फिल्म तेरे इश्क में : लॉजिक की दीवार से चकनाचूर इश्क .
-डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी, वरिष्ठ पत्रकार
निर्देशक आनंद राय और धनुष की जोड़ी ने इंटेंस प्रेम कहानी दिखाने के चक्कर में लॉजिक चकनाचूर कर दिया है। फिल्म उद्योग के लिए नया फार्मूला है यूनिफॉर्म वाला हीरो-जो हिंसक हो और प्यार में पागलपन की हदें पार करता हो।
कुछ ऐसा ही है फिल्म 'तेरे इश्क में'।
ये लव स्टोरी भी कदम कदम पर लॉजिक की दीवार से टकराती है! धनुष और कृति सेनन की 'तेरे इश्क में' देखकर लगा कि आनंद एल. राय ने अपना पुराना 'रांझणा' वाला फॉर्मूला निकाला, उसमें थोड़ा ए.आर. रहमान का संगीत घोला, और बोल दिया – "बस, हो गया इंटेंस लव ड्रामा!" फिल्म बनारस की घाटों पर सेट है, जहाँ शंकर (धनुष) नाम का एक एयर फोर्स वाला लड़का है-गुस्सैल, आग बबूला और प्यार में इतना पागल कि दुश्मन को देखते ही गोली चला दे।
फिर आती है मुक्ति (कृति सेनन) – एक साइकेट्रिस्ट जो खुद प्रेग्नेंट है, गोलियां खा रही है, और जिंदगी से इतनी कन्फ्यूज्ड कि लगता है वो थैरेपी देने गई है या लेने. दोनों की टक्कर होती है, लेकिन बीच में फैमिली ड्रामा, मेंटल स्ट्रगल, और वो क्लासिक "पुअर vs रिच" वाला ट्विस्ट।
शुरुआत अच्छी की है – लद्दाख की बर्फीली चोटियों से शुरू होकर बनारस के घाटों पर उतरती है। धनुष का शंकर इतना रॉ है कि लगता है वो स्क्रीन से कूदकर आपको ही गले लगा लेगा। लेकिन जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, स्क्रिप्ट शुरू हो जाती है "काकीड़ा ना पेट नू" मोड में -यानी कहाँ से कहाँ पहुँच गई?
एक तरफ इंटेंस लव, दूसरी तरफ टॉक्सिक ऑब्सेशन, और बीच में एजुकेशनल क्वालिफिकेशन के नियम तोड़े जाते हैं जैसे वो सिर्फ आम जनता के लिए हैं. 27 साल की उम्र में एयर फोर्स एग्जाम? डॉक्टरेट तीन साल में? भाई, ये तो लगता है निर्देशक ने गूगल मैथ्स इस्तेमाल किया! क्लाइमेक्स इमोशनल और झिलाऊ है कि आंसू निकल आएंगे, दर्शक सोचेंगे – ये फिल्म पुरानी बॉलीवुड लव स्टोरीज का मिक्स्ड बिरयानी है। कभी रांझणा कभी अतरंगी रे, थोड़ा सा तमाशा तो थोड़ा सा बरेली लॉग्स को घोंट दिया. ये धनुष का तीसरा कमबैक है आनंद राय के साथ! वही बनारस, वही एकतरफा प्यार का पागलपन, टॉक्सिक हो गया है।
धनुष की एक्टिंग अच्छी है। कृति सेनन ने अपना बेस्ट दिया है- प्रेग्नेंट साइकेट्रिस्ट का रोल इतना लेयर्ड कि लगता है वो असल में डॉक्टर है। प्रकाश राज सपोर्टिंग रोल में हैं। बाकी कलाकार फिलर लगते हैं। ए.आर. रहमान ने बैकग्राउंड स्कोर मधुर है और हिन्दी फिल्म में भी एक गाना तमिल में है।
'तेरे इश्क में' एक इमोशनल रोलरकोस्टर है-हंसाएगी, रुलाएगी, लेकिन लॉजिक की तलाश में थका भी देगी। फिल्म युवा शोहदों के लिए है! हीरो को हिंसक दिखाना क्यों जरूरी है? यह फिल्म दिल्ली विश्वविद्यालय और उसके छात्र संघ के साथ-साथ भारतीय वायु सेवा की भी इमेज बिगाड़ती है।
झेल सको तो झेल लो!
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-डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी, वरिष्ठ पत्रकार
'तेरे इश्क में' एक इमोशनल रोलरकोस्टर है-हंसाएगी, रुलाएगी, लेकिन लॉजिक की तलाश में थका भी देगी। फिल्म युवा शोहदों के लिए है! हीरो को हिंसक दिखाना क्यों जरूरी है?