महाराष्ट्र की राजनीति में उबाल: शिंदे के गढ़ में BJP की दस्तक, महायुति में बढ़ी दरार?.
महाराष्ट्र की राजनीति में उबाल: शिंदे के गढ़ में BJP की दस्तक, महायुति में बढ़ी दरार?
महाराष्ट्र की सियासत में हलचल तेज हो गई है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना अध्यक्ष एकनाथ शिंदे के तेवरों को देखते हुए अटकलें लगाई जा रही हैं कि महायुति (भाजपा-शिवसेना-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। ताजा घटनाक्रम में शिंदे के मजबूत गढ़ ठाणे में भाजपा कोटे से मंत्री गणेश नाईक ने जनता दरबार लगाने का ऐलान किया है।

BJP का शिंदे को खुली चुनौती?
गणेश नाईक का जनता दरबार इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि ठाणे को शिंदे का गढ़ माना जाता है। भाजपा की यह रणनीति शिवसेना के दबदबे को खुली चुनौती मानी जा रही है। कार्यक्रम से पहले शहर में बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाए गए हैं, जिससे भाजपा-शिवसेना के रिश्तों में तनाव की अटकलें और तेज हो गई हैं।

'मुझे हल्के में न लें'— शिंदे की दो टूक
शुक्रवार को शिंदे ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "मुझे हल्के में न लें।" जब उनसे पूछा गया कि यह किसके लिए है, तो उन्होंने संकेतों में ही जवाब दिया कि वे अपना काम करते रहेंगे, जिन्हें समझना है वे खुद समझ लें।
फडणवीस-राज ठाकरे की मुलाकात से बढ़ी सियासी सरगर्मी
10 फरवरी को उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अचानक महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे से मिलने पहुंचे। इस मुलाकात के कुछ ही घंटों बाद उद्धव ठाकरे के करीबी नेता मिलिंद नार्वेकर, सुभाष देसाई और अंबादास दानवे भी फडणवीस के सरकारी आवास ‘सागर’ पर उनसे मिलने पहुंचे। शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं ने कहा कि बैठक बालासाहेब ठाकरे स्मारक को लेकर थी, लेकिन इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।
शिंदे को SDMA से हटाया, अजीत पवार की एंट्री
इस बीच, महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए एकनाथ शिंदे को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) से हटा दिया और उनकी जगह उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को शामिल कर लिया गया है। इस बदलाव के बाद महायुति में दरार की अटकलें और तेज हो गई हैं।
क्या महाराष्ट्र में फिर बदलेगा सत्ता का समीकरण?
इन ताजा घटनाक्रमों ने महाराष्ट्र की राजनीति को फिर से गर्मा दिया है। क्या भाजपा और शिवसेना के रिश्तों में खटास गहरा रही है? क्या महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा उलटफेर होने वाला है? आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होगी।
महाराष्ट्र की राजनीति में उबाल: शिंदे के गढ़ में BJP की दस्तक, महायुति में बढ़ी दरार?
महाराष्ट्र की सियासत में हलचल तेज हो गई है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना अध्यक्ष एकनाथ शिंदे के तेवरों को देखते हुए अटकलें लगाई जा रही हैं कि महायुति (भाजपा-शिवसेना-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। ताजा घटनाक्रम में शिंदे के मजबूत गढ़ ठाणे में भाजपा कोटे से मंत्री गणेश नाईक ने जनता दरबार लगाने का ऐलान किया है।
BJP का शिंदे को खुली चुनौती?
गणेश नाईक का जनता दरबार इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि ठाणे को शिंदे का गढ़ माना जाता है। भाजपा की यह रणनीति शिवसेना के दबदबे को खुली चुनौती मानी जा रही है। कार्यक्रम से पहले शहर में बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाए गए हैं, जिससे भाजपा-शिवसेना के रिश्तों में तनाव की अटकलें और तेज हो गई हैं।
'मुझे हल्के में न लें'— शिंदे की दो टूक
शुक्रवार को शिंदे ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "मुझे हल्के में न लें।" जब उनसे पूछा गया कि यह किसके लिए है, तो उन्होंने संकेतों में ही जवाब दिया कि वे अपना काम करते रहेंगे, जिन्हें समझना है वे खुद समझ लें।
फडणवीस-राज ठाकरे की मुलाकात से बढ़ी सियासी सरगर्मी
10 फरवरी को उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अचानक महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे से मिलने पहुंचे। इस मुलाकात के कुछ ही घंटों बाद उद्धव ठाकरे के करीबी नेता मिलिंद नार्वेकर, सुभाष देसाई और अंबादास दानवे भी फडणवीस के सरकारी आवास ‘सागर’ पर उनसे मिलने पहुंचे। शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं ने कहा कि बैठक बालासाहेब ठाकरे स्मारक को लेकर थी, लेकिन इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।
शिंदे को SDMA से हटाया, अजीत पवार की एंट्री
इस बीच, महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए एकनाथ शिंदे को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA) से हटा दिया और उनकी जगह उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को शामिल कर लिया गया है। इस बदलाव के बाद महायुति में दरार की अटकलें और तेज हो गई हैं।
क्या महाराष्ट्र में फिर बदलेगा सत्ता का समीकरण?
इन ताजा घटनाक्रमों ने महाराष्ट्र की राजनीति को फिर से गर्मा दिया है। क्या भाजपा और शिवसेना के रिश्तों में खटास गहरा रही है? क्या महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा उलटफेर होने वाला है? आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होगी।