भाजपा नगर कार्यकारिणी पर अभी भी फंसा है पेंच, नाम देने वालों ने ना महिलाओं की चिन्ता की और ना ही रखा जातीय समीकरण का ध्यान.
इंदौर। भाजपा इंदौर नगर कार्यकारिणी को लेकर अभी भी घमासान जारी है। पर्यवेक्षक दो बार इंदौर से आकर विधायकों और वरिष्ठ नेताओं से नाम ले गए। नाम बंद लिफाफे में भोपाल भी पहुंच गए, पर फैसला अभी टलता जा रहा है। बताया जा रहा है कि जो नाम भोपाल भेजे गए हैं, उनमें पार्टी के कई मापदंडों का ध्यान नहीं रखा गया है। अधिकांश विधायकों व नेताओं ने महिलाओं और जातीय समीकरण का ध्यान नहीं रखा है।
नगर अध्यक्ष मिश्रा की परेशानी यह है कि आखिर किससे संबंध निभाएं और किससे बैर रखें। महामंत्री पद को लेकर मची खींचतान के बीच कार्यकारिणी तय करना आसान नहीं है। कई विधानसभा क्षेत्रों में तो मिश्रा की मजबूरी है और कुछ विधानसभा क्षेत्रों में उन्होंने वादा कर लिया है। कुछ नेता तो ऐसे हैं कि जिनकी मन की नहीं चली, तो वे आगे भी तकलीफ देंगे।
दो नंबर में तो क्लियर है पिक्चर
एक नंबर विधानसभा से मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भूपेंद्र केसरी का नाम दिया है। कुछ और नाम भी दिए गए हैं, लेकिन यहां भी जातीय समीकरण का ध्यान नहीं रखा गया है। दो नंबर से रमेश मेंदोला ने सुधीर कोले का नाम दिया है और यह नाम लगभग फाइनल माना जा रहा है, क्योंकि कोले को नगर अध्यक्ष मिश्रा का भी समर्थन है। तीन नंबर विधानसभा से महामंत्री बनाना संभव नहीं, क्योंकि नगर अध्यक्ष मिश्रा खुद उसी विधानसभा से आते हैं।
चार नंबर की समस्या का नहीं दिख रहा हल
अभी सबसे ज्यादा विवादित मामला चार नंबर का ही है। चार नंबर विधानसभा में विधायक मालिनी गौड़, महापौर पुष्यमित्र भार्गव और सांसद शंकर लालवानी के बीच टसल है। मालिनी गौड़ ने वीरेंद्र शेंडके का नाम दिया है, वहीं शंकर लालवानी ने पार्षद पुत्र विशाल गिडवानी का नाम दिया है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भरत पारीक का नाम दिया है, जो उनके प्रतिनिधि भी हैं। सुमित्रा महाजन ने यहां से सुधीर देड़गे का नाम दिया है। ऐसे में चार नंबर से चयन आसान नहीं है।
बिल्ली के भाग्य से टूट सकता है छींका
अगर भाजपा संगठन जातीय समीकरण पर कायम रहता है तो चार नंबर में बिल्ली के भाग्य से छींका टूट सकता है। यहां महापौर ने भरत पारीक का नाम दिया है, जो जैन समाज से आते हैं और सांसद ने विशाल गिडवानी का नाम दिया है जो सिंधी समाज से आते हैं। बताया जाता है कि अन्य किसी विधायक या नेता ने इन दोनों समाजों से नाम नहीं दिए हैं। अगर ऐसे में जैन समाज या सिंधी समाज को प्रतिनिधित्व देने की बात उठती है तो चार नंबर खेमे को निराशा हाथ लग सकती है।
मधु वर्मा ने जिराती के आगे लगाया दांव
पांच नंबर विधानसभा में तो कोई परेशानी नहीं है, क्योंकि वहां सुमित मिश्रा महेंद्र हार्डिया की ही सुनेंगे। हार्डिया ने वासुदेव पाटीदार का नाम दिया है, लेकिन छह नंबर में मामला उलझ रहा है। मधु वर्मा ने पहले गौतम शर्मा और नारायण पालीवाल के नाम दिए थे, लेकिन अब उन्होंने मन्नी भाटिया के रूप में सिख उम्मीदवार का नाम फंसा दिया है। जबकि जीतू जिराती ने खाती समाज से नीलेश चौधरी का नाम दिया है। इस दांवपेंच में मधु वर्मा इसलिए भारी दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि बताया जाता है कि अल्पसंख्यक समुदाय से किसी अन्य नेता ने नाम नहीं दिया है।
उपाध्यक्ष या मंत्री पद से ही करना पड़ेगा संतोष
चार नंबर विधानसभा सहित कई अन्य विधानसभाओं में महामंत्री का पद मिलना मुश्किल लग रहा है। ऐसे में उन्हें उपाध्यक्ष या मंत्री पद से ही संतोष करना पड़ेगा। चार नंबर से सांसद चाहते हैं कि विशाल गिडवानी अगर महामंत्री नहीं बनते तो उपाध्यक्ष या मंत्री पद ही दे दिया जाए। कई अन्य नेताओं की स्थिति भी ऐसी ही बनती जा रही है।
भोपाल से ही सुलझेगा पेंच
अभी जो स्थिति चल रही है, उससे ऐसा लगता है कि यह पेंच भोपाल से ही सुलझेगा। सूत्र बताते हैं कि दो-तीन दिन में नगर अध्यक्ष को भोपाल बुलाकर सूची फाइनल हो सकती है। नगर कार्यकारिणी का गठन इसी माह करना है। ऐसे में अब समय कम बचा है। अध्यक्ष बनने के बाद सुमित मिश्रा के सामने भी यह बड़ी चुनौती है।