भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के खिलाफ शिवेसना यूबीटी करेगी आंदोलन, सांसद संजय राउत ने इसे सीधा देशद्रोह बताया.
मुंबई। एशिया कप के तहत 14 सितंबर को भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच होने जा रहा है। शिवसेना यूबीटी इसके खिलाफ आंदोलन करने जा रही है। उद्धव गुट के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने गुरुवार को एक्स पर लिखा-पहलगाम हमले में 26 मां-बहनों का सिंदूर मिटा, उनका आक्रोश अभी थमा नहीं। ऑपरेशन सिंदूर, जो आतंकी पाकिस्तान को तोड़ने के लिए शुरू हुआ, अभी खत्म नहीं हुआ। फिर भी अबू धाबी में भारत-पाक क्रिकेट मैच खेला जा रहा है। 14 सितंबर को भाजपा मंत्रियों के बच्चे इसे देखने जरूर जाएंगे। यह सीधा देशद्रोह है।
संजय राउत ने कहा कि इसके खिलाफ शिवसेना (यूबीटी) महिला आघाडी रविवार को सिंदूर रक्षा आंदोलन करेगी। महाराष्ट्र की हजारों महिलाएं प्रधानमंत्री मोदी को घर-घर से सिंदूर भेजेंगी। सिंदूर के सम्मान में शिवसेना मैदान में! संजय राउत ने पहलगाम के बैसरन घाटी की आतंकी वारदात की भयावहता को बताने वाली वायरल तस्वीर भी शेयर की। राउत ने कहा कि आपने कहा था कि पानी और खून साथ-साथ नहीं बहेंगे। अगर पानी और खून साथ-साथ नहीं बहेंगे, तो खून और क्रिकेट साथ-साथ कैसे चलेंगे? यह देशद्रोह है, बेशर्मी है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है, यह अभी भी जारी है। पहलगाम में हमारी 26 महिलाओं का सिंदूर मिटा दिया गया। उनका दर्द, दुख और गुस्सा खत्म नहीं हुआ है। आज भी वे सदमे में हैं। आप लोग अबू धाबी में पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने जा रहे हैं। मेरा सवाल भाजपा से है, सरकार से नहीं। मेरा सवाल विश्व हिंदू परिषद, आरएसएस, बजरंग दल से है। इसमें आपकी कोई भूमिका है या नहीं?
सीधे प्रसारण पर रोक की भी उठी थी मांग
कुछ दिनों पहले उद्धव गुट की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने एशिया कप में भारत-पाकिस्तान मैच के देश में सीधे प्रसारण पर रोक लगाने की मांग की थी। उन्होंने पिछले महीने ही राष्ट्रीय हित और जनभावना का हवाला देते हुए मैच का सीधा प्रसारण बंद करने के लिए सरकार को पत्र लिखा था। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को लिखे पत्र में प्रियंका चतुर्वेदी ने लिखा था कि मैं आपको गहरी पीड़ा और चिंता के साथ लिख रही हूं, न केवल एक संसद सदस्य के रूप में, बल्कि इस देश के नागरिक के रूप में भी, जो अभी भी इस साल पहलगाम में हुए बर्बर आतंकवादी हमले में जानमाल के नुकसान का गम भूल नहीं पाया है। आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता का संदेश लेकर एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल दुनिया भर में भेजा गया था, जिसमें मैं भी शामिल थी, लेकिन भारत सरकार का क्रिकेट मैचों के आयोजन का यह निर्णय मुझे और मेरी अंतरात्मा को पूरी तरह से अस्वीकार्य है।