आज के ‘गेट-टुगेदर’ से खुश तो बहुत हुए होगे ‘टॉयलेट महोदय’, अब फिर मत कहना कि नगर निगम वाले नहीं रखते ध्यान.
इंदौर। कहा जाता है कि कचरे के भी दिन फिरते हैं। वैसे ही हमारे शहर के टॉयलेट यानी शौचालयों के भी दिन फिरे। विदेशी वर्ल्ड टॉयलेट डे पर ही सही नगर निगम ने टॉयलेट गेट टूगेदर का आयोजन किया। पिछले साल सेल्फी विद टॉयलेट का आयोजन किया गया था और लोगों ने खीसें निपोरकर तुम्हारे साथ सेल्फी ली थी।
नगर निगम के इस गेट टूगेदर का आयोजन शहर के सभी जोनों के टॉयलेट पर हुआ। महापौर ने नेहरू पार्क स्थित टॉयलेट का लोकार्पण खुशनुमा माहौल में किया। इसके साथ ही पूरे शहर में चार टॉयलेट का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर स्कूली बच्चों द्वारा वर्ल्ड टॉयलेट डे पर 3 आर थीम पर आधारित केटवाक किया गया तथा स्वच्छता संदेश आधारित आकर्षक पेंटिंग्स का निर्माण भी किया गया।
महापौर ने बताया नवाचार की नई परंपरा
इस अवसर पर महापौर ने कहा देश का सबसे स्वच्छ एवं नवाचारी शहर इंदौर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी वर्ल्ड टॉयलेट डे पर एक नया नवाचार प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष जहां नागरिकों ने अपनी-अपनी टॉयलेट के साथ सेल्फी पोस्ट की थीं, वहीं इस वर्ष इंदौर ने एक कदम आगे बढ़ते हुए गेट–टुगेदर टॉयलेट की नई परंपरा शुरू की है। महापौर ने कहा लोग बगीचे, होटल या अन्य स्थानों पर गेट-टुगेदर करते हैं, लेकिन इंदौर में हम नई टॉयलेट बनाकर जनता को समर्पित करते हैं और उनकी स्वच्छता की जिम्मेदारी भी पूरी करते है।
अब जरा सुन लें टॉयलेट महाशय की भड़ास
इस अवसर पर मैंने सोचा कि एक टॉयलेट महोदय से बात कर लेते हैं। मैं निकल पड़ा अपने इलाके के एक टॉयलेट के पास। पहले उपयोग किया फिर पूछा-
पिछले साल सेल्फी इस साल गेट टूगेदर। खुश तो बहुत हुए होगे?
टॉयलेट बोला-हां, खुशी तो बहुत हुई, लेकिन देखो न अब सन्नाटा है। आप मेरा इस्तेमाल कर चुके हो, पानी मिला क्या?
मैंने कहा-हां, अभी पानी नहीं है। खत्म हो गया होगा। रोज तो टैंकर आते हैं, ऊपर टंकी भी लगी है। बाहर बेसिन भी है।
टॉयलेट ने कहा-ऊपर टंकी की साइज देखी है। एक तो कभी भरते नहीं, अगर भर भी दी तो तुरंत खाली हो जाती है। जरा, बेसिन का नल चेक करो। टूटा हुआ था, कल ही नया लगा गए, कई जगह अभी भी टूटे ही हैं।
मैंने कहा-इससे क्या, रोज तुम्हारी सफाई तो होती है?
टॉयलेट ने कहा-एक बार सफाई से कुछ होता है क्या? अगर मुझे साफ देखना चाहते हो तो हमेशा पानी की व्यवस्था रखो।
मैंने कहा-अब इंदौर में हमेशा पानी की व्यवस्था तो हो नहीं सकती।
टॉयलेट ने कहा-क्यों नहीं हो सकती? अब तो पानी की कोई कमी नहीं है। मेरे सिर पर रखी टंकी की साइज बढ़ा दो। उसे दिन भर में दो-तीन बार भरवा दो। मैं साफ रहूंगा और आपको भी मेरे पास फटकने में शर्म नहीं आएगी।
मैंने कहा-थोड़ा तुम भी एडजस्ट कर लो। पूरे देश में आठ बार नंबर वन आ चुके शहर में हो, खुद को थोड़ा साफ नहीं रख सकते क्या?
टॉयलेट बोला-अब तो हद हो गई। मुझे गंदा करो तुम लोग और मुझे ही नसीहत दो कि खुद को साफ रख लो। जब तक कोई निरीक्षण, सर्वेक्षण नहीं होता हमारे आसपास तुम लोग ब्लिचिंग पाउडर या चूना तक नहीं डालते। कुछ नहीं कर सकते तो ब्लिचंग पाउडर ही तो रोज डलवा दो, ताकि आसपास से गुजरते समय तुम्हें नाक पर रूमाल न रखना पड़े।
मैंने कहा-मुझे ऐसा लगता है कि तुम विरोधी दल से मिल गए हो। महापौर के खिलाफ मोर्चा खोल लिया है और शहर के खिलाफ सोच रहे हो?
टॉयलेट ने कहा-हां, मुझे पता था। जब भी कोई समस्या बताता है तो सबको मिर्ची लग जाती है। महापौर का विरोधी बता दिया जाता है। अरे, मैं तो शहर की भलाई के लिए ही कह रहा था। सिर्फ एक दिन की चोंचलेबाजी से कुछ नहीं होने वाला।