बंगाल में ममता सरकार का 'अपराजिता' बिल पास, रेप के आरोपियों को मौत की सजा का प्रावधान.
कोलकाता। कोलकाता में ट्रेनी डॉक्टर के रेप-मर्डर के बाद ममता सरकार ने एक कड़ा फैसला लिया है। आज पश्चिम बंगाल विधानसभा में सर्वसम्मति से एंटी रेप बिल 'अपराजिता' पास कर दिया गया। विपक्ष ने भी इसका पूरा समर्थन किया है। इस विधेयक में रेप के दोषियों के लिए मौत की सजा का प्रावधान किया गया है।
यह विधेयक विधानसभा में राज्य के कानून मंत्री मलय घटक ने पेश किया। इस बिल के अनुसार, रेप और हत्या करने वाले आपराधी के लिए फांसी की सजा का प्रावधान है। बिल में बलात्कार पीड़िता की मौत होने या उसके स्थायी रूप से अचेत अवस्था में चले जाने की स्थिति में दोषियों के लिए मौत की सजा का प्रावधान है। दोषियों को पेरोल की सुविधा न देने का भी प्रावधान है। ऐसे मामलों में पुलिस को 21 दिनों की जांच पूरी करनी होगी। इस बिल में दरिंदगी करने वाले के खिलाफ चार्जशीट दायर करने के 36 दिनों के भीतर सजा-ए-मौत का प्रावधान है। इस बिल में अपराधी की मदद करने पर 5 साल की कैद की सजा का प्रावधान है।
हर जिले में बनेगा टास्क फोर्स
इस विधेयक में सरकार ने हर जिले में स्पेशल अपराजिता टास्क फोर्स बनाए जाने का प्रावधान रखा है। रेप, एसिड, अटैक और छेड़छाड़ जैसे मामलों में ये टास्क फोर्स एक्शन लेगी। टास्क एक्शन फोर्स इस मामले में अपराधियों सलाखों के पीछे पहुंचाएगी। इस बिल में एसिड अटैक को भी रेप जितना गंभीर माना गया है। ऐसे आरोपियों के खिलाफ इस बिल में आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।
पहचान उजागर करने पर होगी सजा
ममता सरकार के इस बिल में रेप जैसे मामले में पीड़िता की पहचान उजागर करने वालों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान है। इस बिल के अनुसार, रेप पीडि़ता की पहचान उजागर करने वालों के खिलाफ 3 से 5 साल की सजा का प्रावधान है। बिल में सभी यौन अपराधों और एसिड अटैक की सुनवाई 30 दिनों में पूरी करने का प्रावधान है।
कोलकाता। कोलकाता में ट्रेनी डॉक्टर के रेप-मर्डर के बाद ममता सरकार ने एक कड़ा फैसला लिया है। आज पश्चिम बंगाल विधानसभा में सर्वसम्मति से एंटी रेप बिल 'अपराजिता' पास कर दिया गया। विपक्ष ने भी इसका पूरा समर्थन किया है। इस विधेयक में रेप के दोषियों के लिए मौत की सजा का प्रावधान किया गया है।
यह विधेयक विधानसभा में राज्य के कानून मंत्री मलय घटक ने पेश किया। इस बिल के अनुसार, रेप और हत्या करने वाले आपराधी के लिए फांसी की सजा का प्रावधान है। बिल में बलात्कार पीड़िता की मौत होने या उसके स्थायी रूप से अचेत अवस्था में चले जाने की स्थिति में दोषियों के लिए मौत की सजा का प्रावधान है। दोषियों को पेरोल की सुविधा न देने का भी प्रावधान है। ऐसे मामलों में पुलिस को 21 दिनों की जांच पूरी करनी होगी। इस बिल में दरिंदगी करने वाले के खिलाफ चार्जशीट दायर करने के 36 दिनों के भीतर सजा-ए-मौत का प्रावधान है। इस बिल में अपराधी की मदद करने पर 5 साल की कैद की सजा का प्रावधान है।
हर जिले में बनेगा टास्क फोर्स
इस विधेयक में सरकार ने हर जिले में स्पेशल अपराजिता टास्क फोर्स बनाए जाने का प्रावधान रखा है। रेप, एसिड, अटैक और छेड़छाड़ जैसे मामलों में ये टास्क फोर्स एक्शन लेगी। टास्क एक्शन फोर्स इस मामले में अपराधियों सलाखों के पीछे पहुंचाएगी। इस बिल में एसिड अटैक को भी रेप जितना गंभीर माना गया है। ऐसे आरोपियों के खिलाफ इस बिल में आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है।
पहचान उजागर करने पर होगी सजा
ममता सरकार के इस बिल में रेप जैसे मामले में पीड़िता की पहचान उजागर करने वालों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान है। इस बिल के अनुसार, रेप पीडि़ता की पहचान उजागर करने वालों के खिलाफ 3 से 5 साल की सजा का प्रावधान है। बिल में सभी यौन अपराधों और एसिड अटैक की सुनवाई 30 दिनों में पूरी करने का प्रावधान है।