‘हेमंत ऋतु’ आने के बाद भी नहीं बज रही ‘मुरली’ ‘इन्तहा’ हो गई ‘इंतजार’ की निगम-मंडल में नियुक्ति का इंतजार कर थक गए नेता.
मध्यप्रदेश में डॉ.मोहन यादव ने 2023 में कार्यभार संभाला था। इसके बाद हेमंत खंडेलवाल 2025 की जुलाई में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने, लेकिन अब तक निगम-मंडल और प्राधिकरणों में नियुक्ति नहीं हो पाई हैं। इस बीच पद के इच्छुक नेता कई बार नया कुर्ता-पाजामा सिलवा चुके हैं, लेकिन नियुक्तियों की फाइल धूल से बाहर नहीं आ पा रही।
जब तक प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई थी, तब तक मामला टाला जाता रहा। नेता भी सब्र कर बैठे रहे। फिर प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति हो गई तो सबकी उम्मदों ने फिर से परवान चढ़ना शुरू कर दिया। इसके बाद भी जब फाइल इधर-उधर नहीं हुई तो फिर नेताओं में छपटाहट होने लगी। फिर कहा जाने लगा कि अब राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव हो जाने दो। वह भी हो गया। नितिन नवीन राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बन गए, लेकिन नियुक्तियों की फाइल से मंजूरी का पेपरवेट अभी तक नहीं हट रहा।
हाल ही में इस मामले में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का एक बयान सामने आया था कि निगमों और मंडलों में नियुक्तियों की पूरी तैयारी हो चुकी है और अब सिर्फ ऐलान बाकी है। पिछले दिनों हेमंत खंडेलवाल ने दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से भी मुलाकात की थी, तब से यह अनुमान लगाया जाने लगा कि जल्द ही नियुक्तियां हो जाएंगी।
इधर, पद के इच्छुक सारे नेता रैलियों, आयोजनों में भीड़ ले-ले जाकर परेशान हैं। भोपाल से लेकर दिल्ली तक इतने चक्कर लगा चुके हैं कि अगर पद न मिला तो नुकसान की भरपाई भी मुश्किल है। ऐसे में नेताओं का कहना है कि अब अगर नियुक्ति नहीं करोगे तो कब करोगे, 2028 में तो विधानसभा चुनाव ही आ जाएंगे। ताज्जुब की बात यह है कि इंदौर विकास प्राधिकरण जैसे प्रदेश के अधिकांश प्राधिकरण अफसरों के भरोसे हैं। अधिकांश निगम-मंडल भी अफसर चला रहे हैं। ऐसे में सवाल यह भी उठने लगा है कि जब जनता की भागीदारी तय करने का नियम है और अवसर भी तो ऐसा क्यों नहीं हो रहा?
सचमुच, बहुत देर हो चुकी है। नेताओं के इंतजार में भी अब वह ताकत न बची। जनता भी सवाल उठा रही है और किसी को इसमें देरी की वजह भी समझ नहीं आ रही।
अब तो नियुक्तियां कर दो…इन्तहा हो गई इंतजार की…