हे इंदौर की सड़कों के गड्ढों, काश तुम्हारा फोटो और वीडियो भी महापौर के पास पहुंच जाता!.
इंदौर। शहर की सड़कों के गड्ढे इस बार बेचारे मायूस हैं और कुछ खुश भी हैं। मायूस इसलिए कि उन्हें लगा था कि दीपावली तक तो उनका रंग-रोगन करने कोई आ जाएगा, लेकिन कोई आया ही नहीं। कुछ इसलिए खुश हैं कि नगर निगम का इतना बड़ा अमला उन्हें देख नहीं पाया और वे अब भी पूरी शान-ओ-शौकत से बीच सड़क पर विराजमान हैं।
आप सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसा हो क्यों रहा है? दरअसल महापौर को एक राहगीर ने तीन इमली क्षेत्र की सड़क का एक वीडियो भेज दिया था। वहां हाल ही में बन रही सड़क जो अभी अधूरी है, उसे फिर से खोद दिया गया था। अब बेचारे शहर के मित्र महापौर पुष्यमित्र भार्गव को गुस्सा आ गया और वे अगले ही दिन मौके पर पहुंच गए और अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई।
शहर की हर सड़क का यही हाल
महापौरजी, जो जानकारी आपको कल एक राहगीर के वीडियो से लगी, वही बात तो शहर की जनता जब से आपने कार्यभार संभाला है तब से कह रही है। इंदौर की कोई ऐसी सड़क नहीं है, जो बनने के बाद दो-चार बार खुदी न हो। और तो और कल जो आपने देखा वह तो अक्सर ही होता है। एक और खास बात खोदने वाला अपना काम कर भाग जाता है और जनता गड्ढो में हिचकोले खाते हुए धूल का मजा लेती है।
आखिर क्यों नहीं बन पा रहा समन्वय
हर बार यही होता है। आपका ही एक विभाग पहले सड़क बनाना शुरू करता है। फिर आपका ही दूसरा विभाग एक तरफ नर्मदा लाइन डालने लगता है। उससे भी मन नहीं भरता तो तीसरा विभाग सीवरेज या स्टॉर्म वाटर लाइन डालने लगता है। कल भी जब आप भागे-भागे निरीक्षण करने पहुंचे तो आखिर क्या पता चला, यही न कि आपका दूसरा विभाग स्टॉर्म वाटर लाइन डालना भूल गया था और अब बन रही सड़क पर खोद कर उसे डाला जा रहा है।
वैसे, आप तो मानते ही नहीं हो की गड्ढ़े भी हैं
शहर की जनता सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से बारिश के बाद से आपसे लगातार गुहार लगा रही है कि महापौरजी, कम से कम त्योहारों तक तो गड्ढे भरवा दो। जनता यह भी याद दिला रही है कि पूर्व के महापौर अनंत चतुर्दशी की झांकी के बाद ही गड्ढे भरने शुरू कर देते थे और दीपावली तक तो शहर की गली-गली चकाचक हो जाती थी। फिर भी आपके कान पर जूं नहीं रेंगी और आप जनता को ही नजर दोष का शिकार ठहराते रहे।
अब जब आंख से देख लिया तब तो जागो
महापौरजी, माना कि आपने अपने मित्र जनता पर भरोसा नहीं किया। इसलिए खुदी हुई सड़कों और गड्ढों पर नजर नहीं पड़ी, लेकिन अब तो आपने आंख से देख लिया। अब तो कोई ऐसा उपाय करो कि जनता की मेहनत की कमाई से बन रही सड़कों को छलनी होने से बचाया जा सके। महापौरजी, अब हर जगह की जनता तो आपको वीडियो और फोटो तो नहीं भेज सकती, दिनभर ठेले वालों से वसूली में लगे अमले को ही गड्ढे गिनने के लिए लगा दो। कम से कम आपको पता तो रहे कि शहर में कितने गड्ढे हैं?