ऑपरेशन सिंदूर के बाद चीन पर दुष्प्रचार का आरोप: अमेरिकी आयोग की रिपोर्ट में बड़े खुलासे
अमेरिकी कांग्रेस के परामर्श निकाय यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्यूरिटी रिव्यू कमीशन ने चीन पर ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुष्प्रचार अभियान चलाने का गंभीर आरोप लगाया है। आयोग ने यह दावा अपनी वार्षिक रिपोर्ट में किया,

एआई-generated ‘मलबे’ की तस्वीरों से दुष्प्रचार
रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने अपनी ग्रे-जोन रणनीति के तहत फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स का इस्तेमाल कर विमानों के कथित “मलबे” की AI-जनरेटेड तस्वीरों का प्रचार किया।
आयोग के मुताबिक, चीन ने यह अभियान फ्रांसीसी राफेल विमानों की बिक्री रोकने और अपने जे-35 फाइटर जेट्स को बढ़ावा देने के लिए छेड़ा था।
भारत-पाकिस्तान तनाव का चीन द्वारा ‘प्रचार’ में इस्तेमाल
रिपोर्ट में दावा किया गया कि मई में भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान चीन ने “अवसरवादी तरीके” से अपने हथियारों और तकनीकी क्षमताओं का आक्रामक प्रचार किया।
भारत–चीन संबंध: सीमा मुद्दे पर असमानता
आयोग ने भारत-चीन संबंधों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सीमा विवाद के समाधान को लेकर दोनों देशों के दृष्टिकोण में गहरी असमानता है—
- चीन: उच्चस्तरीय वार्ताओं का लाभ उठाकर आंशिक समाधान चाहता है और सीमा मुद्दे को अलग रखकर व्यापार एवं सहयोग बढ़ाने की उम्मीद करता है।
- भारत: सीमा विवाद का स्थायी समाधान चाहता है और हाल के वर्षों में चीन से उत्पन्न खतरे की गंभीरता को तेजी से पहचान चुका है।
आर्थिक सहयोग और भविष्य का समीकरण
रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान द्विपक्षीय समझौते अधिकतर वैचारिक स्तर के हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 2025 में भारत-चीन की प्रतिबद्धताएं—
- क्या केवल अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता की उथल-पुथल से बचने का अल्पकालिक प्रयास हैं,
- या द्विपक्षीय संबंधों के दीर्घकालिक सामान्यीकरण की दिशा में संकेत।
रिपोर्ट ने यह भी कहा कि दलाई लामा आने वाले वर्षों में भारत और चीन के बीच संभावित विवाद का महत्वपूर्ण विषय बने रहेंगे।
यह खुलासा चीन की दुष्प्रचार रणनीति, क्षेत्रीय राजनीति के संतुलन और भारत-चीन संबंधों के भविष्य को लेकर नए सवाल खड़े करता है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद चीन पर दुष्प्रचार का आरोप: अमेरिकी आयोग की रिपोर्ट में बड़े खुलासे
अमेरिकी कांग्रेस के परामर्श निकाय यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्यूरिटी रिव्यू कमीशन ने चीन पर ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुष्प्रचार अभियान चलाने का गंभीर आरोप लगाया है। आयोग ने यह दावा अपनी वार्षिक रिपोर्ट में किया,
एआई-generated ‘मलबे’ की तस्वीरों से दुष्प्रचार
रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने अपनी ग्रे-जोन रणनीति के तहत फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स का इस्तेमाल कर विमानों के कथित “मलबे” की AI-जनरेटेड तस्वीरों का प्रचार किया।
आयोग के मुताबिक, चीन ने यह अभियान फ्रांसीसी राफेल विमानों की बिक्री रोकने और अपने जे-35 फाइटर जेट्स को बढ़ावा देने के लिए छेड़ा था।
भारत-पाकिस्तान तनाव का चीन द्वारा ‘प्रचार’ में इस्तेमाल
रिपोर्ट में दावा किया गया कि मई में भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान चीन ने “अवसरवादी तरीके” से अपने हथियारों और तकनीकी क्षमताओं का आक्रामक प्रचार किया।
भारत–चीन संबंध: सीमा मुद्दे पर असमानता
आयोग ने भारत-चीन संबंधों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सीमा विवाद के समाधान को लेकर दोनों देशों के दृष्टिकोण में गहरी असमानता है—
चीन: उच्चस्तरीय वार्ताओं का लाभ उठाकर आंशिक समाधान चाहता है और सीमा मुद्दे को अलग रखकर व्यापार एवं सहयोग बढ़ाने की उम्मीद करता है।
भारत: सीमा विवाद का स्थायी समाधान चाहता है और हाल के वर्षों में चीन से उत्पन्न खतरे की गंभीरता को तेजी से पहचान चुका है।
आर्थिक सहयोग और भविष्य का समीकरण
रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान द्विपक्षीय समझौते अधिकतर वैचारिक स्तर के हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 2025 में भारत-चीन की प्रतिबद्धताएं—
क्या केवल अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता की उथल-पुथल से बचने का अल्पकालिक प्रयास हैं,
या द्विपक्षीय संबंधों के दीर्घकालिक सामान्यीकरण की दिशा में संकेत।
रिपोर्ट ने यह भी कहा कि दलाई लामा आने वाले वर्षों में भारत और चीन के बीच संभावित विवाद का महत्वपूर्ण विषय बने रहेंगे।
यह खुलासा चीन की दुष्प्रचार रणनीति, क्षेत्रीय राजनीति के संतुलन और भारत-चीन संबंधों के भविष्य को लेकर नए सवाल खड़े करता है।