महाराष्ट्र में दिखी असल राजनीति, एकनाथ शिंदे ने भाजपा को और राज ठाकरे ने बड़े भाई उद्धव को दिया झटका.
मुंबई। कहा जाता है कि राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है। यह महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में चरितार्थ होता दिखाई दे रहा है। मुंबई बीएमसी चुनाव में चल रही रस्साकशी के बीच कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में अलग ही खेल हो गया। यहां मेयर की कुर्सी के लिए शिवसेना की शिंदे ने भाजपा को धोखा देते हुए राज ठाकरे की मनसे से हाथ लिया लिया है। और राज ठाकरे भी भाई उद्धव को धोखा देते हुए हामी भर दी है।
नगर निगम चुनाव के नतीजों के बाद अब संख्या बल और सत्ता निर्माण का खेल शुरू हो गया है। सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने दावा किया कि कल्याण-डोम्बिवली में शिवसेना-एमएनएस का महापौर बनेगा। शिवसेना शिंदे गुट और भाजपा ने कल्याण-डोम्बिवली नगर निगम में गठबंधन किया था। भाजपा के 50 उम्मीदवार जीते थे। इसके बाद भाजपा ने ढाई साल के लिए महापौर पद की मांग की थी। अब शिंदे गुट ने एमएनएस को साथ लेकर बहुमत हासिल कर लिया है। इससे भाजपा को तगड़ा झटका लगा है। इस गठबंधन पर शिवसेना यूबीटी के नेता अनिल परब ने कहा कि मैं सिर्फ अपनी पार्टी की बात कर सकता हूं। मैं उस पर बात नहीं कर सकता कि दूसरी पार्टी क्या करेगी। मेरी पार्टी शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) है और सभी फैसले उद्धव ठाकरे लेंगे।
कल्याण डोबिंबली में यह है गुणा-भाग
कल्याण डोबिंबली में कुल 122 सीटें हैं। यहां मेयर बनाने के लिए किसी भी दल के पास 62 सीटें चाहिए। यहां हुए महानगरपालिका चुनाव में किसी एक पार्टी को बहुमत नहीं मिला है। यहां एकनाथ शिंदे की शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और 52 सीटों पर कब्जा जमाया, लेकिन मेयर के लिए 10 और पार्षदों का समर्थन चाहिए। राज ठाकरे की पार्टी ने यहां 5 सीटों पर जीत हासिल की है। राज ठाकरे के पांच पार्षदों को मिला लिया जाए तो आंकड़ा 57 हो जाता है। ये बहुमत से अभी भी कम ही है, लेकिन अन्य दलों को पार्षदों से भी संपर्क की कोशिश हो रही है।