डेली कॉलेज में पिछले 10 सालों में सिर्फ एक ही व्यक्ति ने किया काम, डीसी बोर्ड के विवादित सदस्य लुल्ला ने 64 पेज की बुकलेट में किया दावा.
इंदौर। मध्यप्रदेश के प्रतिष्ठित शिक्षा संस्थान डेली कॉलेज लंबे समय से विवादों में है। इस संस्थान का संचालन करने वाले डीसी बोर्ड पर पैरेंट्स से लेकर ओल्ड डेलियन तक लगातार सवाल उठा रहे हैं। वैसे तो बोर्ड में 9 मेंबर हैं, लेकिन इसके एक सदस्य धीरज लुल्ला ने 64 पेज का बुकलेट जारी कर दावा किया है कि सारे काम वही कर रहे हैं। उन्होंने हर पेज पर अपने कामों का बखान किया है।
उल्लेखनीय है कि डीसी बोर्ड में सबसे ज्यादा विवादित सदस्य स्वयं धीरज लुल्ला ही हैं। इसके बाद भी वे अपने काम का बखान ऐसे कर रहे हैं, जैसे बोर्ड में उनके अलावा कोई है ही नहीं। अगर डीसी बोर्ड की इज्जत का ही ख्याल कर लेते तो खुद के नाम की बजाए बोर्ड के सभी 9 सदस्यों के नाम से संवाद नाम का यह बुकलेट जारी होता। लुल्ला ने अपने दावों में पैरेंट्स और ओल्ड डेलियन तथा अन्य सदस्यों द्वारा उठाए गए सवालों पर लीपापोती करने की कोशिश की है।
लुल्ला के रहते ही दो बार बढ़ा कार्यकाल
कई पैरेंट्स और ओल्ड डेलियन डीसी बोर्ड के कार्यकाल को मनमाने तरीके से बढ़ाने पर सवाल उठा रहे हैं। अगर लुल्ला इतनी ही ईमानदारी से संस्थान का काम कर रहे हैं तो कार्यकाल बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ीं, चुनाव करवा लेते? विडंबना यह कि लुल्ला के रहते हुए ही डेली कॉलेज के इतिहास में 2020 और 2025 में दो बार कार्यकाल बढ़ा। इस वर्ष जो छह माह के लिए कार्यकाल बढ़ा उसकी कोई जरूरत ही नहीं थी। इसका मतलब साफ है कि आप डीसी बोर्ड पर अपना कब्जा रखना चाहते हो।
60 लाख रुपए देकर कराया ऑडिट कहां है?
लुल्ला ने संवाद में अपनी ईमानदारी तो पूरी बता दी है, लेकिन यह नहीं बताया कि दो साल पहले कराया गया ऑडिट अब तक क्यों नहीं पेश कर रहे। सूत्र बताते हैं कि यह ऑडिट 60 लाख रुपए देकर डेलॉइट कंपनी से कराया गया था, लेकिन इसकी रिपोर्ट छुपा ली गई है। डेली कॉलेज से जुड़े लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर आप इतने ही ईमानदार हो तो फोरेंसिक ऑडिट करवाकर सदस्यों के सामने पेश क्यों नहीं कर रहे?
आपके कार्यकाल में ही अपमानजनक तरीके से हटे दो प्रिंसिपल
पैरेंट्स कह रहे हैं कि डेली कॉलेज के इतिहास में आपका कार्यकाल काले अक्षरों में लिखा जाना चाहिए। आपके कार्यकाल में ही 2017 में सुमेर सिंह को हटाया गया। इसके बाद 2022 में नीरज बेढोतिया को हटाया गया। इन दोनों को काफी अपमानजनक तरीके से हटाया गया, यहां तक की विदाई समारोह भी नहीं रखा गया।
हमेशा विवादों में रहे हैं लुल्ला
धीरज लुल्ला हमेशा विवादों में रहे हैं। खुशी कूलवाल सुसाइड मामले में भी उनका नाम उछला था। वे बैंक करप्ट भी हैं। एचडीएफसी बैंक ने उनके तथा उनके परिवार के नाम संपत्ति कुर्की का नोटिस भी निकाला था। इसमें पिगडंबर स्थित उनकी फैक्ट्री और त्रिवेणी कॉलोनी के मकान की नीलामी की सूचना प्रकाशित हुई थी। पैरेंट्स और ओल्ड डेलियन यह सवाल उठा रहे हैं कि इतने विवादित व्यक्ति के हाथों आखिर प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान डेली कॉलेज की कमान क्यों है?
इंदौर में नहीं बनी बात तो पहुंचे भोपाल
सूत्र बताते हैं कि लुल्ला डेली कॉलेज का संविधान ही चेंज कराना चाहते हैं। इसके लिए एक अधिकारी को 20 लाख रुपए की पेशकश भी की गई थी। वह अधिकारी तत्कालीन कलेक्टर के पास पहुंच गया था। कलेक्टर की स्पष्ट चेतावनी के बाद उस अधिकारी ने लुल्ला को मदद से मना कर दिया था। इसके बाद लुल्ला भोपाल के एक वरिष्ठ अधिकारी के पास पहुंच गए और उनके माध्यम से कोई स्टे ले आए।
संघ के पदाधिकारियों के नाम का इस्तेमाल
सूत्र बताते हैं कि लुल्ला संघ के पदाधिकारियों के नाम से अधिकारियों तथा अन्य सदस्यों पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं। इनमें से एक को तो डेली कॉलेज में 30 करोड़ का ठेका दे दिया गया है और एक अन्य बड़े पदाधिकारी के नाम से सरकारी विभागों में काम कराने की कोशिश हो रही है। संवाद में लुल्ला जो दावा कर रहे हैं कि उन्हें आगे चुनाव नहीं लड़ना है, इसके पीछे की कहानी यही है कि वे संघ के माध्यम सरकार की तरफ से डीसी बोर्ड में नॉमिनेट होना चाहते हैं। लुल्ला द्वारा संघ का नाम लिए जाने पर लोगों को आश्चर्य हो रहा है, क्योंकि संघ ऐसे कामों में कभी नहीं पड़ता।
संवाद में यह नहीं बताया, एजीएम क्यों नहीं कराते?
रजिस्ट्रार फर्म एंड सोसायटी के तहत रजिस्टर्ड डीसी बोर्ड को नियमानुसार एजीएम कराकर ही कोई फैसला लेना चाहिए, लेकिन ऐसा होता ही नहीं है। सिर्फ डीसी बोर्ड के 9 सदस्य ही सारे फैसले ले रहे हैं और इसकी जानकारी भी फर्म एंड सोसायटी को नहीं भेजी जाती। संस्थान का लेखा-जोखा भी नहीं जमा कराया जाता। जबकि, इस संबंध में सब रजिस्ट्रार ने 28 अगस्त 25 को स्थिति स्पष्ट की थी कि सभी वोटर्स को बुलाकर एजीएम कर निर्णय लेना होगा।