जमानत के नाम पर कोर्ट को झांसा दे रहा है आसाराम, बनारस और अयोध्या में वीआईपी दर्शन से उठ रहे सवाल, आखिर किसने दी इसकी परमिशन?.
इंदौर। बलात्कार के केस में जेल की सजा काट रहे आसाराम इन दिनों जमानत पर बाहर है। इस दौरान वह तीर्थयात्रा कर रहा है और वीआईपी सुविधा का भी लाभ ले रहा है। काशी विश्वनाथ में तो पूरे तामझाम के साथ उसने वीआईपी दर्शन किए। इतना ही नहीं वह अपने भक्तों को प्रवचन भी दे रहा है। अयोध्या में भी उसे वीआईपी के रूप में ट्रीट किया गया।
जमानत पर रिहा आसाराम ने रविवार शाम करीब 8 बजे वीआईपी प्रोटोकॉल के तहत बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए। वह लग्जरी गाड़ी से मंदिर पहुंचा था। बाद में व्हीलचेयर पर बैठकर वीआईपी गेट नंबर 4 से वह मंदिर के अंदर आया। 50 से अधिक पुलिसकर्मी घेरा बनाकर आसाराम को मंदिर के अंदर ले गए। आसाराम के मंदिर पहुंचने की जानकारी उसके अनुयायियों को लग गई थी। जब वह बाहर निकला तो बाहर लोग जमा हो गए।
बीच-बीच में प्रवचन भी देता है आसाराम
उल्लेखनीय है कि आसाराम को राजस्थान और गुजरात हाईकोर्ट को 6-6 महीने की अंतरिम जमानत मिली है। गुजरात हाईकोर्ट में जमानत की याचिका पर सुनवाई के दौरान दलील दी गई थी कि आसाराम हृदय से संबंधित बीमारी से पीड़ित है। कोर्ट ने जमानत की शर्तों में प्रवचन देने पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है, लेकिन वह खुलेआम इसका उल्लंघन करता है। आसाराम, काशी में बड़ागांव के अनौरा स्थित आश्रम में ठहरा है। आसाराम ने व्यास पीठ से अनुयायियों को प्रवचन दिया। उनसे मुलाकात भी की।आश्रम प्रशासन ने सत्संग हॉल में प्रवेश करने वालों का मोबाइल जब्त करवा लिया था, ताकि कोई वीडिओ न बना सके।
अयोध्या में भी वीवीआईपी गेट से किए थे दर्शन
वाराणसी की तरह अयोध्या में भी आसाराम को वीवीआईपी सुविधा मिली थी। 11 मार्च को आसाराम ने अयोध्या में रामलला के दर्शन किए थे। 3 वाहनों का काफिला आदि शंकराचार्य द्वार से राम मंदिर के अंदर पहुंचा और आसाराम को वीआईपी मेहमान की तरह रामलला के दर्शन कराए गए। इतना ही नहीं राममंदिर निर्माण से जुड़े लोगों ने उसे मंदिर के बारे में जानकारी भी दी। करीब 30 मिनट तक राममंदिर में बिताने के बाद आसाराम लक्ष्मण किला वापस आ गया था।
नर्क से बचने के लिए कर रहा है तीर्थयात्रा
बताया जा रहा है कि आसाराम नर्क में जाने से बचने के लिए तीर्थयात्रा कर रहा है। अयोध्या में उसने कहा भी था कि भारत में कई ऐसे तीर्थ स्थान हैं, जहां प्राण त्यागने या जाने मात्र से मनुष्य का कल्याण होता है। शास्त्रों में 7 मोक्षदायी स्थान बताए गए हैं। इनमें अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी, कांची, अवंतिका और पुरी हैं। मानव शरीर में वात, कफ और पित्त तीन दोष होते हैं। तीर्थ स्थलों पर जाने से इन दोषों का प्रभाव कम होता है। शास्त्रों में अयोध्या को पहला स्थान है। मथुरा में रहने वाला व्यक्ति चाहे साधु के वेश में रहा हो, लेकिन साधु का दायित्व न निभाया हो, फिर भी वहां मृत्यु होने पर उसे नरक नहीं जाना पड़ता।
बड़ा सवाल-एक बलात्कारी को ऐसी सुविधा क्यों?
आसाराम को मिली वीआईपी सुविधा पर लोग सवाल उठा रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि आम भक्तों को जहां घंटों लाइन में लगने के बाद भी रामलला या काशी विश्वनाथ के दर्शन नहीं होते, वहीं एक बलात्कारी को ऐसी सुविधा क्यों दी जा रही? जाने-अनजाने में कोई कुकर्मी भगवान के दरबार में चला जाए तो माफ किया जा सकता है, लेकिन कोर्ट से बलात्कार के आरोप में दोषी को आखिर कैसे भगवान के दरबार में जाने की अनुमति दी जा रही है।