गढ़चिरौली में फडणवीस की पहल से बदलती तस्वीर: शिवसेना ने की तारीफ, सियासत में नए समीकरण?.
गढ़चिरौली में फडणवीस की पहल से बदलती तस्वीर: शिवसेना ने की तारीफ, सियासत में नए समीकरण?
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में महायुति की जबरदस्त जीत के बाद विपक्षी महाविकास अघाड़ी के सुर बदलने लगे हैं। इस बदलाव की झलक शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के मुखपत्र सामना में छपी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की तारीफ से देखने को मिली।सामना के संपादकीय में नए साल के अवसर पर मुख्यमंत्री फडणवीस के गढ़चिरौली दौरे और उनके द्वारा शुरू की गई विकास परियोजनाओं की सराहना की गई है। संपादकीय में लिखा गया कि फडणवीस ने गढ़चिरौली जिले से नए साल के काम की शुरुआत की, जो न केवल इस जिले बल्कि पूरे महाराष्ट्र के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है। गढ़चिरौली जैसे नक्सल प्रभावित जिले में गरीबी और हिंसा के चक्र को तोड़ने की कोशिशों के लिए मुख्यमंत्री की प्रशंसा की गई।

संपादकीय में उल्लेख है कि नक्सलवाद का जड़ गढ़चिरौली की गरीबी में है, जिसने युवाओं को आतंक और हिंसा की ओर धकेला। अब फडणवीस की योजनाओं से इस तस्वीर को बदलने की उम्मीद जताई गई है। संपादकीय में कहा गया, अगर मुख्यमंत्री गढ़चिरौली में संविधान का राज स्थापित करते हैं, तो वे निश्चित रूप से प्रशंसा के पात्र हैं।

इसपर शिवसेना के नेता और सांसद संजय राउत ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, अगर गढ़चिरौली जैसे जिले में विकास होता है और नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर संविधान का मार्ग अपनाया है, तो यह स्वागत योग्य है। मुख्यमंत्री की इस पहल को सराहा जाना चाहिए।"राउत ने आगे कहा कि उनकी पार्टी हमेशा सकारात्मक काम की सराहना करती है, चाहे वह किसी भी दल द्वारा किया गया हो। उन्होंने कहा, "हमने पीएम मोदी की भी आलोचना की है, लेकिन जब वे कुछ अच्छा करते हैं, तो हम उसे स्वीकारते हैं।
शिवसेना की ओर से इस अप्रत्याशित प्रशंसा ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह महाविकास अघाड़ी में मतभेदों का संकेत है या सियासत में किसी नए समीकरण की शुरुआत?
गढ़चिरौली में फडणवीस की पहल से बदलती तस्वीर: शिवसेना ने की तारीफ, सियासत में नए समीकरण?
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में महायुति की जबरदस्त जीत के बाद विपक्षी महाविकास अघाड़ी के सुर बदलने लगे हैं। इस बदलाव की झलक शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के मुखपत्र सामना में छपी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की तारीफ से देखने को मिली।सामना के संपादकीय में नए साल के अवसर पर मुख्यमंत्री फडणवीस के गढ़चिरौली दौरे और उनके द्वारा शुरू की गई विकास परियोजनाओं की सराहना की गई है। संपादकीय में लिखा गया कि फडणवीस ने गढ़चिरौली जिले से नए साल के काम की शुरुआत की, जो न केवल इस जिले बल्कि पूरे महाराष्ट्र के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है। गढ़चिरौली जैसे नक्सल प्रभावित जिले में गरीबी और हिंसा के चक्र को तोड़ने की कोशिशों के लिए मुख्यमंत्री की प्रशंसा की गई।
संपादकीय में उल्लेख है कि नक्सलवाद का जड़ गढ़चिरौली की गरीबी में है, जिसने युवाओं को आतंक और हिंसा की ओर धकेला। अब फडणवीस की योजनाओं से इस तस्वीर को बदलने की उम्मीद जताई गई है। संपादकीय में कहा गया, अगर मुख्यमंत्री गढ़चिरौली में संविधान का राज स्थापित करते हैं, तो वे निश्चित रूप से प्रशंसा के पात्र हैं।
इसपर शिवसेना के नेता और सांसद संजय राउत ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, अगर गढ़चिरौली जैसे जिले में विकास होता है और नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर संविधान का मार्ग अपनाया है, तो यह स्वागत योग्य है। मुख्यमंत्री की इस पहल को सराहा जाना चाहिए।"राउत ने आगे कहा कि उनकी पार्टी हमेशा सकारात्मक काम की सराहना करती है, चाहे वह किसी भी दल द्वारा किया गया हो। उन्होंने कहा, "हमने पीएम मोदी की भी आलोचना की है, लेकिन जब वे कुछ अच्छा करते हैं, तो हम उसे स्वीकारते हैं।
शिवसेना की ओर से इस अप्रत्याशित प्रशंसा ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह महाविकास अघाड़ी में मतभेदों का संकेत है या सियासत में किसी नए समीकरण की शुरुआत?