राज्यसभा में बोले गृह मंत्री अमित शाह-अगर वंदे मातरम के नाम पर तुष्टिकरण न होता तो देश एक होता.
नई दिल्ली। संसद में वंदे मातरम पर चर्चा चल रही है। मंगलवार को गृह मंत्री अमित शाह ने इसमें भाग लिया। अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम के 150 साल पूरे हुए हैं। जब वंदे मातरम के 50 साल हुए, देश आजाद नहीं हुआ था। 1937 में जब स्वर्ण जयंती हुए तो नेहरू जी ने वंदे मातरम के टुकड़े कर दिए। 50वें पड़ाव में वंदे मातरम को तोड़ा गया। यहीं से तुष्टिकरण की शुरुआत हुई और इसी ने विभाजन के बीज बोए। कांग्रेस को पसंद आए न आए, लेकिन अगर वंदे मातरम के नाम पर तुष्टिकरण न होता तो देश एक होता।
शाह ने कहा कि जब वंदे मातरम की चर्चा हो रही है, कल कुछ सदस्यों ने लोकसभा में प्रश्न उठाया था कि आज वंदे मातरम पर चर्चा की जरूरत क्या है। वंदे मातरम पर चर्चा की जरूरत वंदे मातरम के प्रति समर्पण की जरूरत, जब वंदे मातरम बना था, तब भी थी, आजादी के समय भी थी, आज भी है और 2047 में जब आधुनिक भारत होगा, तब भी रहेगी। क्योंकि वंदे मातरम में कर्तव्य और राष्ट्रभक्ति की भावना है। तो जिन्हें वंदे मातरम पर चर्चा की वजह समझ नहीं आ रहा, उन्हें नए सिरे से सोचने की जरूरत है।
वंदे मातरम के समय कई सदस्य बाहर चले जाते हैं
अमित शाह ने आरोप लगाया है कि जब संसद में वंदे मातरम् का गान होता है, तो इंडी अलायंस के कई सदस्य, जो लोकसभा में बैठे होते हैं, बाहर चले जाते हैं। इस पर विपक्ष ने आपत्ति की और कहा कि गृह मंत्री इसका सबूत दें। तब अमित शाह ने कहा कि वो शाम तक सदन को इसका सबूत मुहैया करा देंगे कि वंदे मातरम् गीत के दौरान कौन से सदस्य सदन छोड़कर चले जाते हैं।
संसद में 1992 से गाया जा रहा वंदे मातरम
राज्यसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 1992 में भाजपा सांसद राम नाईक ने एक शॉर्ट ड्यूरेशन डिस्कशन के माध्यम से वंदे मातरम् को संसद में फिर से गाने का मुद्दा उठाया। उस समय प्रतिपक्ष के नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने बहुत प्रमुखता से लोकसभा अध्यक्ष से कहा कि इस महान सदन के अंदर वंदे मातरम् का गान होना चाहिए क्योंकि संविधान सभा ने इसे स्वीकार किया है। तब लोकसभा ने सर्वसम्मति से लोकसभा में वंदे मातरम् के गान की शुरुआत की।
कांग्रेस ने लगातार किया है वंदे मातरम का विरोध
अमित शाह ने कहा कि जिस पार्टी के अधिवेशन की शुरुआत गुरुवर टैगोर वंदे मातरम गाकर कराते थे। उस पर जब लोकसभा में चर्चा हुई तो गांधी परिवार के दोनों सदस्य सदन से गायब थे। जवाहरलाल नेहरू से लेकर आज तक कांग्रेस के नेतृत्व ने वंदे मातरम का विरोध किया है। कांग्रेस पार्टी की एक नेता ने कहा है कि वंदे मातरम की आज चर्चा की कोई जरूरत नहीं है। मुझे मालूम नहीं पड़ता कि वंदे मातरम से इन्हें क्या समस्या है। जिस गान को महात्मा गांधी ने राष्ट्र की सुप्रतिम आत्मा से जोड़ा कहा। बिपिन चंद्र पाल ने राष्ट्रधर्म की अभिव्यक्ति बताया, उस वंदे मातरम के टुकड़े करने का काम कांग्रेस ने किया था।