किसी जमाने में भाजपा की राजनीति में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बजता था ‘डंका’, आखिर अब क्यों बजने लगा ‘घंटा’.
इंदौर। इंदौर और इंदौर के नेता इन दिनों पूरे देश में चर्चा में है। भागीरथपुरा में गंदे पानी से मौतों के सिलसिले ने देश में आठ बार नंबर वन आने वाले शहर इंदौर को बदनाम कर दिया है। लोग तो अब यह भी कहने लगे हैं कि क्या वाकई इंदौर स्वच्छता में नंबर वन था या फिर कोई फर्जीवाड़ा हुआ है। इन सबके बीच मध्यप्रदेश भाजपा के कद्दावर नेता और नगरीय प्रशासन मंत्री के घंटा सवाल पर बहस छिड़ गई है।
दरअसल वनवास के बाद मध्यप्रदेश लौटे नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की विधानसभा एक के भागीरथपुरा बस्ती में गंदे पानी पीने से लोगों की मौतें हो रही हैं। ताज्जुब की बात यह कि विजयवर्गीय जिस विभाग के मंत्री हैं, वही विभाग शहर में पानी की सप्लाई करता है। जाहिर है आपकी विधानसभा और आपके विभाग के मामले में आपसे लोग सवाल पूछेंगे ही, लेकिन मंत्रीजी ने इन सवालों को बकवास बताते हुए एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल के पत्रकार से घंटा कह दिया। अब यह घंटा इतना जोरदार बजा कि इसकी गूंज पूरे देश में सुनाई देने लगी।
इतने परिपक्व नेता से ऐसी नहीं थी उम्मीद
मध्यप्रदेश और खासकर इंदौर में कैलाश विजयवर्गीय को लोग बहुत बड़ा मानते हैं और यह भी मानते हैं कि भाईसाहब कभी गलत ना तो बोल सकते हैं ना कर सकते हैं। जनता के भरोसे की बदौलत ही इंदौर की कई विधानसभाओं को भाजपा की झोली में डाल चुके हैं। लेकिन, चाहे सीएम न बनने की कुठा हो या फिर उम्र का तकाजा अब उनका लहजा पूरी तरह बदल चुका है। इसे आप अहंकार भी कह सकते हैं। शायद इसी वजह से इतने संवेदनशील मामले में भी उनके मुंह से यही अहंकार घंटा जैसा शब्द बुलवा गया।
अपने दाहिने हाथ मेंदोला से ही कुछ सीख लेते
भाजपा के लोग ही कह रहे हैं कि कैलाशजी पहले जैसे नहीं रहे। अब बात-बात पर भड़क जाना, कोई पसंद न आए तो सार्वजनिक रूप से उसकी खिल्ली उड़ाना तथा खुद के आगे किसी को कुछ नहीं समझना उनकी आदतों में शुमार हो चुका है। इसके विपरित कैलाश विजयवर्गीय के दाहिने हाथ विधायक रमेश मेंदोला का स्वभाव बिल्कुल ही बदल चुका है। वे न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर के रास्ते पर चल रहे हैं और दिनोंदिन उनकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। भाजपा के लोग ही कह रहे हैं कि कैलाशजी, मेंदोला से ही कुछ सीख लेते।
मीडिया पर भड़कने की हो गई है बीमारी
कैलाश विजयवर्गीय की सफलता उनकी मेहनत के साथ ही मीडिया का भी बहुत बड़ा हाथ है। लेकिन, जब मीडिया उन्हें सावधान करने की कोशिश करती है या फिर कोई सुझाव देती है तो उन्हें बर्दाश्त नहीं होता। भले ही संबंधित मीडिया हाउस उनकी सैकड़ों पॉजीटिव खबरें छाप या दिखा चुका हो, बस एक नेगेटिव खबर से उनका गुस्सा सातवें आसमान पर रहता है। ऐसा कई मीडिया हाउस और मीडियाकर्मियों के साथ हुआ है, जब उन्होंने यह कहकर सामने से माइक हटा दिया कि मेरे बारे में ऐसी खबरें दिखाते हो मुझे बात नहीं करनी।
अंधभक्तों पर भी कंट्रोल की जरूरत
