इंडिगो संकट पर पायलटों का सोशल मीडिया पर खुला पत्र, सीईओ से लेकर प्रबंधन के बड़े अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप.
नई दिल्ली। इंडिगो का संकट बरकरार है। रविवार को भी इसकी करीब 650 उड़ानें रद्द रहीं। सरकार इसको लेकर सख्त फैसले भी ले रही है। इसी बीच सोशल मीडिया पर इंडिगो पायलटों का एक ओपन लेटर आया है। इसमें सीईओ पीटर एल्बर्स से लेकर कई बड़े अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
किसी अनाम कर्मचारी ने यह पत्र लिखकर दावा किया है कि वह इंडिगो एक दिन में नहीं गिरी, यह गिरावट कई वर्षों से बन रही थी। खुले पत्र की शुरुआत 2006 में इंडिगो की स्थापना के जिक्र से होती है। पत्र लिखने वाले का का दावा है कि वर्षों के साथ कंपनी की शुरुआती ग्रोथ लालच में और गौरव अहंकार में बदल गई। पत्र के अनुसार, एयरलाइन की बदहाली की जड़ वहीं से शुरू हुई, जब प्रबंधन ने अनुभव और योग्यता की अनदेखी करते हुए ऐसे लोगों को बड़े पद सौंप दिए, जिनके पास न विशेषज्ञता थी और न ही संचालन की समझ।
ड्यूटी नियमों को नजरअंदाज किया गया
पत्र में लिखा गया है कि पायलटों और कर्मचारियों की थकान, सुरक्षा और ड्यूटी नियमों को लगातार नजरअंदाज किया गया। थकान और ओवरवर्किंग पर आपत्ति जताने वाले कई पायलटों को दफ्तर में बुलाकर डांटा, डराया और अपमानित किया गया। हालात यह तक पहुंच गए कि बिना किसी अतिरिक्त वेतन के नाइट ड्यूटी, शिफ्ट और काम का बोझ कई गुना बढ़ा दिया गया। स्टाफ से अपमानजनक भाषा में कहा गया आप नौकरी पाकर खुश रहिए। पत्र में आरोप लगाया गया है कि समय के साथ एयरलाइन में एक ऐसा टॉक्सिक वर्ककल्चर विकसित हुआ जिसमें टैलेंट से ज्यादा टाइटल और पदों की चमक को महत्व दिया जाने लगा।
मौजूदा संकट के लिए आठ अधिकारी जिम्मेदार
पत्र में कहा गया है कि इंडिगो के प्रबंधन स्तर पर आठ शीर्ष अधिकारियों को मौजूदा संकट के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। सूची में सबसे ऊपर सीईओ पीटर एल्बर्स का नाम है, जिन पर आरोप लगाया गया है कि संकट के दौरान वे अपने मूल देश नीदरलैंड में छुट्टी पर थे। पत्र में जिन अन्य अधिकारियों को संकट का कारण बताया गया है, उनमें जेसन हर्टर, अदिति कुमारी, तपस डे, राहुल पाटिल, इसिडोर पोरक्वेरास (सीओओ), असीम मित्रा (एसवीपी फ्लाइट ऑपरेशंस) और अक्षय मोहन शामिल हैं।