नोएडा एयरपोर्ट: पहली विमान लैंडिंग के साथ ऐतिहासिक सफलता.
नोएडा एयरपोर्ट: पहली विमान लैंडिंग के साथ ऐतिहासिक सफलता
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए सोमवार का दिन ऐतिहासिक रहा, जब पहली बार एयरपोर्ट के रनवे पर विमान ने सफलतापूर्वक लैंडिंग की। यह लैंडिंग एयरपोर्ट के विकास और संचालन के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
पहली लैंडिंग: ढाई दशक की कवायद का नतीजा
सोमवार दोपहर 1:31 बजे इंडिगो का ए320 विमान दिल्ली से उड़ान भरकर नोएडा एयरपोर्ट पर उतरा। यह विमान एयरपोर्ट के फ्लाइंग जोन में 10 मिनट में पहुंचा और उपकरणों व संसाधनों की जांच के लिए डेढ़ घंटे तक एयरपोर्ट के आसपास उड़ता रहा। लैंडिंग से पहले रनवे को वाटर कैनन सलामी दी गई। इस दौरान केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री और उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

रनवे का निर्माण और परीक्षण
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रनवे का आकार: 3900 मीटर लंबा और 60 मीटर चौड़ा
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उपकरण: कैट-1 और कैट-3 उपकरण, जो कोहरे में विमान की ऊंचाई और दृश्यता की जानकारी देते हैं
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इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS): एयरक्राफ्ट बीच किंग एयर 360 ER के जरिए 10-14 अक्टूबर तक इसका परीक्षण किया गया।
एयरपोर्ट के पहले चरण का विकास
नोएडा एयरपोर्ट का पहला चरण 1334 हेक्टेयर क्षेत्र में बनकर तैयार हो रहा है। इसकी वार्षिक यात्री क्षमता 1.2 करोड़ होगी। एयरपोर्ट का निर्माण चार चरणों में पूरा होगा, और 2050 तक यह सालाना 7 करोड़ यात्रियों की आवाजाही संभाल सकेगा।
ट्रायल और निरीक्षण
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डीजीसीए ट्रायल: रनवे का ट्रायल 9 दिसंबर को हुआ, और 15 दिसंबर तक इसे निरीक्षण की समय सीमा दी गई है।
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लैंडिंग उपकरण: रनवे पर मार्किंग और लाइटिंग का काम पूरा हो चुका है।
भविष्य की संभावनाएं
नोएडा एयरपोर्ट के पूरी तरह संचालन के बाद यह न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण हवाई अड्डों में गिना जाएगा। इसके विकास से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और यात्री सुविधाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
नोएडा एयरपोर्ट: पहली विमान लैंडिंग के साथ ऐतिहासिक सफलता
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए सोमवार का दिन ऐतिहासिक रहा, जब पहली बार एयरपोर्ट के रनवे पर विमान ने सफलतापूर्वक लैंडिंग की। यह लैंडिंग एयरपोर्ट के विकास और संचालन के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
पहली लैंडिंग: ढाई दशक की कवायद का नतीजा
सोमवार दोपहर 1:31 बजे इंडिगो का ए320 विमान दिल्ली से उड़ान भरकर नोएडा एयरपोर्ट पर उतरा। यह विमान एयरपोर्ट के फ्लाइंग जोन में 10 मिनट में पहुंचा और उपकरणों व संसाधनों की जांच के लिए डेढ़ घंटे तक एयरपोर्ट के आसपास उड़ता रहा। लैंडिंग से पहले रनवे को वाटर कैनन सलामी दी गई। इस दौरान केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री और उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
रनवे का निर्माण और परीक्षण
रनवे का आकार: 3900 मीटर लंबा और 60 मीटर चौड़ा
उपकरण: कैट-1 और कैट-3 उपकरण, जो कोहरे में विमान की ऊंचाई और दृश्यता की जानकारी देते हैं
इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS): एयरक्राफ्ट बीच किंग एयर 360 ER के जरिए 10-14 अक्टूबर तक इसका परीक्षण किया गया।
एयरपोर्ट के पहले चरण का विकास
नोएडा एयरपोर्ट का पहला चरण 1334 हेक्टेयर क्षेत्र में बनकर तैयार हो रहा है। इसकी वार्षिक यात्री क्षमता 1.2 करोड़ होगी। एयरपोर्ट का निर्माण चार चरणों में पूरा होगा, और 2050 तक यह सालाना 7 करोड़ यात्रियों की आवाजाही संभाल सकेगा।
ट्रायल और निरीक्षण
डीजीसीए ट्रायल: रनवे का ट्रायल 9 दिसंबर को हुआ, और 15 दिसंबर तक इसे निरीक्षण की समय सीमा दी गई है।
लैंडिंग उपकरण: रनवे पर मार्किंग और लाइटिंग का काम पूरा हो चुका है।
भविष्य की संभावनाएं
नोएडा एयरपोर्ट के पूरी तरह संचालन के बाद यह न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण हवाई अड्डों में गिना जाएगा। इसके विकास से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और यात्री सुविधाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।