गंदे पानी के घटनाक्रम को पूरे देश की मीडिया ने दिखाया, इसके बाद भी अंधभक्त सोशल मीडिया पर यह चला रहे हैं कि कैलाशजी की कोई गलती नहीं थी। कुछ अंधभक्त तो घंटा वाले बयान में भी मीडियाकर्मी की गलती बता रहे हैं। कह रहे हैं कि रिपोर्टर ने कैलाशजी को गुस्सा दिलाया था। अब सवाल यह है कि ऐसे घटनाक्रम में किस तरह के प्रश्न पूछे जाएं। ऐसा ही कई और मामलों में हो चुका है। भाजपा के लोग ही कह रहे हैं कि अंधभक्त ही कैलाशजी को मीडिया से दूर ले जा रहे हैं। अंधभक्त तो इस घटनाक्रम को साजिश बताने में भी जुट गए हैं।
कैसे नेता हो आप, जो अधिकारी आपकी नहीं सुनते
गंदे पानी प्रकरण में एक बात तो जो सबको आश्चर्य में डाल रही है, वह है-अधिकारी हमारी नहीं सुनते। अगर सचुमच अधिकारी आपकी नहीं सुनते तो आप राजनीति छोड़ घर में क्यों नहीं बैठ जाते? यह बात मंत्री विजयवर्गीय कई बार सीएम डॉ.मोहन यादव के सामने भी कह चुके हैं। यही बात महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी कह चुके हैं। अब जनता यह नहीं समझ पा रही कि आपको वोट देकर विधायक या महापौर क्यों चुना।
सीएम भी समझ गए हैं इंदौर की राजनीति
इस घटनाक्रम के बाद जब सीएम इंदौर आए तो सबको उम्मीद थी कि ताबड़तोड़ एक्शन लेंगे, लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं। दरअसल सीएम भी इदौर की राजनीति और यहां के नेताओं को समझ चुके हैं। वे इस बात से भी डरते हैं कि यहां के नेता कहीं कुछ गलत न करा लें। यही वजह है कि सीएम ने तुरंत कोई फैसला न लेते हुए, नगरीय प्रशासन विभाग के एसीएस संजय दुबे को इंदौर में छोड़ा। इसके बाद दुबे की रिपोर्ट पर नगर निगम आयुक्त, अपर आयुक्त और प्रभारी अधीक्षण यंत्री पर कार्रवाई हुई।
जनता ही अब नहीं मानती मजदूर का बेटा
कैलाशजी स्वयं यह कहते रहे हैं कि वे मजदूर के बेटे हैं। इसीलिए मिल क्षेत्र के बड़े नेता से शुरू किया सफर आज पूरे प्रदेश तक फैलता रहा। लेकिन, अब आम जनता भी यह कह रही है कि कैलाश जी यह भूल गए हैं कि वे मजदूर के बेटे हैं। उनके सियासी सफर के साथ उनका आर्थिक सफर भी पूरी रफ्तार से चलता रहा। जनता अब यह भी कहने लगी है कि कैलाशजी बड़ी गाड़ियों वाले नेता बन गए हैं।
कई बार विवादित बयान देकर फंसे हैं विजयवर्गीय
कैलाशजी का विवादों से पुराना नाता रहा है। कुछ समय पहले उन्होंने कहा था कि भारत ने 15 अगस्त, 1947 को जो स्वतंत्रता हासिल की, वह एक कटी-फटी स्वतंत्रता थी। विजयवर्गीय को अक्टूबर 2025 में इंदौर में दो ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेटरों के साथ कथित छेड़छाड़ के मामले पर कहा था कि खिलाड़ियों को अपने होटल से बाहर निकलने से पहले अधिकारियों को सूचित करना चाहिए था। पिछले साल ही विजयवर्गीय ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को लेकर भी टिप्पणी की थी, जिस पर विवाद खड़ा हुआ था। विजयवर्गीय ने कहा था कि हम पुरानी संस्कृति के लोग हैं, पुराने ज़माने में लोग अपनी बहनों के गांव का पानी तक नहीं पीते थे, लेकिन आज के हमारे प्रतिपक्ष के नेता ऐसे हैं कि अपनी बहन का चौराहे पर चुंबन कर लेते हैं। अप्रैल 2023 में विजयवर्गीय ने कहा था कि खराब या छोटे कपड़े पहनने वाली लड़कियां शूर्पणखा की तरह दिखती हैं। इसी तरह जनवरी 2013 में दुष्कर्म की लगातार बढ़ती घटनाओं पर टिप्पणी करते हुए विजयवर्गीय ने जो कहा था कि एक ही शब्द है मर्यादा। मर्यादा का उल्लंघन होता है तो सीता हरण हो जाता है।