हे महाकाल ! हमें भी तो आपने ही बनाया, हम भी तो इंसान हैं, फिर ये कौन लोग हैं जो हम जैसे लाखों भक्तों को मुंह चिढ़ाते आपके पास खड़े हो जाते हैं?.
हे महाकाल !
आपकी नजर में सारे इंसान, जीव-जंतु सब बराबर हैं। कहा जाता है कि आप सर्वहारा के भगवान हैं। आपने ही हमें भी बनाया। फिर ऐसा भेदभाव क्यों होता है कि कोई आकर आपके पास जाकर अभिषेक भी कर लेता है और हम लाखों लोग आपकी एक झलक पाने के लिए धक्के खाते रहते हैं।
आज ही जो नजारा आपके मंदिर में देखने को मिला, इसके बाद सीधे-सीधे आपसे शिकायत करने की इच्छा हुई। आपके दरबार में मैं तो अर्जी लगा आया, अब यह चिट्ठी आपके नाम लिख रहा हूं।
बाबा, जब से आपके आसपास के परिसर के सौंदर्य को बढ़ाया गया है, तब से भक्तों की भीड़ काफी बढ़ गई है। सरकारी प्रचार-प्रसार भी खूब हुआ, इसके कारण भी दूसरे प्रदेशों से ज्यादा लोग दर्शन और आशीर्वाद की आशा लिए आपके दरबार में आने लगे हैं। लेकिन, अधिकांश को निराशा ही हाथ लग रही है। घंटो भीड़ में धक्के खा-खा कर कई किलोमीटर के चक्कर लगाने के बाद भी आपके सामने एक सेकंड भी खड़ा नहीं होने दिया जाता। वहां उपस्थित गार्ड धक्के मारकर हटा देते हैं।
इसके विपरित आए दिन कोई न कोई हमारे सामने ही पूरे लाव-लश्कर के साथ आपके गर्भगृह में पहुंच जाता है। अभिषेक करता है, फोटोबाजी करता है और हमें नीचा दिखाने की कोशिश करता है।
बाबा, यह सब देखकर मन दु:खी हो जाता है। ऐसा लगता है कि हम इंसान ही नहीं हैं।
कई बार ऐसा भी लगता है कि आखिर हमारी भक्ति में क्या कमी रह गई? क्या जो अंदर अभिषेक कर रहे थे, वे मेरे से बड़े भक्त थे?
बाबा उन्हें भी तो मंत्री-संत्री आपने ही बनाया। अब हर कोई मंत्री-संत्री तो नहीं बन सकता। इसमें हमारी क्या गलती है?
बाबा जहां तक मेरी समझ है। आपने इंसानों को धरती पर सिर्फ इंसान ही बनाकर भेजा है। फिर ये वीआईपी, वीवीआईपी कैटेगरी कहां से आ गई?
बाबा आज तो एक बड़े मंत्री आपका अभिषेक कर रहे थे, लेकिन आए दिन ऐसा ही होता है। यह देखकर बड़ी कोफ्त होती है, क्योंकि यही लोग कहते हैं कि हमारे लिए सारी जनता एक बराबर है। सबका साथ-सबका विकास का नारा भी देते हैं। ऐसे में ताज्जुब इस बात का है कि आपके दरबार में इतना भेदभाव क्यों?
यह विषय कई बार उठा है। इस बार मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ। इसलिए यह लिखित अर्जी लगा रहा हूं।
बाबा मुझे पूरा भरोसा है कि आपने तो इन्हें भक्तों में भेदभाव करने का नहीं कहा होगा।
इसलिए जरा विचार करना बाबा। जिम्मेदारों को थोड़ी समझ भी देना और यह भी समझाना कि आपके भक्तों के साथ भेदभाव नहीं हो।