दिल्ली पर स्मॉग का कहर: AQI 348 पहुँचा ‘बहुत खराब’ श्रेणी में, स्वास्थ्य पर बढ़ा खतरा
दिल्ली की हवा एक बार फिर जहरीली हो चली है। शुक्रवार को राजधानी का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 348 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। आनंद विहार और अक्षरधाम जैसे इलाकों में भी AQI 348 दर्ज हुआ, जबकि इंडिया गेट पर यह स्तर 267 रहा।
सुबह से ही शहर पर धुंध और स्मॉग की मोटी परत छाई रही, जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत, सीने में जलन और आंखों में चुभन की समस्या होने लगी है। तेज़ हवाओं के कारण थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन यह सुधार अस्थायी साबित हुआ और हवा की गुणवत्ता फिर तेजी से बिगड़ गई।
एनसीआर में भी प्रदूषण बेहाल
नोएडा का AQI 308, गाजियाबाद 302, गुरुग्राम 293 और ग्रेटर नोएडा 285 दर्ज किया गया—ये सभी आंकड़े ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आते हैं।
प्रदूषण के प्रमुख स्रोत
दिल्ली की वायु गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली के अनुसार—
- वाहन प्रदूषण: 13.74%
- निर्माण गतिविधियाँ: 1.89%
- आवासीय प्रदूषण: 3.34%
- पेरिफेरल उद्योग: 6.75%
उत्तर-पश्चिम दिशा से लगभग 10 किमी/घंटा की रफ्तार से चल रही हवा के बावजूद प्रदूषण का स्तर कंट्रोल में नहीं आ सका है।
स्वास्थ्य खतरे बढ़े
सीपीसीबी का अनुमान है कि रविवार तक हवा की गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी में बनी रह सकती है। इससे—
- सांस के मरीजों की परेशानियाँ बढ़ेंगी
- आंखों में जलन और खांसी की शिकायतें बढ़ेंगी
- संवेदनशील लोगों को विशेष सावधानी बरतने की ज़रूरत होगी
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और कैंसर के मामलों को लेकर सरकार की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
दिल्ली पर स्मॉग का कहर: AQI 348 पहुँचा ‘बहुत खराब’ श्रेणी में, स्वास्थ्य पर बढ़ा खतरा
दिल्ली की हवा एक बार फिर जहरीली हो चली है। शुक्रवार को राजधानी का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 348 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। आनंद विहार और अक्षरधाम जैसे इलाकों में भी AQI 348 दर्ज हुआ, जबकि इंडिया गेट पर यह स्तर 267 रहा।
सुबह से ही शहर पर धुंध और स्मॉग की मोटी परत छाई रही, जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत, सीने में जलन और आंखों में चुभन की समस्या होने लगी है। तेज़ हवाओं के कारण थोड़ी राहत मिली थी, लेकिन यह सुधार अस्थायी साबित हुआ और हवा की गुणवत्ता फिर तेजी से बिगड़ गई।
एनसीआर में भी प्रदूषण बेहाल
नोएडा का AQI 308, गाजियाबाद 302, गुरुग्राम 293 और ग्रेटर नोएडा 285 दर्ज किया गया—ये सभी आंकड़े ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आते हैं।
प्रदूषण के प्रमुख स्रोत
दिल्ली की वायु गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली के अनुसार—
वाहन प्रदूषण: 13.74%
निर्माण गतिविधियाँ: 1.89%
आवासीय प्रदूषण: 3.34%
पेरिफेरल उद्योग: 6.75%
उत्तर-पश्चिम दिशा से लगभग 10 किमी/घंटा की रफ्तार से चल रही हवा के बावजूद प्रदूषण का स्तर कंट्रोल में नहीं आ सका है।
स्वास्थ्य खतरे बढ़े
सीपीसीबी का अनुमान है कि रविवार तक हवा की गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी में बनी रह सकती है। इससे—
सांस के मरीजों की परेशानियाँ बढ़ेंगी
आंखों में जलन और खांसी की शिकायतें बढ़ेंगी
संवेदनशील लोगों को विशेष सावधानी बरतने की ज़रूरत होगी
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और कैंसर के मामलों को लेकर सरकार की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठ रहे हैं।