चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में दिग्विजय सिंह ने साधा केंद्रीय गृह मंत्री पर निशाना, कहा-वे कभी आरएसएस में रहे ही नहीं.
नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री पर भी जमकर निशाना साधा। दिग्विजय सिंह ने कहा कि मेरे कई मित्र आरएसएस में हैं। मैंने पता लगाया तो मालूम हुए कि अमित शाह कभी आरएसएस में रहे ही नहीं।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि पहली बात तो यह है कि आरएसएस एनजीओ पंजीकृत है या नहीं है? नहीं है तो प्रधानमंत्री जी लाल किले से कहते हैं विश्व का सबसे ज्यादा लोकप्रिय एनजीओ आरएसएस है। उस पर कोई कानून लागू नहीं होता, क्योंकि पंजीकृत नहीं है, ना तो उसकी सदस्यता है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह तो वही बात हो गई ना, खाता ना बही, जो मोदी जी कहें वही सही। अमित शाह कहें वही सही। दिग्विजय सिंह ने कहा कि संघ को गुरु दक्षिणा में चंदा मिलता है, क्या उनको ईडी के कानून में नहीं चाहिए।
कानून मंत्री मेघवाल ने किया जवाब
दिग्विजय सिंह के आरोपों पर कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल पलटवार किया। मेघवाल ने कहा कि अमित शाह जी ने संसद में कहा था कि मैं इक्कीस साल की उम्र से नारा लगाता रहा हूं कि देश की गलियां सूनी हैं, इंदिरा गांधी खूनी हैं। संघ की जहां तक बात है तो जो व्यक्ति एक बार शाखा में ध्वज प्रणाम कर लेता है, वो संघ का सदस्य होता है।
चुनाव आयोग को 21 पत्र लिखे, कोई जवाब नहीं
दिग्विजय सिंह ने चुनाव सुधारों पर चर्चा में कहा कि लोकसभा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नेता विपक्ष राहुल गांधी के सवालों का जवाब ही नहीं दिया। दिग्विजय सिंह ने कहा है कि अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि उनको मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि विपक्ष ने 2014 से अब तक चुनाव सुधार के लिए कोई संपर्क नहीं किया, जबकि मैंने खुद 21 खत लिखे हैं। मैं उनको सदन के पटल पर रखता हूं। अब या तो अमित शाह गलत बयानी कर रहे हैं या सीईसी उनको गुमराह कर रहा है, जो गलत हों वो माफी मांगे और उन पर एक्शन होना चाहिए।
चुनाव आयोग का रवैया पक्षपातपूर्ण
दिग्विजय सिंह ने कहा कि चुनाव आयोग प्रधानमंत्री के साम्प्रदायिक भाषणों को रोकना तो छोड़िए, नोटिस तक नहीं देता है। चुनाव आयोग का रवैया पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण है। उन्होंने कहा कि 70 लाख रुपए में चुनाव नहीं लड़ा जा सकता है। ये बात प्रधानमंत्री और गृहमंत्री भी जानते हैं, फिर भी सभी एफिडेविट देते हैं। चुनावी खर्च की ये राशि बढ़नी चाहिए। चुनाव लड़ने के लिए एक नेशनल फंड की भी व्यवस्था होनी चाहिए।
एसआईआर की आवश्यकता ही नहीं
दिग्विजय सिंह ने कहा कि मैं समझता हूं एसआईआर की आवश्यकता नहीं है। जब हर वर्ष साल में चार बार चुनाव आयोग समरी रिवीजन करता है तो एसआईआर की आवश्यकता क्या है? एसआईआर का निर्णय किसने लिए, यह भी मालूम नहीं है। इसमें दो आरटीआई लगाई गई। सिविल सोसाइटी एक्टिविस्ट अंजलि भारद्वाज ने एक आरटीआई लगाई कि एसआईआर 2025 को कई राज्यों में कराया जा रहा है। उसका फाइल पर कोई आदेश हुआ है या नहीं? उसका जवाब आया कि इस प्रकार का हमारे पास फाइल पर कोई आदेश नहीं है। दूसरी आरटीआई में पूछा गया कि बिहार में एसआईआर करने का निर्णय किया, उसमें कोई आदेश दिया है क्या? उसका भी फाइल पर कोई आदेश नहीं हुआ।