस्फोटक पदार्थों को निष्क्रिय करने पर जोर।
दूसरा और तीसरा चरण (कई वर्षों तक):
बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण।
15 लाख विस्थापित फिलिस्तीनियों के लिए अस्थायी घरों की व्यवस्था।
क्या गाजा संकट का हल निकलेगा?
ट्रंप प्रशासन की योजना और अरब देशों के प्रस्ताव में बड़ा अंतर होने के कारण गाजा के भविष्य को लेकर असमंजस बना हुआ है।
ट्रंप गाजा को फलस्तीनियों से खाली कर पर्यटन स्थल बनाना चाहते हैं, जबकि अरब देश वहां फिलिस्तीनियों के पुनर्वास पर जोर दे रहे हैं।
हमास अपने हथियार नहीं डालना चाहता, जिससे सुरक्षा की समस्या बनी हुई है।
अब देखना होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या गाजा को लेकर कोई सर्वमान्य समाधान निकल पाता है या नहीं।